तर्ज: नई
मु: तू ने ऐसा क्या जादू किया,
श्याम मेरे मन भावन पिया।
मन मेरे को मोह लिया
तू ने ऐसा क्या जादू किया,
अंत १: मैं तो भटका था संसार में,
मोह माया के जन जाल में
मि: तूने नैना मिला के,
जाम ऐसा पीला दिया ,
तूने ऐसा क्या जादू किया।-२
अंत २: खुमार ऐसा है मस्ती का छाया ,
पागल अपनी भक्ति का बनाया,
एक इशारा है तूने करके,
मि: दरबार में है बुला लिया (खाटू में है बुला लिया )
तू ने ऐसा क्या जादू किया,
अंत ३: मेरी सोई चित्त शक्ति जगा दी -२
लगन नाम की ऐसी लगा दी ,
मिथ्या लगता है संसार मुझको,
मि: तेरा कण कण में दर्शन किया
तू ने ऐसा क्या जादू किया।
अंत ४: नन्दो जब से शरण तेरी आया ,
सातदुरु से भी तूने है मिलाया
राकेश गता है भजन तुम्हारे
भक्त करते हैं गुणगान सारे
मि: सत्संग का प्याला पीला दिया
हमें अपना ही बना लिया
तू ने ऐसा क्या जादू किया,