अटल राजनीति की गरिमा स्थापित करने वाली शख्यिसत हैं और हमेशा रहेंगे

विवेक कुमार पाठक
आओ फिर से दिया जलाएं, गीत नया गाता हूं, क्या भूलूं क्या याद करुं।  भाव प्रवण कविताएं लिखने वाले अटल बिहारी वाजपेयी आज खामोश हैं। वे गहरे मौन में हैं लोग भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की खनकदार आवाज को याद कर रहे हैं। करोड़ों देशवासी दुआ कर रहे हैं कि अटलजी जीवन की ओर फिर लौटें। उनकी सांसें जीवन का दिया फिर से जलाएं।
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रतिष्ठावान राजनेता हैं। आज सवा सौ करोड़ लोगों वाले देश में वाजपेयी एक ऐसे नेता हैं जो हर दिल अजीज हैं। अपनी गरिमामय राजनैतिक शैली और कमर से नीचे वार न करने की कसम उन्होंने कभी न तोड़ी। अटल जैसा राजनेता होना राजपथ पर चलने वालों का एक सुनहरा सपना हो सकता है। अटल होना आसान नहीं होता है। अटल वही हो सकता है जो विचार पर अटल हो, व्यवहार में अटल हो, विनम्रता में अटल हो। भारत में अटल वही बनता है जिसकी राजनैतिक शुचिता अटल हो, जिसके सिद्धांत अटल हों और हमेशा अटल रहने वाले जीवन मूल्य हों।
मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी का पुस्तैनी पुराना घर भारतीय लोकतंत्र की ताकत का दस्तावेज है। शिन्दे की छावनी कमल सिंह का बाग नामक एक संकरे मोहल्ले में रहने वाले एक  ब्राहमण परिवार के बेटे अटल बिहारी वाजपेयी एक गरिमापूर्ण राजनैतिक हस्ती बनेंगे किसने सोचा था।
न उनके परिवार ने इस बेटे में भारतीय राजनीति का ओजस्वी सूरज देख पाया होगा न पड़ोसी उसके कृतित्व को समझ पाए होंगे। ये संभव ही नहीं होता। ऐसी दिव्यदृष्टि लोगों को मिल जाती तो क्या नहीं होता मगर आगे बड़ते कदम जीवन की दिशा बता जाते हैं।
ग्वालियर में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी उन अनवरत राजनेताओं में से हैं जिन्होंने जवाहरलाल नेहरु से लेकर भारत के कई प्रधानमंत्रियों को सत्ता में बैठते और उतरने देखा है। कवि हृदय अटल बिहारी वाजपेयी आचार विचार,संस्कार और सिद्धांत की राजनीति करने वाले जननेता हैं। अटल बिहारी वाजपेयी चाहे 2 सांसद वाली भाजपा के नेता हों या फिर 1996, 1999 में भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नायक हों उनका व्यवहार और तेवर कभी नहीं बदले। राजनीति में वे समय दर समय काफी कुछ अलग अलग रहे मगर वे निरंतर ही भावनाशील कवि बने रहे।
भारत की पहली राष्ट्रवादी सरकार चलाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी एक दिन भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे ये जवाहर लाल नेहरु ने क्यों कहा था ये अटल बिहारी वाजपेयी के राजनैतिक सफर और उसके गौरव को जान समझकर बेहतर जाना जा सकता है। वे पहले 13 दिन के लिए सत्ता में आए और विश्वासमत पर सत्य की भाषा बोलकर विपक्षियों को शर्मिन्दा कर गए। उन्हें देश से फिर प्रेम और दुलार मिला और भारतीय जनता पार्टी नई लोकसभा सीटें लाकर गठबंधन सरकार की अगुआ बनी। देश के विभिन्न मत मतांतर वाले 13 दलों को साथ जोड़कर अटल बिहारी वाजपेयी ने देशहित में बेहतर सरकार चलाई। उनकी इस सरकार के खिलाफ आया विश्वासमत सिर्फ एक वोट से गिरा जिसे वे आसानी से जीत सकते थे मगर अटल बिहारी वाजपेयी की शख्सियत ही कुछ ऐसी रही जिसमें समझौते की  राजनीति की कभी कोई गुंजाइश नहीं थी। जो दल उन्हें सत्ता से गिराने के लिए सांप और छछूंदर की दोस्ती को साकार करते दिखे उनके असली चरित्र को न केवल पूरे देश ने देखा बल्कि उस राजनैतिक छल प्रपंच और अवसरवाद ने अटल बिहारी वाजपेयी को पूरे देश का अभिमन्यु बना दिया। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में देश में तीसरी दफा एनडीए की सरकार जनता के उसी विश्वास के कारण भारत में बनी।
केन्द्र में 13 दलों की गठबंधन सरकार वाले अटल बिहारी वाजपेयी के समय में भारत ने पोखरन विस्फोट करके पूरी दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराया। तमाम अमरीकी प्रतिबंधों के बाबजूद भारत ने पोखरन विस्फोट के शौर्य पर डटे रहकर पूरी दुनिया में अपना डंका बजवाया। अटल कविहृदय पहले थे राजनेता बाद में। वे पाकिस्तान से शांति और मैत्री के संबंध चाहते थे। लाहौर यात्रा में वे बस से शांति का पैगामा लेकर गए थे और नवाज शरीफ से अमन की बात पर गले मिले थे मगर परवेज मुसर्रफ जैसे सेनानायक पाकिस्तान को अमन की बजाय कारगिल के किनारे ले गए। अंतर्मन से क्षुब्ध अटल ने उस वक्त राष्ट्र के नाम भावुक संदेश में कारगिल के गुनाहगारों को न भूलने वाला संदेश देने की बात कही थी।
इसके बाद पूरे देश ने देखा। कश्मीर घाटी से कारगिल की ओर निरंतर तोपें गरजीं और आखिरकार टाइगर हिल पर भारत का तिरंगा फहरा दिया गया।
अटल के कार्यकाल में स्वर्णिम चर्तुभुज और पूर्व पश्चिम गलियारा, उत्तर दक्षिण गलियारा आधारभूत सौगातें रहीं। भारत के लाखें गांवों को पक्की सड़क देने वाले वे पहले प्रधानमंत्री रहे। आज अटलजी के समय की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना गांव गांव की आबादी को पक्की सड़क की सौगातें दे रही है।
उनके कार्यकाल में राजनैतिक मूल्य अपने श्रेष्ठ रुप में रहे। संसद में तब भी बहस होती रहीं मगर कमर के नीचे वार न करने की परिपाटी उनके समय में काफी हद तक बनी रही।
अटल पार्टी के शिखर नेता रहे मगर उनके लिए आदर्श और सिद्धात शिखर पर रहे। वर्तमान प्रधानमंत्री और तब के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी अटल की वो नसीहत कभी नहीं भूल पाएंगे जो उन्होंने राजधर्म पालन करने की बात करके दी थी।
अटल एक अनवरत यात्रा हैं जिसके हजारों पड़ाव हैं। ये पड़ाव विश्वास के पड़ाव हैं। ये आत्मविश्वास दिलाते हैं कि हम कहीं बढ़ रहें हैं और पहुंच रहे हैं। चलना कहीं पहुंचना नहीं होता। अटल पर सरोकार और सिद्धांत रहे हैं जो देशवासियों को मान मर्यादा सिखाते हैं। अटल राजनीति की गरिमा स्थापित करने वाली शख्यिसत हैं और हमेशा रहेंगे।

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