राजनीति भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है गौवंश ! January 27, 2025 / January 27, 2025 | Leave a Comment भारत एक ऐसा देश है जहां गाय को माता का दर्जा दिया गया है। भारत विश्व का ऐसा देश है जहां पर दुनिया में सबसे अच्छी नस्ल वाला गौवंश पाया जाता है, लेकिन आज देश में गौवंश की जितनी दुर्दशा है, शायद किसी और की नहीं है। पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि पिछले साल […] Read more » गौवंश
राजनीति विधि-कानून दोषी बचे नहीं और निर्दोष को सज़ा मिले नहीं ! January 24, 2025 / January 27, 2025 | Leave a Comment हाल ही में पश्चिमी बंगाल और केरल में कोर्ट के दो फैसले पूरे देश में चर्चा का विषय रहे। उल्लेखनीय है कि कोलकाता के बहुचर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज में लेडी डॉक्टर के साथ हुए दिल दहला देने वाले रेप और मर्डर केस में सियालदह कोर्ट ने हाल ही में दोषी संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई है।इस फैसले ने एक ओर न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत किया है, वहीं पर दूसरी ओर पीड़ित परिवार और समाज के एक बड़े वर्ग को निराश भी किया। माननीय कोर्ट ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ नहीं माना और दोषी को मौत की सजा देने से इनकार कर दिया। इधर, केरल के तिरुवनंतपुरम में एक ऐतिहासिक फैसले के तहत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने 24 वर्षीय ग्रीष्मा को अपने बायफ्रेंड की हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई है। गौरतलब है कि अक्टूबर 2022 में ग्रीष्मा ने अपने प्रेमी शेरोन राज की आयुर्वेदिक टॉनिक में जहर मिलाकर हत्या कर दी थी।माननीय कोर्ट ने अपने 586 पत्रों के फैसले में इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला करार दिया और कहा कि ग्रीष्मा ने जानबूझकर और योजनाबद्ध तरीके से शेरोन की हत्या की। अपने फैसले के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि ‘ग्रीष्मा का यह अपराध न केवल क्रूर था, बल्कि यह समाज को गलत संदेश देने वाला है।’ बहरहाल, यहां यह जानना जरूरी है कि आखिर ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर'(दुर्लभतम से दुर्लभ) केस आखिर है क्या ? इस संबंध में पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि वर्ष 1980 में पंजाब में बच्चन सिंह बनाम पंजाब राज्य का एक ऐसा मामला आया था जब देश में फांसी की सजा पर बहस छिड़ी थी।बच्चन सिंह नाम के एक शख्स को अपनी पत्नी की हत्या के जुर्म में 14 साल की सजा सुनाई गई। जेल से छूटने के बाद वह अपने भाई के साथ उसी के घर पर रहने लगा, लेकिन भाई हुकुम सिंह और उसके बीवी-बच्चों को यह पसंद नहीं था, इसलिए विवाद लगातार बढ़ता चला गया और 4 जुलाई, 1977 को गुस्से में आकर बच्चन सिंह ने कुल्हाड़ी से अपनी दो भतीजी और भतीजे को मार डाला। हुकुम सिंह की एक और बेटी पर वार किए गए, लेकिन वो बच गई। इसके बाद सेशन कोर्ट की मौत की सजा को माननीय हाइकोर्ट ने भी बरकरार रखा।बच्चन सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 136 के आधार पर स्पेशल लीव पीटिशन (एसएलपी) दायर की। संविधान के अनुच्छेद 14,19 और 21 का हवाला देकर उसने फांसी की सजा के खिलाफ अपील की। भारतीय संविधान में अनुच्छेद-21 ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’ देता है। इसका तात्पर्य है कि किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता जब तक कि विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन न किया जाए। इसके बाद धारा 302 में सजा को लेकर पूरे देश में बहस शुरू हो गई। इस संदर्भ में बाद में माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी एक बहुत ही ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बच्चन सिंह की फांसी को बरकरार रखा लेकिन साथ ही फांसी की सजा की परिभाषा को विस्तार देते हुए माना कि ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस में भारतीय संविधान में दिए गए जीने के अधिकार को वापस लिया जा सकता है। भारत के इतिहास में यह पहला मामला था, जब ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की बात कही गई थी। कहना ग़लत नहीं होगा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 1980 में फैसला सुनाते हुए फांसी को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ में डाला। साथ ही यह भी कहा कि फांसी की सजा तभी दी जानी चाहिए, जब उम्रकैद काफी न हो।अगर हत्या या अपराध करने का तरीका बहुत ही बर्बर है तो फांसी की सजा सुनाई जा सकती है। संक्षेप में कहें तो, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ‘दुर्लभतम’ (रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस) सिद्धांत की स्थापना की, जिसमें कहा गया है कि मृत्युदंड केवल सबसे असाधारण मामलों में ही किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालतों को इतनी कड़ी सजा देने के लिए विशेष कारण बताने चाहिए। वास्तव में, कानून की नजरों में एक भी दोषी बचना नहीं चाहिए और किसी भी निर्दोष को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें तो सारे दोषी भले ही छूट जाएं लेकिन एक निर्दोष को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए। सुनील कुमार महला Read more »
राजनीति कौशल विकास की ओर अग्रसर इंडिया January 21, 2025 / January 21, 2025 | Leave a Comment भारत पचपन करोड़ से भी अधिक युवा आबादी के साथ आज दुनिया का सबसे युवा देश है। कहते हैं कि युवा ही किसी देश का असली भविष्य और राष्ट्र की रीढ़ होते हैं। पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि भारत के युवा अपनी कौशल(स्किल) और प्रतिभा(टेलेंट) के माध्यम से वैश्विक स्तर पर लगातार अपनी विशिष्ट व […] Read more » India moving towards skill development कौशल विकास की ओर अग्रसर इंडिया
कला-संस्कृति धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक महत्व भी है मकर संक्रांति का ! January 14, 2025 / January 13, 2025 | Leave a Comment 14 जनवरी को स्नान और दान का पर्व मकर संक्रांति है। वास्तव में, यह शीत ऋतु की समाप्ति और नई फसल ऋतु के आरंभ का प्रतीक तथा भारतीय संस्कृति का प्रमुख त्योहार है, जो पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि यह पुण्य अर्जित करने और पापों से […] Read more » Makar Sankranti has not only religious but also scientific importance. मकर संक्रांति
कविता मकर संक्रांति की शुभकामनाएं January 14, 2025 / January 13, 2025 | Leave a Comment अलाव की गर्माहट हो, तिल-गुड़ के लड्डुओं की मिठास की शुभकामनाएं ! सुख खड़ा हो द्वार आपके, शान्ति और समृद्धि का वास हो, कोई न हताश हो, चहुंओर उल्लास हो मकर संक्रांति की शुभकामनाएं ! खुशियों की तरंग हो, आसमां में हर तरफ पतंग ही पतंग हो, मकर संक्रांति की शुभकामनाएं ! विश्वास की डोर […] Read more » मकर संक्रांति की शुभकामनाएं
लेख इंटरनेट के दौर में कम हो रही है पठनीयता ! January 10, 2025 / January 10, 2025 | Leave a Comment सुनील कुमार महला आज सोशल मीडिया का दौर है। सूचना क्रांति के इस दौर में आज पठनीयता का अभाव हो गया है। आज से दस-बीस बरस पहले लोग जितने अखबार और पत्र-पत्रिकाएं पढ़ा करते थे, आज शायद उतना कोई नहीं पढ़ता है। पुस्तकालय में जाकर तो आज कोई व्यक्ति पुस्तक, पत्रिका या अखबार इश्यू करवाकर […] Read more » Readability is decreasing in the Internet era इंटरनेट के दौर में पठनीयता
लेख क्या मानवीय गतिविधियों का परिणाम हैं भूकंप ? January 8, 2025 / January 8, 2025 | Leave a Comment सुनील कुमार महला भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है, जो बहुत बार बड़े जान-माल के नुकसान का कारण बनती है। भूकंप पृथ्वी के स्थलमंडल या इसके ऊपरी मेंटल में ऊर्जा के अचानक मुक्त होने के कारण आते हैं। गौरतलब है कि भूकंप के तीन मुख्य प्रकार होते हैं, जिनमें क्रमशः टेक्टोनिक, ज्वालामुखीय और पतन भूकंपों को […] Read more » Are earthquakes the result of human activities भूकंप
राजनीति विकास ही है लाल आतंक को खत्म करने का पुख्ता तरीका January 8, 2025 / January 8, 2025 | Leave a Comment सुनील कुमार महला ‘लाल आतंक” एक दंश है, एक नासूर है। सच तो यह है कि ‘लाल आतंक’ आज हमारे देश के लिए एक बड़ी चुनौती है। हाल ही में नक्सलियों के हमले में छत्तीसगढ़ के बीजापुर में एक आईईडी ब्लास्ट में डीआरजी(डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के 8 जवान शहीद हो गए। इस हमले में ड्राइवर […] Read more » Development is the only sure way to end red terror लाल आतंक को खत्म करने का पुख्ता तरीका
राजनीति विश्ववार्ता अविश्वसनीय देश है चीन ! January 7, 2025 / January 7, 2025 | Leave a Comment सुनील कुमार महला हमेशा – हमेशा से चीन के भारत के प्रति इरादे कुछ ठीक नहीं रहे हैं। समय-समय पर चीन का असली चेहरा दुनिया के सामने आ रहा है और सच तो यह है कि चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों से बाज नहीं आ रहा है। इस क्रम में हाल ही में भारत ने चीन […] Read more »
लेख तेज़ी से बढ़ रहा है ई-कचरा January 6, 2025 / January 6, 2025 | Leave a Comment (ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर- 2024 रिपोर्ट) सुनील कुमार महला आज पूरे विश्व में प्रौद्योगिकी हमारे दैनिक जीवन का एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण हिस्सा हो गई है। हम काम से लेकर मनोरंजन और संचार से लेकर शिक्षा, व्यापार, चिकित्सा तक, लगभग-लगभग हर काम के लिए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों का उपयोग करते हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी की तीव्र प्रगति के साथ, एक […] Read more » E-waste is increasing rapidly ई-कचरा तेज़ी से बढ़ रहा है ई-कचरा
पर्यावरण लेख 2025 में भी जारी रहेगा तापमान बढ़ने का सिलसिला ! January 3, 2025 / January 3, 2025 | Leave a Comment सुनील कुमार महला बढ़ती जनसंख्या, विभिन्न मानवीय गतिविधियों और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन, वनों की अंधाधुंध कटाई, शहरीकरण, औधोगिकीकरण के कारण धरती पर निरंतर जलवायु परिवर्तन होता चला जा रहा है। कहना ग़लत नहीं होगा कि इस जलवायु परिवर्तन का असर अब पृथ्वी पर साफ दिखने लगा है। सच तो यह है कि आज […] Read more » The trend of increasing temperature will continue in 2025 also जारी रहेगा तापमान बढ़ने का सिलसिला
लेख समाज समय की जरूरत है डिजिटल फास्टिंग ! January 3, 2025 / January 2, 2025 | Leave a Comment सुनील कुमार महला डिजिटल क्रांति के इस युग में बच्चों का स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ रहा है जो बच्चों की सेहत और भविष्य दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। कहना ग़लत नहीं होगा कि बदलते दौर में आज मोबाइल, इंटरनेट, सोशल नेटवर्किंग साइट्स हर व्यक्ति की दिनचर्या के अभिन्न हिस्से हो चले हैं। वास्तव […] Read more » The need of the hour is digital fasting!