राजनीति भाजपा का पराभव July 23, 2010 / December 23, 2011 | 3 Comments on भाजपा का पराभव -के. विक्रम राव राज्य सभा के चुनाव तथा झारखण्ड में गत माह सत्ता की होड़ में भाजपा के बर्ताव से उसके आचार की शालीनता और सिद्धांन्तों की शुचिता क्षुण्ण हुई है। मात्र भाजपा का उल्लेख इसलिए कि वह अपने को जुदा मानती है। अत: उसे परखना समीचीन है। भाजपाइयों ने शायद शेक्सपियर को अत्यधिक पढ़ […] Read more » Bhajpa भाजपा
धर्म-अध्यात्म हम सब अब हिंदू हैं ! – अमेरिकी साप्ताहिक ‘न्यूजवीक’ में लिजा मिलर का वक्तव्य ! July 22, 2010 / December 23, 2011 | 7 Comments on हम सब अब हिंदू हैं ! – अमेरिकी साप्ताहिक ‘न्यूजवीक’ में लिजा मिलर का वक्तव्य ! – हरिकृष्ण निगम कम से कम हमारे देश में कथिक प्रबुद्ध विचारकों को इस बात से अवश्य आश्चर्य होगा यदि कोई अमेरिकी पत्रकार विश्व विख्यात अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ‘न्यूजवीक ‘, ( अगस्त 24 व 31, 2009) में टिप्पणी लिखे कि अमेरिका एक ईसाई राष्ट्र नहीं रहा है। सेमिटिक धर्मों की गलाकाट प्रतिद्वंदिता व अपनी-अपनी श्रेष्ठता-ग्रंथि के […] Read more » America अमेरिकी
धर्म-अध्यात्म इस्लाम का चिंतन July 22, 2010 / December 23, 2011 | 16 Comments on इस्लाम का चिंतन – हृदयनारायण दीक्षित भारत प्राचीन राष्ट्र है। सभी राष्ट्र उसके निवासियों के सह अस्तित्व से ही शक्ति पाते हैं। राष्ट्र से भिन्न सारी अस्मिताएं राष्ट्र को कमजोर करती है। भारत में जाति अलग अस्मिता है। मजहबी अस्मिता की समस्या से ही भारत का विभाजन हुआ था। गांधीजी हिन्दू-मुस्लिम की साझा आस्था बना रहे थे। आस्थाएं […] Read more » Islam इस्लाम
खेत-खलिहान गाँव खुशहाल हों तो देश की अर्थव्यवस्था सुधरे July 22, 2010 / December 23, 2011 | 6 Comments on गाँव खुशहाल हों तो देश की अर्थव्यवस्था सुधरे – मुलखराज विरमानी स्वयंसेवी संस्थाएं और जागरूक जनता इस बात से चिंतित है कि हमारे गाँव, 63 वर्ष स्वतंत्रता के पश्चात् भी, गरीब और असहाय क्यों हैं? माना कि खेती की उपज की वस्तुओं की कीमतों में काफी उछाल आया है परंतु इस उछाल का लाभ बीच-विचोले व्यापारियों और फुटकर विक्रेताओं ने अधिक उठाया। किसानों […] Read more » village अर्थव्यवस्था गांव
विविधा हमें अच्छा लगता है जब दूसरों के मामले को लेकर हमारे पेट में दर्द होता है July 21, 2010 / December 23, 2011 | 2 Comments on हमें अच्छा लगता है जब दूसरों के मामले को लेकर हमारे पेट में दर्द होता है -ऋतु चटर्जी हमें अच्छा लगता है जब दूसरों के मामले को लेकर हमारे पेट में दर्द होता है। आखिर हम मीडिया वाले जो हैं। विवादित जोड़े और मीडिया वालों में काफी समानता दिखाई देती है। कारण दूसरे निजी जीवन में क्या कर रहे हैं इससे हमारा पेट दुखता है और हम चाहते हैं जब हम […] Read more » cases मामले
राजनीति आखिर केन्द्रीय जांच एजेंसियों के टारगेट में क्यों है गुजरात? July 21, 2010 / December 23, 2011 | 3 Comments on आखिर केन्द्रीय जांच एजेंसियों के टारगेट में क्यों है गुजरात? -अक्षपाद् गौतम विगत दिनों जब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर गठित विशेष जांच दल के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया गया तो पूरे देश की नजर एक बार फिर से गुजरात के तरफ घूम गया। हालांकि मोदी ने जांच दल के समक्ष प्रस्तुत होने से पहले समाचार माध्यमों […] Read more » Gujarat गुजरात
विविधा भोजपुरी के नाम रही राजधानी की एक शाम July 21, 2010 / December 23, 2011 | Leave a Comment “दिल्ली, बंबई, कलकत्ता, चाहें रहिह मसूरी में… पढिह-लिखिह कवनो भाषा, बतिअइह भोजपुरी में….” भोजपुरी की प्रसिद्ध गायिका भानुश्री ने मंच पर आकर जब यह गीत शुरु किया, तो एक पल के लिये ऐसा लगा मानो देश-विदेश में फैले करोडों भोजपुरी भाषियों को एक संदेश दिया जा रहा हो, कि आप कहीं भी रहें, कोई भी […] Read more » Bhojpuri भोजपुरी
समाज दलित समस्याओं के समाधान के लिए सार्थक पहल की आवश्यकता July 21, 2010 / December 23, 2011 | 5 Comments on दलित समस्याओं के समाधान के लिए सार्थक पहल की आवश्यकता – अखिलेश आर्येन्दु पिछले दिनों हरियाणा के हांसी के मिर्चपुर गांव के दलितों के अनेक घर गांव के दबंगो के जरिए जला देने के बाद दलित समस्या एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। एक सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर कब तक दलित उच्च वर्गों के जरिए उत्पीड़ित किए जाते रहेंगे। […] Read more » Dalit दलित
विविधा सृजन और संतति में ही अमरत्व है July 21, 2010 / December 23, 2011 | 2 Comments on सृजन और संतति में ही अमरत्व है – हृदयनारायण दीक्षित काल से बड़ा कोई नहीं। यमराज भी उनके कहे अनुसार चलते हैं। उगना, खिलना, पकना, झरना काल के खेल हैं। प्राचीन मान्यता है कि स्वर्ग में न बुढ़ापा है और न ही मृत्यु। कठोपनिषद् के अनुसार स्वर्ग प्राप्ति का साधन अग्नि-विद्या है। नचिकेता ने यमराज से वही अग्नि रहस्य पूछा था। यमराज […] Read more » Creation सृजन
महिला-जगत वर्तमान युग की नारी July 21, 2010 / December 23, 2011 | 14 Comments on वर्तमान युग की नारी – नीलम चौधरी ”यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्त फलाः क्रिया”॥ अर्थात् जहाँ स्त्रियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं जहां ऐसा नहीं होता वहाँ समस्त यज्ञार्थ क्रियाएं व्यर्थ होती है। यह विचार भारतीय संस्कृति का आधार स्तंभ है। भारत में स्त्रियों को सदैव उच्च स्थान दिया गया […] Read more » Woman नारी
धर्म-अध्यात्म ‘जिहाद’ की अन्तर्राष्ट्रीय व्याख्या July 20, 2010 / December 23, 2011 | 1 Comment on ‘जिहाद’ की अन्तर्राष्ट्रीय व्याख्या – धाराराम यादव अनेक मुस्लिम विद्वानों ने समय-समय पर यह असंदिग्ध घोषणा की है कि ‘इस्लाम’ शांति, प्रेम एंव भाईचारे का मजहब है, किन्तु विगत दो शताब्दियों से सारा विश्व इस्लामिक जिहाद से त्रस्त है। विशेषकर विश्व के गैर इस्लामिक देश-अमेरिका, यूरोप के देश, इजरायल और भारत आदि इस्लामिक जिहादी आंतकवाद का कहर झेल रहे […] Read more » Jihad इस्लाम जिहाद
महिला-जगत आरक्षण या नेताओं के सिरदर्द की दवा July 20, 2010 / December 23, 2011 | 1 Comment on आरक्षण या नेताओं के सिरदर्द की दवा -संतोष कुमार मधुप संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लेकर पिछले दिनों जिस तरह हंगामा मचा वह अभूतपूर्व था। हंगामे की वजह और भी अद्भुत थी। लालू-मुलायम के नेतृत्व में कुछ दलों के सांसद, संसद में जिस बात के लिए जूतम-पैजार करने पर आमादा थे उसके निहितार्थ क्या हो सकते हैं? लालू, […] Read more » Woman Reservation महिला आरक्षण