कविता

भजन: शिवजी का बाल रूप में दर्शन

तर्ज: मिलो न तुम तो हम घबराएं

दोहा: ब्रज में जब परमेश्वर ने लिया कृष्णावतार।
बाल रूप के दर्शन पाने शिव आये जसुदा द्वार।।

मु: जसुदा मैया दर्श कराए दे,
बहार लाय दिखा दे,
लाल कहाँ सो रहा है।
एक बार तू मोय दिखा दे,
मन की मेरी प्यास भुजा दे,
लाल क्यों रो रहा है।
कैसे तोकु दर्श कराये दू, बाहर लाये दिखा दू।
लाल मेरा सो रहा है,
(रूप है तेरा बड़ा डराना, डर जायेगा मेरा कान्हा,
लाल मेरा सो रहा है )
जसुदा मैया दर्श कराए दे _

अं १: औ मैया री, तू तो बहुत बड़ी बड भागी है, बड भागी है।
पूर्ण परमेश्वर की मैया तू तो कहलायी है, कहलायी है।
तेरी गोदी में जो खेल रहा है, मुझको टूक टूक देख रहा है,
मि: ये बात मोय समझाय दे, लाल क्यों रो रहा है।
जसुदा मैया दर्श कराए दे _

अं २: औ मैया री, तो कु कीर्ति सुनाऊँ ब्रज राज की, ब्रज राज की।
कहाँ तक बखानु गाथा, तेरे इस अद्द्भुत लाल की, लाल की।
सकल भ्रमांड का ये है नायक, सृष्टि के कण कण में व्यापक।
मि: मेरे दिल की तपन मिटाय दे, अब धीरज खो रहा है।
जसुदा मैया दर्श कराए दे _

अं ३ : लगा के समाधी जोगी द्वार पर ज्यों ही बैठा है बैठा है।
मोहन सावरिया ने, खेल निराला ये खेला है, खेला है।
रुदन जोर जोर से ये करता, बार बार जोगी को निरखता।
मि: बाबा मुझे तू सत्य बताय दे, लाल क्यों रो रहा है।
जसुदा मैया दर्श कराए दे _

अं ४: ब्रज में श्याम की बंसी बजेगी बंसी बजेगी।
सारी ही सृष्टि मैया झूम उठेगी झूम उठेगी।
राधा संग ये रास रचाये, प्रेम पंथ का पाठ पढ़ाये (प्रेम लीला ये करके दिखाए )
मेरी गोदी में इसे सुलाय दे, धीरज मेरा खो रहा है।
जसुदा मैया दर्श कराए दे _

अं ५: हरी ने ज्यों ने यूँ ही हर को निहारा है, निहारा है।
आँखों ही आँखों में ऐसा किया इशारा है इशारा है।
रुदन बंद हो गया लाल का, दर्शन हो गया महा काल का।
राकेश भैया भजन सुनाय दे, नन्दो भी खुश हो रहा है।
जसुदा मैया दर्श कराए दे _