समाज दलित ईसाइयों की मुश्किलों का हल रंगनाथ आयोग नहीं! June 17, 2010 / December 23, 2011 | 3 Comments on दलित ईसाइयों की मुश्किलों का हल रंगनाथ आयोग नहीं! -आर. एल. फ्रांसिस जस्टिस रंगनाथ मिश्र कमीशन की रिपोर्ट को लेकर देश के अल्पसंखयक वर्गों में खासी हलचल है और ईसाई समुदाय भी इससे अछूता नही है। इस रिपोर्ट में ईसाइयों को शैक्षणिक रुप से पिछड़ा बताया गया है। इसी तरह अन्य मामलों में भी उनकी स्थिति चिंतनीय बतायी गई है। शिक्षा और स्वस्थ्य के […] Read more » Problem रंगनाथ मिश्र आयोग रिपोर्ट
समाज गणना मानव की हो, झुंड की नहीं! June 14, 2010 / December 23, 2011 | Leave a Comment जातिगत जनगणना के विरोध में आगे आए विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख लोग -आर. एल.फ्रांसिस जनगणना में जाति को शामिल किया जाए या नही इसको लेकर देश में जोरदार बहस खड़ी हो गई है। इस बहस को धारधार बनाने एवं इसे जनता के बीच ले जाने के मकसद से विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कुछ प्रमुख […] Read more » Ethnic census जातीय जनगणना
प्रवक्ता न्यूज़ माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में नामांकन प्रारंभ June 12, 2010 / December 23, 2011 | Leave a Comment MAKHANLAL CHATURVEDI RASHTRIYA PATRAKARITA VISHWAVIDYALAY ADMISSION NOTIFICATION 2010-2011 Read more » Makhanlal Chaturvedi Patrakarita Vishwavidyalay माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
विविधा वंचित जनजातियों की तरक्की में राह बनना होगा June 11, 2010 / December 23, 2011 | 2 Comments on वंचित जनजातियों की तरक्की में राह बनना होगा – भरतचंद्र नायक अराजकता को ही सरल भाषा में जंगल कानून कहा जाता है। लेकिन यह एक हकीकत है कि जंगल कानून को तोड़कर देश और मध्यप्रदेश के जनजाति समुदाय और स्वतंत्रता प्रेमी जनता ने ब्रिटिश शासन को कड़ी चुनौती दी थी। माना जाता है कि स्वतंत्रता प्रेमी वनवासियों की उत्कट आजादी की लालसा का […] Read more » Aboriginal आदिवासी जनजाति वनवासी
साहित्य शमशेर बहादुर सिंह की जन्मशती पर विशेष June 11, 2010 / December 23, 2011 | Leave a Comment अनकहे सत्य का कवि शमशेर -विजया सिंह कला विषेशकर कविता की कला कलाकार को, कवि को नितांत व्यक्तिगत, निजी मानवीय स्थितियों और संवेगों से परिचित कराती है। फिर भी कविता एकालाप नहीं अत्यंत अंतरंग किन्तु सक्रिय संवाद है। शमशेर का निजी उन्हें एकाकी नहीं बनाता। कविता के निजी पलों में कवि के साथ सम्पूर्ण संसार […] Read more » Shamsher Bahadur Singh शमशेर बहादुर सिंह
आर्थिकी भारतीय अर्थव्यवस्था और संप्रग रिपोर्ट कार्ड June 10, 2010 / December 23, 2011 | Leave a Comment -अशोक हांडू भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुरूप मानसून ने 31 मई 2010 को केरल के तट पर दस्तक दी। वैश्विक आर्थिक संकट और सूखे के कठिन दौर से निकलने के बाद इस साल का मानसून देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। अच्छी शुरुआत होने के कारण यह उम्मीद की जा सकती […] Read more » Economy अर्थव्यवस्था संप्रग
खेत-खलिहान वर्षा सिंचित खेती की क्षमताओं का इस्तेमाल करना June 10, 2010 / December 23, 2011 | Leave a Comment -संत बहादुर भारत में खेती के कुल 1403.00 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में से सिर्फ 608.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र ही सिंचित है तथा शेष 794.40 लाख हेक्टेयर वर्षा सिंचित है। खाद्य उत्पादन का करीब 55 प्रतिशत सिंचित भूमि में होता है. जबकि वर्षा सिंचित भूमि का योगदान करीब 45 प्रतिशत ही है। वर्षा सिंचित खेती में […] Read more » Farming कृषि खेती
विविधा सामाजिक समरसता के दूत रामफल सिंहजी नहीं रहे June 10, 2010 / December 23, 2011 | Leave a Comment राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मंत्री व सामाजिक समरसता आन्दोलन के प्रमुख कर्ता श्री रामफल सिंह (रामजी भाई) सुपुत्र श्री स्व0 दलसिंह जी का 09 जून, 2010 को प्रात: 08 बजे अग्रसेन चिकित्सालय में निधन हो गया। वे लीवर की बीमारी से पीड़ित थे। श्री रामफल सिंह जी […] Read more » Ramfal Singh रामफल सिंह
विश्ववार्ता आखिर इजरायिली हमले पर इतनी हाय तौबा क्यों? June 8, 2010 / December 23, 2011 | 1 Comment on आखिर इजरायिली हमले पर इतनी हाय तौबा क्यों? -सूबेदार सिंह आखिर इजरायिली हमले पर इतनी हाय तौबा क्यों? क्योंकि जिस देश को अपनी जमीं, भाषा व स्वतंत्रता हजारों वर्षों क़े संघर्ष क़े बाद मिली हो उसे अपनी स्वतंत्रता स्वयंप्रभुता की रक्षा से कैसे रोका जा सकता है। इजराईल आजादी क़े २४ घंटे भी बीत नहीं पाए थे कि इस्लामिक देशों ने उस पर […] Read more » Israel इजरायल फिलीस्तीन
विविधा नॉबेल पुरस्कार विजेता कविगुरु रबीन्द्रनाथ ठाकुर June 7, 2010 / December 23, 2011 | 1 Comment on नॉबेल पुरस्कार विजेता कविगुरु रबीन्द्रनाथ ठाकुर -नीरेन्द्र देव कविगुरु रबीन्द्रनाथ ठाकुर ने साहित्य के क्षेत्र में अपनी जन्मभूमि बंगाल में शुरुआती सफलता प्राप्त की। वह साहित्य की सभी विधाओं में सफल रहे किन्तु सर्वप्रथम वह एक महान कवि थे। अपनी कुछ कविताओं के अनुवादों के साथ वह पश्चिमी देशों में भी प्रसिध्द हो गए। कविताओं की अपनी पचास और अत्यधिक लोकप्रिय […] Read more » Nobel Prize रबीन्द्रनाथ ठाकुर
विविधा बोले जाने पर बोला जाना चाहिये June 7, 2010 / December 23, 2011 | Leave a Comment -अखतर अली इन दिनों जितना बोला जा रहा है उतना शायद बोले जाने के इतिहास में और कभी नहीं बोला गया होगा। कौन बोल रहा है, क्यों बोल रहा है, क्या बोल रहा है, ये कुछ भी समझ नहीं आ रहा है। बोला जाना चीखे जाने मे तब्दील हो चुका है। लोग माईक में चिल्ला […] Read more » Speaking बोलना
राजनीति शुक्र है! ये कौम मुर्दा नहीं…. June 3, 2010 / December 23, 2011 | Leave a Comment -आशीष तिवारी देश में लोकतंत्र बेहद मजबूत हो गया है लेकिन लोगों की बातें इस तंत्र में नहीं सुनी जाती। लोग बोलते बोलते थक चुके हैं और अब तो मुर्दई ख़ामोशी ओढ़ कर चुप बैठे हैं। लोकतंत्र का उत्सव मनाया जाता है लेकिन शवों के साथ। कौम सांस लेती तो है लेकिन है मुर्दा। ऐसे में […] Read more » Bal Panchayat बाल पंचायत