आगरा की नगर संरचना

लाकृति- भवन, निवास एवं आवादी:-आगरा नगर का विकास किसी निश्चित योजना के अनुकूल ना होकर अव्यवस्थित- बेतरतीब रुप में हुआ है। यह पुराने तथा नये आबादी का अनूठा संयोग है। यह विभिन्न समयों में अस्तित्व में आने वाले स्थलों का संगुटीकरण है, जो विकास-प्रसार प्रक्रिया द्वारा एक हो गये हैं। यह शहर विस्तारित योजना के अनुरुप ना होकर अनेक ऊंची नीची भूमि , नदी के किनारे का ऊंचा टीला, तलहटी तथा ऊंचा नीचा विशेष स्थलाकृति की रुपरेखा मात्र है।

डा.राधेश्याम द्विवेदी
स्थलाकृति- भवन, निवास एवं आवादी:-आगरा नगर का विकास किसी निश्चित योजना के अनुकूल ना होकर अव्यवस्थित- बेतरतीब रुप में हुआ है। यह पुराने तथा नये आबादी का अनूठा संयोग है। यह विभिन्न समयों में अस्तित्व में आने वाले स्थलों का संगुटीकरण है, जो विकास-प्रसार प्रक्रिया द्वारा एक हो गये हैं। यह शहर विस्तारित योजना के अनुरुप ना होकर अनेक ऊंची नीची भूमि , नदी के किनारे का ऊंचा टीला, तलहटी तथा ऊंचा नीचा विशेष स्थलाकृति की रुपरेखा मात्र है। मुख्यतः इसके दो रुप देखने को मिलते हैं-
1. अव्यवस्थित प्राचीन आकस्मिक बसावटः-मुगल काल मे आगरा पूरब का सर्वाधिक भव्य शहर रहा। आगरा किला इसकी धुरी थी। अधिकतर शाही महल इसी के आसपास अथवा नदी के किनारे बने हैं। ये सिकन्दरा से ताजमहल के बीच लगभग 12 मील की दूरी में बिखरे पड़े हैं।
अकबर के किले के आसपास मुगल शहर के प्राचीन संरचनायें :- इस प्रकार की संरचनाओं में कई स्थलाकृतियां आज भी देखी जा सकती हैं। ये मूलतः पूर्व मुगल या मुगल कालीन बसावट हो सकता है। रावतपाड़ा, पीपल मण्डी, कचहरी घाट तथा बेलनगंज यहां की प्राचीन संरचनायें हैं। ये पुराने जमाने के विशिष्ट व्यवसायी जनों तथा मुगल सरकार के सेवकों के उत्तरवर्तियों वंशजों द्वारा बसाये गये हैं। इस क्षेत्र के भवन पुराने किस्म के हैं। इन्होंने किसी एक निश्चित स्थापत्य पद्धति का अनुकरण नहीं किया है। पत्थरों तथा ईंटो से निमर्मित ये भवन संरखनो दो से चार मंजली हैं। इनके सामने बरामदा तथा खुला प्रांगण देखा जा सकता है। इनकी छते धारीदार एवं सपाट हैं।ये पत्थरो की जालीदार नक्काशियो से भी युक्त पायी गयी हैं। इस प्रकार के प्रमाण किनारी बाजार में देखे जा सकते हैं यह आगरा नगर का मुख्य बाजार हुआ करता था। यह सकरे तथा पतले गलियारों के रुप में अकबर के समय से ही बसा है। यहां आभूषणों की छोटी छोटी दुकानें, कंगन विक्रेता,कपड़ा व्यवसायी,चमड़े के सामानके व्यवसायी फल पेठा दालमोंट की दुकानें एक दूसरे सटकर गली के चारो ओर बनी हुई हैं। यहां का आवासीय स्थल शहर का शहर का हृदय स्थल है। यहां पुराने फैसन के मकान छोटी छोटी ईंटो एवं लाल पत्थरों से बालकनी रुप में बने हुए हैं। नालों के किनारे तथा नदी के तट के पास स्थित ऊंचे नीचे क्षेत्रों में कच्चे मकान मिलते हैं।
2. व्यवस्थित- योजनानुरुप बसावट :- यह बसावट पूववर्ती की अपेक्षा बाद की ब्रिटिसकालीन हो सकती है। यह विभिन्न समयों में आवश्यकता के देखते हुए बसे हैं। 1915 में दयालबाग , 1937 में ईदगाह , 1950 में विजय नगा, 1952 में स्वदेशी बीमा नगर तथा मालवीय कुंज बसे हुए हैं। यह तत्कालीन पश्चिम पाकिस्तान से विस्थापितों द्वारा बसाया गया है। ये भारत पाक विभाजन के बाद आये हुए थे। सिविल लाइन्स एवं छावनी परिषद के मकानात एवं दुकाने आज के आधुनिक शैली के अनुरुप हैं। सिविल लाइन्स पुराने शहर के पश्चिम सरकारी नौकरी वालों के लिए बसाया गया था। आगरा के हृदय रेखा जो पुराने शहर के समानान्तर है , के किनारे ही ज्यादातर सरकारी संस्थायें बयी हैं। व्रिटिस काल में इसे ड्रूमण्ड रोड अब महात्मा गांधी मार्ग कहा जाता है।
आगरा नगर निगम के योजनानुरुप संरचनाएं- आगरा नगर निगम की स्थापना में हुई थी। इसके पहले वह 1863 में नगर पालिका और बाद में महानगर पालिका बना था। नगर निगम द्वारा योजनानुरुप संरचनाएं सिविल लाइन्स, खंदारी रोड, वेस्ट अर्जुन नगर, रकाबगंज, विजय नगर, फटी धरती , नाई की मण्डी, राजा की मण्डी, खन्दारी,घटवासन की हरिजन कालोनी,खटिक पाड़ा, छिपी टोला आदि 212 मोहल्ले थे जो 17 क्षेत्रों में विभक्त था। इसमें आधुनिक रुप में बने हुए मकानात हैं। 1866 में फतेहपुर सीकरी में नगर पालिका स्थापित की गई ।

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