लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

मखौड़ा धाम उपेक्षित , 84 कोसी परिक्रमा एक अप्रैल से शुरू 

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डा. राधेश्याम द्विवेदी उन दिनों देवता व अप्सराएं पृथ्वी लोक में आते-जाते रहते थे। बस्ती मण्डल में हिमालय का जंगल दूर-दूर तक फैला हुआ करता था। जहां ऋषियों व मुनियों के आश्रम हुआ करते थे। आबादी बहुत ही कम थी। आश्रमों के आस-पास सभी हिंसक पशु-पक्षी हिंसक वृत्ति और वैर-भाव भूलकर एक साथ रहते थे। परम… Read more »

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ साम्प्रदायिक नहीं ,भारतीयों का रक्षक

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डा. राधेश्याम द्विवेदी अखण्ड भारत की एकता का संवाहक एकमात्र संगठन :- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जब स्थापना हुई ,उस समय अपने हिंदू समाज की स्थिति ऐसी थी कि जो उठता था वही हिंदू समाज पर आक्रमण करता था और यह दृश्य बना हुआ था कि जब कभी भी कोई आक्रमण होगा तो हिंदू मरेगा,… Read more »



 महामानव संभाजी भिड़े की असलियत जानें

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डा. राधेश्याम द्विवेदी जाने-माने लोकप्रिय नेता:- संभाजी भिड़े ‘गुरूजी’ महाराष्ट्र के जाने-माने लोकप्रिय नेता हैं। संत विनोवा भावे, महात्मा गांधी जय प्रकाशनारायण नरेन्द्रदेव लोहिया तथा अन्ना हजारे की तरह वे एक सर्वोदयी जननेता हैं। हिंदुत्व के लिये उनका योगदान अवर्णनीय है। वह मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी के कट्टर अनुयायी हैं और महाराष्ट्र की वर्तमान युवा… Read more »

नववर्ष का संकल्प गरीबों की सेवा 

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डा. राधेश्याम द्विवेदी ऊर्जा का नवीनीकरण :- 2018 का नया साल आ गया। नववर्ष हम सभी के लिए नई उमंगे, नया उत्साह लेकर आता हैं। हमें एक नया वादा अपने आपसे करना चाहिए कि हम अपने माता-पिता, अध्यापक, मालिक-सेवक,छोटे-बड़े भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी, मित्र-पड़ोसी, प्रकृति-पशु-पक्षी एवं अन्य सभी से दोस्ती व सदाशयता बनाए रखेंगे और सभी… Read more »

दुर्गा सप्तशती शक्ति उपासना का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ 

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डा. राधेश्याम द्विवेदी दुर्गा सप्तशती हिन्दू धर्म का सर्वमान्य ग्रंथ है। इसमें भगवती के कृपा के सुन्दर इतिहास के साथ बड़े बड़े गूढ़ साधन रहस्य भरे हैं।कर्म भक्ति और ज्ञान की त्रिविध मंदाकिनी बहानेवाला यह ग्रंथ भक्तों के लिए वाछाकल्पतरु हैं। सकाम भक्त इसके सेवन से मनोऽभिलिषित दुर्लभतम वस्तु या स्थिति सहज ही प्राप्त करते… Read more »

महाराष्ट बन्द के परिप्रेक्ष्य में सेक्युलरों का सोची समझी साजिस 

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डा. राधेश्याम द्विवेदी ब्राह्मण विरोधी राजनीति की जड़ 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में ज्योतिबा फुले के सत्यशोधक समाज के रूप मंक रखा गया था, और जिसका राजनीतिक स्वरूप 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में जस्टिस पार्टी के द्वारा रखा गया था, वह आंदोलन अपने उतरार्द्ध में मूल स्वरूप से ही भटक गया। ब्राह्मण विरोध राष्ट्र-विरोध में… Read more »

गृहस्थ आश्रम की व्यापकता

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डा. राधेश्याम द्विवेदी आश्रम क्या है :- प्राचीन काल में सामाजिक व्यवस्था के दो स्तंभ होते थे- वर्ण और आश्रम। मनुष्य की प्रकृति -गुण, कर्म और स्वभाव-के आधार पर मानवमात्र का वर्गीकरण चार वर्णो में हुआ है। व्यक्तिगत संस्कार के लिए उसके जीवन का विभाजन चार आश्रमों में किया गया है। ये चार आश्रम -(1)… Read more »

 कर्मफल

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डा. राधेश्याम द्विवेदी भारतीय संस्कृति कर्मफल में विश्वास करती है । हमारे यहाँ कर्म की गति पर गहन विचार किया गया है और बताया गया है कि जो कुछ फल प्राप्त होता है, वह अपने कर्म के ही कारण होता हैः- मनुष्याः कर्मलक्षण( म.भा. अश्वमेघ पर्व 43- 21) अर्थात् मनुष्य का लक्षण कर्म ही है… Read more »

 रिटायरमेंट जीवन 

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डा.राधेश्याम द्विवेदी सेवानिवृत्ति पर पेंशन का लाभ :- सेवानिवृत्ति सरकारी कर्मचारी को एक नियमित आय और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किए जाते हैं। इन वित्तीय लाभों से आत्मनिर्भरता और अच्छे स्तर का जीवन जीने की भावना आती है। इन लाभों में सामान्यतया छुट्टी का नकदीकरण, सेवानिवृत्ति उपदान और अंशदायी भविष्य निधि शामिल… Read more »

 बटेश्वर शिलालेख से उत्पन्न विरोधाभास

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डा. राधेश्याम द्विवेदी राजा परमार्दिदेव का परिचय :-गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना 8वी शताब्दी में उज्जयिनी में हुई थी।उनके वंशज बाद में उज्जयिनी के साथ साथ गंगा यमुना के दोआब क्षेत्र कान्यकुब्ज या कन्नौज पर भी शासन करते रहे। इसी वंश का शासक नागभट्ट द्वितीय का समामनत राजा चन्द्रवर्मन (नन्नुक) ने बुन्देलखण्ड वर्तमान उ. प्र…. Read more »