धर्म-अध्यात्म “मनुष्य का मानव और दानव बनना उसके अपने हाथों में हैं” November 3, 2018 / November 3, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, ससार में हम अनेक प्राणियों को देखते हैं। दो पैर और दो हाथ वाला प्राणी जो भूमि पर सीधा खड़ा होकर व सिर ऊंचा उठाकर चलता है, जिसके पास बुद्धि है और जो सोच विचार कर अपने काम करता है, उसे मनुष्य कहते हैं। मनुष्य की विशेषता यह है कि उसके पास […] Read more » “मनुष्य का मानव और दानव बनना उसके अपने हाथों में हैं” अग्निहोत्र अनुचित ऋषि दयानन्द कर्तव्य-अकर्तव्य चिन्तन ध्यान मनन माता पिता स्वाध्याय
धर्म-अध्यात्म “सभी दुःखों से मुक्ति व आनन्दमय मोक्ष की प्राप्ति के चार साधन” November 2, 2018 / November 2, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य को अपने पूर्वजन्म के शुभ कर्मों के परिणामस्वरूप परमात्मा से यह श्रेष्ठ चोला व शरीर मिला है। सब प्राणियों से मनुष्य का शरीर श्रेष्ठ होने पर भी यह प्रायः सारा जीवन दुःख व क्लेशों से घिरा रहता है। दूसरों लोगों को देख कर यह अपनी रुचि व सामर्थ्यानुसार विद्या प्राप्त कर […] Read more » अधिकानन्द अन्न आनन्द कर्म गुण जल न्यून आनन्द वायु सुभाषित स्वभाव
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज का लक्ष्य है ‘कृण्वन्तो विश्मार्यम्’ November 1, 2018 / November 1, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, महर्षि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना देश से अविद्या दूर करने के साथ वेदाज्ञा ‘‘कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” अर्थात् समस्त विश्व को आर्य वा श्रेष्ठ विचारों सहित उत्तम आचरण वाला बनाने के लिये की थी। आर्यसमाज ने अपने 143 वर्षों के इतिहास में इस दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किये हैं परन्तु किन्हीं कारणों […] Read more » अर्थ शुचिता अहंकारशून्यता आर्यसमाज का लक्ष्य है ‘कृण्वन्तो विश्मार्यम्’ महर्षि दयानन्द मितव्ययता विनम्रता
धर्म-अध्यात्म -बलिदास दिवस व पुण्य तिथि पर-“भारत भाग्य विधाता ऋषि दयानन्द” October 31, 2018 / October 31, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, आज ऋषि दयानन्द (1825-1883) का आंग्ल तिथि के अनुसार बलिदान दिवस वा पुण्य तिथि है। हिन्दी तिथि के अनुसार यह 7 नवम्बर, 2018 को है। ऋषि दयानन्द जी का बलिदान हुए पूरे 135 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं। इस अवधि में उनके अनुयायियों एवं आर्यसमाज ने जो कार्य किये हैं उसमें अनेक […] Read more » अज्ञान सत्यार्थप्रकाश अवतारवाद ऋग्वेद-यजुर्वेद ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका ऋषि दयानन्द जन्मना जातिवाद फलित ज्योतिष मूर्तिपूजा मृतक श्राद्ध
धर्म-अध्यात्म “क्या निराकार ईश्वर की मूर्ति बन सकती है?” October 29, 2018 / October 29, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, ईश्वर की अनेक परिभाषाओं में से एक परिभाषा यह है कि जिसने इस समस्त जड़-चेतन जगत को बनाया है उसे ईश्वर कहते हैं। चेतन जगत से अभिप्राय प्राणियों की अनेक योनियां हैं जिनमें प्रत्येक शरीर में एक चेतन आत्मा विद्यमान है। ईश्वर एक अनादि, अनुत्पन्न, नित्य, अविनाशी, अमर व अनन्त चेतन सत्ता […] Read more » “क्या निराकार ईश्वर की मूर्ति बन सकती है?” अग्ने इन्द्र भगवान कृष्ण वरूण वायु हिरण्यगर्भ
धर्म-अध्यात्म “अविद्या से रहित तथा विद्यायुक्त एकमात्र ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश” October 27, 2018 / October 27, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, महाभारत काल के बाद से पूरे विश्व के अध्यात्म एवं सामाजिक जगत में घोर अविद्या फैली हुई है। मनुष्य को अपनी आत्मा सहित ईश्वर के सत्यस्वरूप का ज्ञान नहीं है। उसे अपने परिवार व समाज के प्रति भी अपने कर्तव्यों का ज्ञान नहीं है और न उसे यह पता है किससे क्या […] Read more » ईश्वर ईश्वर का स्वरूप ईश्वर के कार्य ईश्वर के गुण ईश्वरीय ज्ञान उपनिषद कर्म और स्वभाव दर्शन मनुस्मृति वेद
धर्म-अध्यात्म “सही विधि से ईश्वरोपासना न करने पर उसका लाभ नहीं होता” October 26, 2018 / October 26, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, आस्तिक लोग ईश्वर की पूजा व उपासना करते हैं। पूजा व उपासना को भक्ति का नाम भी दिया जाता है। हम जानते हैं कि हमें हर काम को सीखना पड़ता है। हम यह प्रयास करते हैं कि हमें सीखाने वाला व्यक्ति उस विषय का पूर्ण जानकार हो। अपूर्ण जानकार से कोई भी […] Read more » अजन्मा अनन्त दयालु धर्त्ता निराकार न्यायकारी सब सृष्टि का कर्त्ता सर्वज्ञ सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान हर्त्ता
धर्म-अध्यात्म “आर्यसमाज का मुख्य उद्देश्य सत्य ज्ञान वेद का प्रचार कर असत्य एवं अज्ञान को दूर करना” October 25, 2018 / October 25, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, आर्यसमाज एक धार्मिक, सामाजिक, राष्ट्रीय, देश-समाज का रक्षक, अन्धविश्वासों से मुक्त तथा अन्धविश्वासों व सामाजिक कुरीतियों को दूर करने वाला विश्व के इतिहास में अपूर्व संगठन है। विचार करने पर निष्कर्ष निकलता है कि आर्यसमाज का मुख्य उद्देश्य अविद्या का नाश तथा विद्या की वृद्धि करना है। विद्या किसे कहते हैं और […] Read more » आचार्य डा. रामनाथ वेदालंकार पं. कालूराम जी पं. गंगा प्रसाद उपाध्याय पं. गणपति शर्मा पं. गुरुदत्त विद्यार्थी पं. बुद्धदेव मीरपुरी पं. लेखराम पं. शिवशंकर शर्मा महात्मा हंसराज स्वामी दर्शनानन्द सरस्वती स्वामी विद्यानन्द सरस्वती स्वामी वेदानन्द तीर्थ स्वामी श्रद्धानन्द
धर्म-अध्यात्म “मर्यादा पुरुषोत्तम राम को अमरता प्रदान करने वाले विश्व वन्दनीय ऋषि वाल्मीकि” October 24, 2018 / October 24, 2018 | 2 Comments on “मर्यादा पुरुषोत्तम राम को अमरता प्रदान करने वाले विश्व वन्दनीय ऋषि वाल्मीकि” मनमोहन कुमार आर्य, आज महर्षि वाल्मीकि जी का जन्म दिवस है। हम यह भूल चुके हैं कि हमारी धर्म व संस्कृति के गौरव मर्यादा पुरुषोत्तम राम को हम जितना जानते हैं उसका आधार वैदिक ऋषि वाल्मीकि जी का महाकाव्य ‘‘रामायण” है। भारत व अन्यत्र श्री राम के विषय में जो भी ग्रन्थ रचे गये वह […] Read more » अहंकार क्रोध जीवन परिवार मनुष्य काम महत्वाकांक्षा महर्षि वाल्मीकि लोभ समाज सूर्य महर्षि दयानन्द स्वार्थ
धर्म-अध्यात्म “सभी मनुष्यों की मृत्यु भविष्य की अवश्यम्भावी घटना” October 23, 2018 / October 23, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, हम प्रतिदिन टीवी, समाचारपत्रों आदि के माध्यम से लोगों की मृत्यु का समाचार सुनते रहते हैं। संसार में आज से 150 वर्ष पूर्व जितने भी लोग उत्पन्न हुए, वह सभी मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं। उनके बाद भी जो पैदा हुए उसका भी 50 प्रतिशत से अधिक भाग मृत्यु का ग्रास […] Read more » ऋषि महात्मा मुनि विद्वान सन्त सन्देश-वाहक साधु
धर्म-अध्यात्म “क्या व्यवहार में हम ईश्वर को अपने सभी कर्मों का साक्षी मानते व बुरे कर्मों से डरते हैं?” October 20, 2018 / October 20, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, हम यह लेख लिख रहे हैं इसलिये कि हमारे मन में यह विचार आया है। हमने अपने जीवन में इस विषय का लेख नहीं पढ़ा हां वैदिक साहित्य में इससे सम्बन्धित प्रचुर सामग्री अवश्य मिलती है। आर्यसमाज व हम ईश्वर, जीव तथा प्रकृति के नित्यत्व व अनादित्व के सिद्धान्त को मानते हैं। […] Read more » अनादि अविनाशी आधिदैविक आधिभौतिक ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप नित्य निराकार सर्वज्ञ सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान
धर्म-अध्यात्म “वैदिक धर्म सर्वश्रेष्ठ क्यों है?” October 19, 2018 / October 19, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, संसार में अनेक मत मतान्तर प्रचलित हैं। सभी अपने आप को मत, पन्थ आदि न कह कर ‘‘धर्म” कहते हैं। क्या यह सभी धर्म हैं? यदि ये सभी धर्म होते तो इनकी सभी मान्यतायें, सिद्धान्त व परम्परायें एक समान होती व सत्य होती। जल का जो धर्म है वह उसका तरल होना, […] Read more » “वैदिक धर्म सर्वश्रेष्ठ क्यों है?” ईश्वर उपासना परोपकार पुरुषार्थ प्रार्थना यज्ञ स्तुति