लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

भारत में न्यायिक प्रणाली, समस्याएं और सुधार 

Posted On & filed under विधि-कानून.

एडवोकेट डा. राधेश्याम द्विवेदी लोकतांत्रिक भारत सरकार की तीन स्वतंत्र शाखाएं हैं – कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका। भारतीय न्यायिक प्रणाली अंग्रेजों ने औपनिवेशिक शासन के दौरान बनाई थी। इसको आम कानून व्यवस्था के रुप में जाना जाता है जिसमें न्यायाधीश अपने फैसलों, आदेशों और निर्णयों से कानून का विकास करते हैं। देश में कई स्तर… Read more »

 रोहिंग्या मुसलमान भारतीय नहीं अंतर्राष्टीय समस्या 

Posted On & filed under विविधा.

डा. राधेश्याम द्विवेदी अवैध बांग्लादेशी हैं रोहिंग्या :- बौद्ध बहुल म्यांमार में करीब 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं. इनको मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी माना जाता है. म्यांमार सरकार ने कई पीढ़ियों से रह रहे इस समुदाय के लोगों की नागरिकता छीन ली है. लगभग सभी रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन (अराकान) राज्य में रहते… Read more »



राष्ट्रीय अखण्डता का संवाहक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 

Posted On & filed under विविधा.

डा. राधेश्याम द्विवेदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जब स्थापना हुई ,उस समय अपने हिंदू समाज की स्थिति ऐसी थी कि जो उठता था वही हिंदू समाज पर आक्रमण करता था और यह दृश्य बना हुआ था कि जब कभी भी कोई आक्रमण होगा तो हिंदू मरेगा, हिंदू लूटेगा .यह एक परम्परा बन गयी थी हिंदू… Read more »

यमुना पूजन से रामलीला का शुभारम्भ 

Posted On & filed under विविधा.

डा. राधेश्याम द्विवेदी यमुना के शुद्धिकरण एवं निर्मलीकरण के लिए श्रीगुरु वशिष्ठ मानव सर्वांगीण विकास सेवा समिति आम जनता में वर्ष 1990 से सक्रिय है। श्री गुरु वशिष्ठ मानव सर्वांगीण विकास सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष पण्डित अश्विनी कुमार मिश्र जी ने एक अनूठी पहल शुरु किया है। इनकी संस्था व इनका जीवन स्वच्छ नदियां… Read more »

भारत में स्वयंभू बाबाओं की मनमानी 

Posted On & filed under समाज.

डा.राधेश्याम द्विवेदी अपने लिए कोई भी सांसारिक इच्छा न रखने वाले तथा परोपकार में अपना जीवन बिताने वाले को ही संत कहते हैं। रविदास जी ऐसे ही संत थे, जिनके लिए उनका उनका कर्म और परोपकार ही पूजा था।अपना सांसारिक हित करने की इच्छा समाप्त होकर जब परहित की इच्छा प्रबल हो जाती है, तब… Read more »

शिव एक विशिष्ट देव

Posted On & filed under धर्म-अध्यात्म.

डा. राधेश्याम द्विवेदी शिव हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। वे त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव भी कहते हैं। इन्हें महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे ‘भैरव’ के नाम से भी जाना जाता है। वेद में इनका नाम… Read more »

विधि या कानून का लचीलापन

Posted On & filed under विधि-कानून, विविधा.

डा. राधेश्याम द्विवेदी विधि या कानून किसी भी नियम संहिता को कह सकते हैं। विधि प्रायः भलीभांति लिखी हुई संसूचकों (इन्स्ट्रक्शन्स) के रूप में होती है। समाज को सम्यक ढंग से चलाने के लिये विधि अत्यन्त आवश्यक है।विधि मनुष्य का आचरण के वे सामान्य नियम होते है जो राज्य द्वारा स्वीकृत तथा लागू किये जाते… Read more »

 मानव शरीर की सार्थकता 

Posted On & filed under लेख, साहित्‍य.

डा. राधेश्याम द्विवेदी एक जीव के लिये मनुष्य शरीर एक अलभ्य अवसर होता है! इस का सदुपयोग करने से वह जीवन लक्ष्य को प्राप्त करता हुआ परम शान्ति का अधिकारी बन सकता है, किन्तु यदि वह इस अवसर को व्यर्थ गँवाता है अथवा दुरुपयोग करता है तो फिर नरक की यातनायें मिलती हैं और चौरासी… Read more »

सोमनाथ मंदिर के तर्ज पर राम मन्दिर का निर्माण 

Posted On & filed under विविधा.

डा. राधेश्याम द्विवेदी दोनों मंदिर बिद्वेष की भावना से तोड़े गये थे :- इतिहास हमेशा वर्तमान पर हमले करता है और वर्तमान को बचाने के लिए बलिदान दिया जाता है तब यही वर्तमान फिर इतिहास बनता है. हिन्दुओ का इतिहास काफी संघर्षपूर्ण रहा है. एक समय था जब हिन्दू अपने देश में शांतिपूर्वक रहते थे…. Read more »

माता-पिता के प्रति सन्तान के कर्तव्य 

Posted On & filed under समाज.

आचार्य राधेश्याम द्विवेदी संसार का सुन्दरतम शब्द “माँ”:- संसार का सबसे सुन्दरतम व प्यारा शब्द “माँ” है? सबसे प्यारा, सबसे सुन्दरतम शब्द संसार में है– “माँ” l इसमें इतनी मीठास भरी हुई है ! माँ का पूरा स्नेह, पूरा प्यार. ! माँ या पिता, यानि दोनों का प्यार l माँ और पिता का जो दर्जा… Read more »