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    Homeसाहित्‍यकविताएक और नई सुबह

    एक और नई सुबह

    एक और नई सुबह

    सुरभित गर्वित

    स्वतंत्र स्वछंद।

    उन्मुक्त गगन

    मन आतुर अधीर

    आसमान छूने को

    भरने नई उड़ान।

    जाना किधर

    किञ्चित विचलित,

    दिखेगी जो राह

    सरपट दौड़ेंगे कदम

    बिना सोचे विचारे।

    लक्ष्य अडिग

    पुष्पित पल्लवित

    पथ नहीं पाथेय नहीं 

    अनजान सुनसान राह

    दूर करके सभी अवरोध

    मिलेगी ‘नवीन’ मंजुल मंजिल।

              -सुशील कुमार ‘ नवीन’

    सुशील कुमार नवीन
    सुशील कुमार नवीन
    लेखक दैनिक भास्कर के पूर्व मुख्य उप सम्पादक हैं। पत्रकारिता में 20वर्ष का अनुभव है। वर्तमान में स्वतन्त्र लेखन और शिक्षण कार्य में जुटे हुए हैं।

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