धर्म-अध्यात्म लेख

श्री महालक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त्त

संवत् 2083 कार्तिक कृष्ण अमावस्या रविवार दि. 8 नवम्बर 2026 आयुष्मान योग एवं स्वाति नक्षत्र से समन्वित दीपोत्सव के पावन अवसर पर सर्वे भवन्तु सुखिनः….. की अग्रिम शुभकामनाएं प्रेषित करते कर्मकाण्डीय विप्र पुजारी परिषद नीमच के सभी सदस्यों की ओर से अध्यक्ष पं.मालचंद शर्मा एवं पूर्व अध्यक्ष व परामर्शदाता पं.राधेश्याम उपाध्याय प्रतिष्ठाचार्य व आद्य पुजारी स्वयंसिद्ध विनायक गणेश मंदिर नीमच केन्ट ने बताया कि इस बार दीपावली पर्व सप्ताह पर्यन्त मनाया जायेगा।
5 नवम्बर को गौवत्स द्वादशी, 6 नवम्बर को धन तेरस, 7 नवम्बर को मास शिवरात्रि, काली चतुर्दशी एवं छोटी दीपावली, 8 नवम्बर को नरक रूप चतुर्दशी, दीपावली, श्रीमहालक्ष्मी पूजा, पितृकार्य अमावस्या, 9 नवम्बर को देवकार्य सोमवती अमावस्या, 10 नवम्बर को अन्नकूट, गोवर्धन पूजा एवं बलि पूजा, 11 नवम्बर को यम द्वितीया, भाईदूज, विश्वकर्मा पूजा एवं चित्रगुप्त पूजा, 20 नवम्बर को देवउठनी ग्यारस (तुलसी विवाह) का पर्व मनाया जावेगा।
सम्पन्नता, ऐष्वर्य व लाभ शुभ हेतु श्री महालक्ष्मीजी अपनी योग्य पुरूषार्थी संतानों पर कृपावन्त रहती हैं। तदैव लग्नं….. के अनुसार भी महालक्ष्मी पूजन सर्वदा शुभ फलकारक मान्य है, फिर भी प्रसंगवश परम्परानुसार जनहित में नीमच (म.प्र.) के अक्षांश-रेखांश के आधार पर परिषद द्वारा सर्वसम्मत शोधन निर्णय उपरान्त लक्ष्मी पूजा हेतु शुभ मुहूर्त्त प्रकाशित किए हैं जो मंदसौर, चित्तौड व समीपवर्ती क्षेत्रों में बिना किसी विशेष अंतर के सर्वत्र मान्य होंगे। यथा
(1) प्रातः 7.24 से 9.40 बजे तक वृश्चिक लग्न
(2) प्रातः 9.32 से 10.55 बजे तक लाभ का चौघड़िया
(3) दिन में 10.55 से 12.18 बजे तक अमृत का चौघड़िया
(4) दिन में 11.50 से 12.38 बजे तक अभिजित मुहूर्त
(5) दिन में 1.31 से 3.02 बजे तक कुम्भ स्थिर लग्न
(6) दिन में 1.41 से 3.04 बजे तक शुभ का चौघड़िया
(7) दिन में 1.55 से 2.38 बजे तक विजय मुहूर्त
(8) दिन में 3.00 से 3.56 बजे तक बुध की होरा
(9) दिन में 3.56 से 4.51 बजे तक चंद्रमा की होरा
(10) दिन में 4.43 से शाम 6.43 बजे तक गोधूलि वेला
(11) सायं 5.43 से 6.51 बजे तक गुरु की होरा
(12) सायं 5.43 से 8.07 बजे तक प्रदोष वेला
(13) सायं 5.51 से 7.27 बजे तक शुभ का चौघड़िया
(14) सायं 6.11 से रात्रि 8.08 बजे तक वृषभ लग्न
(15) सायं 7.27 से रात्रि 9.03 बजे तक अमृत का चौघड़िया
(16) रात्रि 9.03 से 10.36 बजे तक चल का चौघड़िया
(17) रात्रि 9.24 से 10.29 बजे तक चंद्रमा की होरा  
(18) रात्रि 11.15 से 12.11 बजे तक गुरु की होरा
(19) रात्रि 11.49 से 12.37 बजे तक निशीथ काल
(20) रात्रि 12.38 से 2.52 बजे तक सिंह लग्न
(21) रात्रि 1.48 से 3.24 बजे तक लाभ का चौघड़िया। अस्तु श्री
विशेष – चन्द्रमा की होरा में पूजन से आत्मिक शांति, चित्त प्रसन्नता, बुध होरा में बौद्धिक एवं व्यापार वृद्धि, बृहस्पति होरा में सद्ज्ञान, भगवत्कृपा प्राप्ति। यथा – जिस प्रकार गुरू का चौघडिया शुभ, बुध का लाभ, चन्द्रमा का अमृत एवं शुक्र का चंचल है, ऐसे ही इनकी होरा भी शुभकारक प्रामाणिक है। गोधूलि वेला में पूजन से गोधन वृद्धि, अमृतपान, आरोग्यता लाभ।