टेक्नोलॉजी राजनीति “सोशल मीडिया पर देशविरोध का कारोबार: अभिव्यक्ति की आज़ादी या एजेंडा मार्केटिंग?” May 6, 2025 / May 6, 2025 | Leave a Comment (पेआउट के बदले देशविरोध? अब नहीं चलेगा!) सोशल मीडिया पर ‘पेआउट’ लेकर भारत को बदनाम करने वालों की अब खैर नहीं। IT एक्ट 2000 और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड 2021 के तहत सरकार ने सख़्त रुख अपनाया है। अब देशविरोधी कंटेंट पर न तो चुप्पी होगी, न छूट। अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर अफवाह […] Read more »
कला-संस्कृति खान-पान क्या किसी की भूख की तस्वीर लेना जरूरी है? May 5, 2025 / May 5, 2025 | Leave a Comment “सोशल मीडिया युग में करुणा की कैद” सोशल मीडिया के युग में भलाई और करुणा अब मौन संवेदनाएँ नहीं रहीं, वे कैमरे के फ्रेम में क़ैद होती जा रही हैं। आज अधिकांश मदद ‘लाइक्स’ और ‘फॉलोवर्स’ के लिए की जाती है, न कि सच्ची इंसानियत से। सहायता अब एक ‘कंटेंट’ बन चुकी है और ज़रूरतमंद […] Read more » भूख की तस्वीर
लेख स्वतंत्रता का स्वप्न April 30, 2025 / April 30, 2025 | Leave a Comment नारी की स्वतंत्रता की धारा,चली हर मन में इक विचार सा।बंधनों से बंधी नहीं वह,स्वतंत्रता का है अब ख्वाब हमारा। कभी कहा गया, तुम छोटी हो,तुमसे न होगा कोई काम बड़ा।पर भीतर की शक्ति ने कहा,रखो ख्वाब, जियो तुम नया। संवेदनाओं से भरी है उसकी बात,गहरी नज़र में छुपा ज्ञान का साथ।हर कदम पर लिखे […] Read more » स्वतंत्रता का स्वप्न
लेख हिंदी साहित्य की आँख में किरकिरी: स्वतंत्र स्त्रियाँ April 30, 2025 / April 30, 2025 | Leave a Comment हिंदी साहित्य जगत को असल स्वतंत्र चेता प्रबुद्ध स्त्रियां अभी भी हजम नहीं होती। उन्हें वैसी ही स्त्री लेखिका चाहिए जैसा वह चाहते हैं। वह सॉफ्ट मुद्दों पर लिखे, परिवार, समाज, कुछ मनोविज्ञान, स्त्री-पुरुष संबंध। आधुनिकता का या आधुनिक स्त्री का पर्याय उनके लिए वह है कि बोल्ड लेखन कर सके, अश्लीलता को बोल्ड लेखन […] Read more » हिंदी साहित्य की आँख में किरकिरी
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म अक्षय तृतीया: समृद्धि, पुण्य और शुभारंभ का पर्व April 29, 2025 / April 29, 2025 | Leave a Comment अक्षय तृतीया, जिसे ‘आखा तीज’ भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पावन पर्व है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है—जो कभी क्षय (नाश) न हो। यही कारण है कि यह दिन शुभ कार्यों, दान-पुण्य, निवेश और नए आरंभ के लिए […] Read more » Akshaya Tritiya: A festival of prosperity virtue and beginnings अक्षय तृतीया: समृद्धि पुण्य और शुभारंभ का पर्व
कविता मुस्कान का दान April 25, 2025 / April 25, 2025 | Leave a Comment कभी किसी शाम की थकी हुई साँसों में,तुम्हारा एक हल्का सा “कैसे हो?” उतरता है —जैसे रेगिस्तान में कोई बूँद गिर जाए,जैसे सूनी आँखों में उम्मीद फिर गहराए। दान क्या है?सिर्फ अन्न, जल, या स्वर्ण की गाथा नहीं,कभी-कभी वक्त का दिया पल भीकिसी की टूटती दुनिया की परिभाषा बदल देता है। तुम जब अनकहे दर्द […] Read more » gift of smile\
राजनीति पहलगाम की गोलियाँ: धर्म पर नहीं, मानवता पर चली थीं April 25, 2025 / April 25, 2025 | Leave a Comment — प्रियंका सौरभ कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुआ आतंकी हमला सिर्फ एक गोलीबारी नहीं थी—यह एक ऐसा खौफनाक संदेश था जिसमें गोलियों ने धर्म की पहचान पूछकर चलना शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो आतंकियों ने पहले पर्यटकों से उनका धर्म पूछा, फिर उन्हें जबरन कलमा पढ़ने के लिए कहा, और इंकार […] Read more » पहलगाम की गोलियाँ
लेख कोई पानी डाल दे तो मैं भी चौंच भर पीलूं: चुपचाप मरते परिंदों की पुकार April 24, 2025 / April 24, 2025 | Leave a Comment तेज़ होती गर्मी, घटते जलस्रोत और बढ़ती कंक्रीट संरचनाओं के कारण पक्षियों के लिए पानी और छांव जैसी बुनियादी ज़रूरतें भी दुर्लभ होती जा रही हैं। परिंदे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं, और अगर वे गायब हो गए तो यह धरती और भी सूनी हो जाएगी। आधुनिक समाज एसी चलाने में सक्षम है […] Read more » चौंच भर पीलूं
कविता अभी तो मेंहदी सूखी भी न थी April 23, 2025 / April 23, 2025 | Leave a Comment — पहलगाँव हमले पर एक कविता अभी तो हाथों से उसका मेंहदी का रंग भी नहीं छूटा था,कलाईयों में छनकती चूड़ियाँ नई थीं,सपनों की गठरी बाँध वो चल पड़ा था वादियों में,सोचा था — एक सफर होगा, यादों में बस जाने वाला। पर तुम आए —नाम पूछा, धर्म देखा, गोली चलाई!सर में…जहाँ शायद अभी भी […] Read more » terrorist attack in pahalgaon अभी तो मेंहदी सूखी भी न थी
कविता पहलगाम की चीख़ें April 23, 2025 / April 23, 2025 | Leave a Comment जब बर्फ़ीली घाटी में ख़ून बहा,तब दिल्ली में सिर्फ़ ट्वीट हुआ।गोलियाँ चलीं थी सरहद पार से,पर बहस चली—”गलती किसकी है सरकार से?” जो लड़ रहे थे जान पे खेलकर,उनकी कुर्बानी दब गई मेल में।और जो बैठे थे एयरकंडीशन रूम में,लिखने लगे बयान—”मोदी है क़सूरवार इसमें।” कब समझोगे, ये दुश्मन बाहर है,जो मज़हब की आड़ में […] Read more » पहलगाम की चीख़ें
राजनीति पहलगाम हमला: कब सीखेंगे सही दुश्मन पहचानना? April 23, 2025 / April 23, 2025 | Leave a Comment “पहलगाम का सच: दुश्मन बाहर है, लड़ाई घर के भीतर” पहलगाम हमला जिहादी मानसिकता का परिणाम है। मोदी सरकार ने हमेशा आतंकवाद का मुँहतोड़ जवाब दिया है। राजनीतिक आलोचना आतंकवाद के असली स्रोत से ध्यान भटकाती है। जातियों में बंटा समाज आतंक से निपटने में अक्षम होगा। हमें आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा होना […] Read more » पहलगाम हमला
मीडिया लेख समाज अजमेर से इंस्टाग्राम तक: बेटियों की सुरक्षा पर सवाल April 22, 2025 / April 22, 2025 | Leave a Comment शिक्षा या शिकारी जाल? पढ़ी-लिखी लड़कियों को क्यों नहीं सिखा पाए हम सुरक्षित होना? अजमेर की छात्राएं पढ़ी-लिखी थीं, लेकिन वे सामाजिक चुप्पियों और डिजिटल खतरों से अनजान थीं। हमें यह स्वीकार करना होगा कि शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, सुरक्षा भी सिखाए। और परवरिश सिर्फ आज्ञाकारी बनाने के लिए नहीं, संघर्षशील और सचेत नागरिक बनाने […] Read more » बेटियों की सुरक्षा पर सवाल