राजनीति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है संसदीय क्षरण July 8, 2024 / July 8, 2024 | Leave a Comment डॉ दयानंद कादयान संसद भवन लोकतंत्र का मंदिर होता है। इस मंदिर को सनातन व आधुनिक रूप देकर नए गरिमामय स्वरूप में लाया गया है। परंतु संसदीय कार्रवाइयों के क्षरण का विषय हर लोकतंत्र प्रेमी के के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।लेकिन किसी ने भी इसके लिए कुछ करने की जरूरत नहीं […] Read more »
खान-पान फ़ेस बुक पेज़ से मनोरंजन हमारा विनाश कब शुरू हुआ? June 27, 2024 / June 27, 2024 | Leave a Comment 1.हमारा विनाश उस समय से शुरू हुआ जब हरित क्रांति के नाम पर देश में रासायनिक खेती की शुरूआत हुई और हमारा पौष्टिक वर्धक, शुद्ध भोजन विष युक्त कर दिया! 12 .हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन लोगों ने स्वस्थ रहने का विज्ञान छोड दिया था और अपने शरीर के स्वास्थ्य सिद्धांतों […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ आर्य वीर दल गौतमबुद्ध नगर का चरित्र निर्माण शिविर हुआ संपन्न June 24, 2024 / June 24, 2024 | Leave a Comment ग्रेटर नोएडा। यहां स्थित महात्मा हंसराज आदर्श विद्यालय बंबावड़ गौतम बुद्ध नगर में एक सप्ताह तक चला आर्य वीर दल चरित्र निर्माण शिविर संपन्न हो गया। चरित्र निर्माण शिविर के बारे में जानकारी देते हुए आर्यवीर दल जनपद गौतम बुद्ध नगर के संचालक आचार्य कर्णसिंह ने हमें बताया कि इस अवसर पर सैकड़ो युवाओं को […] Read more »
लेख भारतीय धर्म और मन्दिर June 18, 2024 / June 18, 2024 | Leave a Comment भारतीय संस्कृति व धर्म में मन्दिरों को सदा से ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, मन्दिर धर्म के आधारभूत अंगो में सदा से ही विद्यमान हैं। सनातन धर्म में वृक्ष, वन भी मन्दिर हैं यहाँ तक कि मानव शरीर को भी मन्दिर के सदृश माना गया है; परन्तु दुर्भाग्यवश भारतीय संस्कृति के आधारभूत अंग मन्दिरों को आज सोशल मीडिया से मस्त भारतवासी मान्दरों को सेल्फी पॉइट व नाच-गान करके रील बनाने में व्यक्त हैं, और मन्दिरों को धूमिल करने मे लगे हुये हैं, इन भारतवासियों ने नाट्य-शास्त्र को भी दूषित कर दिया है। भारतवासियों ने ब्रह्म को अपनी चेतना से अभिव्यक्त कर ईश्वर को साकार रूप में प्रदर्शित करने हेतु बुद्धि, चेतना के द्वारा मूर्तियों का निर्माण किया मूर्तियों को स्थापित करने के लिये शास्त्रों के गहन अध्ययन, ज्यामिति अध्ययन, “गणित व अभियांत्रिकी के फलस्वरूप ईश्वर के साकार रूप की विद्यमान करने हेतु शास्त्रीय संरचनाओं का निर्माण किया जो मंदिर कहलायीं। योग ने मानव शरीर की भाँति पृथ्वी पर भी कुछ स्थान पवित्र स्थान बताये है जिनका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है, वही क्षेत्र तीर्थ कहलाये महान तपस्वियों ने संपूर्ण भारतवर्ष का विचरण किया और मन्दिर निर्माणस्थलों का चुनाव भी किया, वस्तुत: जब मानव अपने अंतः करण से वास्तु कला के माध्यम से प्रतिबिंबित करता है, वही मन्दिर है मन्दिर निर्माण में स्थान के साथ-साथ अन्य भौतिक व आध्यात्मिक घटक भी अनिवार्य होते हैं, ज्यामिति, गणित, स्थान के साथ-साथ उस स्थान का आध्यात्मिक इतिहास का अध्ययन भी किया जाता है; मान्दरों का निर्माण उस स्थान पर किया जाता है जहाँ जीवन शाक्त विद्यमान हो, उदाहरणतः प्राचीन मान्दर जीवनदायिनी नदियों के निकट, वृक्षों के निकट बनाये जाते थे, जिनका उद्देश्य मानव को प्रकृति के निकट पहुँचाकर आनन्द की अनुभूति करना है। रूपरहित ब्रह्म इस संसार की माता है चूंकि एक माता ही इस अनन्त संसार, चेतनारहित वस्तु, जीव-जन्तु का पालन पोषण करती है, विष्णु, शिव, का रूप है, रूपरहित ब्रह्म अनन्त है, उसका न कभी जन्म हुआ। ब्रह्म को दिव्यदृष्टि से देखने वाला वीर अर्जुन भी घबरा गया, जब उसे ब्रह्म ने अपने चतुर्भन रूप को दिखाकर शांति दी, उसी दिव्यदृष्टि व चतुर्भुजी रूप का प्रत्यक्ष रूप सूर्यदेव हैं। मन्दिरों में देवताओं की प्रतिमाओं की प्राणप्रतिष्ठा की जाती है, जिसके पश्चात वह प्रतिमा देवताओं की छावे रूप मे मन्दिर में सदा विद्यमान रहती है. मन्दिरों में प्रतिमा बनाने के लिये दिनो उपवास करते हैं, अपनी चेतना की पराकाष्ठा से देवता को साकार रूप में विराजित होने का आग्रह करते हैं, और अपने हाथों से ईश्वर का प्रत्यक्ष रूप प्रतिमाओं व मूर्तियों के रूप में प्रदर्शित करते भारतीय संस्कृति में चेतनारहित पत्थर में भी प्रतीत होती है, चूंकि वह भी ब्रह्म की रचना है अर्थात ब्रह्म का ही रूप है प्राणप्रतिष्ठा के पश्चात प्रतिमाओं को भोग, काव्य. संगीत व नाट्य शास्त्र भी समर्पित किया जाता है। लिंग पुराण के लिंग ज्योति है अर्थात ब्रह्म का ही रूप है, अनुसार जिस भाँति आग का लिंग परिचय) धुंआ है, उसी प्रकार ब्रह्म का लिंग जगत है। भारतीय संस्कृति में शिवरात्रि के दिन शिव लिंग रूप में प्रकट हुये। भारतवर्ष में धर्मनिष्ठ काम के मन्दिर हुआ करते थे, काम यहाँ देवता है, लोग काम के मन्दिरों में उत्सव व दर्शन करते थे। यहाँ मृत्यु के देवता के लिये भी मन्दिर विद्यमान हैं, चूंकि भारतवासी जीवन के चक्र अर्थात जन्म-मृत्यु से भली भाँति परिचित थे भारतवासी वट वृक्ष में शिव, पीपल में विष्णु व नीम में सूर्य का निवास मानकर उनकी स्तुति करते हैं। यहाँ नाट्य- शास्त्र के द्वारा भी मुक्ति प्राप्त की जा सकती है. महायोगी शिव भरतमुनि के नारयशास्त्र के अनुसार नटराज कहलाये जिनकों चरणों के नीचे मुक्ति है नटराज की नेत्रों में शांति है, मुख पर तेज है, भुजाओं में अग्नि,डमरू कंपन का प्रतीक है, जटाये उड रही हैं, और नीचे मुक्ति चरणों में है। उपास्य के नाम साकार रूप के बिना उपासना अत्यधिक कठिन है। आक्रमणकारियों ने मन्दिर तोड़े उनके ही वंशज राष्ट्र के टूटने के लिये जिम्मेदार हैं,धर्मनिष्ठ काम के मन्दिर तोडने वाले रिलीजनों ने संस्कृति को तीव्र ठेस पहुचाई। मंदिरों को तोड़कर अपनी संरचनाएं बना डाली। उन्होंने भारतीयों से ज्ञान भी लिया और घृणा भी की, सबको एक किताब व एक भगवान में बदलने में कभी सफल नहीं हो सके चूँकि जिस संस्कृति को महाकाल ने बनाया हो उसका काल क्या ही कर पायेगा पवन गोला Read more » Indian religion and temples
खान-पान दूध की चाय पीने के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव June 15, 2024 / June 15, 2024 | Leave a Comment डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणाभारत में दूध की चाय पीना अधिकतर लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हो चुका है। उच्च शिक्षा प्राप्त, उच्च पदस्थ और आम लोग दूध की चाय का सेवन बड़े शौक से करते हैं। ऐसे लोगों को नहीं पता कि चाय की हर एक घूंट के साथ वे अपने स्वास्थ्य के […] Read more » Health effects of drinking milk tea
लेख आनन्द की विशिष्ट अवस्था ‘मृत्यु’ May 28, 2024 / May 28, 2024 | Leave a Comment “मृत्यु की कल्पना भी जहाँ कष्टकारी है वहीं मृत व्यक्ति के लिए मृत्यु दीर्घकालीन आनन्द की अवस्था है। जीवितों के लिए जहाँ मृत्यु अमावस्या का स्याह अंधकार है वहीं मृत के लिए पूर्णिमा का प्रकाश। “देखिए जाने इन्हें क्या हो गया, अभी थाडी देर पहले तक तो हँस-बोल रहे थे, अब शांत है, कोई उत्तर […] Read more » आनन्द की विशिष्ट अवस्था 'मृत्यु'
लेख समृद्ध – भारतवर्ष का इतिहास May 22, 2024 / May 22, 2024 | Leave a Comment भारतवर्ष अनादि काल से ही अपनी समृद्धता के लिये सम्पूर्ण विश्व में आकर्षण का केन्द्र रहा है, अपने ज्ञान व योग के कारण भारतीय संस्कृति आज भी सभी संस्कृतियों की जननी है।दुर्भाग्यवश, अधिकतर मनुष्य समृद्धता का अर्थ भौतिकवादी विचारधारा से ग्रस्त होने के कारण आर्थिक दृष्टिकोण पर मापते हैं, परन्तु भारतीय संस्कृति की समृद्धता इस […] Read more »
लेख अप्प दीपो भवः May 21, 2024 / May 21, 2024 | Leave a Comment बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष सतेन्द्र सिंह संसार में समय-समय पर ऐसे महापुरुष भी हुए हैं, जिन्होंने अपने ज्ञान के आलोक से मानव जाति को एक नई राह दिखाई है। भारतीय विरासत की ऐसी ही एक महान विभूति गौतम बुद्ध या महात्मा बुद्ध हैं। महात्मा बुद्ध का जन्म नेपाल के लुम्बिनी में 563 ईसा पूर्व में […] Read more » buddh poornima अप्प दीपो भवः
प्रवक्ता न्यूज़ प्रकाशनार्थ: शिवेश प्रताप की पुस्तक “मोदी दशक” का हुआ विमोचन May 15, 2024 / May 15, 2024 | Leave a Comment भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी के कर कमलों से लोकनीति विश्लेषक, लेखक एवं स्तंभकार शिवेश प्रताप की पुस्तक मोदी दशक का लोकार्पण संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम प्रभात प्रकाशन के बैनर तले कॉन्स्टीट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में आज दिनांक 14 मई को राजधानी दिल्ली के जाने-माने बौद्धिक चिंतकों की उपस्थिति में हुआ। […] Read more »
पुस्तक समीक्षा नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व अत्यंत विराट है : सौरभ मालवीय March 1, 2024 / March 1, 2024 | Leave a Comment सौरभ मालवीय की पुस्तक चर्चा में मीडिया गुरु के नाम से विख्यात डॉ. सौरभ मालवीय की नई पुस्तक ‘भारतीय राजनीति के महानायक : नरेन्द्र मोदी’ इन दिनों खूब चर्चा में है। इसे दिल्ली के मानसी पब्लिकेशन्स ने प्रकाशित किया है। इस चर्चा का एक कारण यह भी है कि यह ऐसे समय में आई है, […] Read more » Narendra Modi's personality is very great: Saurabh Malviya नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व अत्यंत विराट है
प्रवक्ता न्यूज़ वेद के सार्वभौम सिद्धांतों को अपनाने से ही विश्व शांति संभव : डॉ. आर्य February 26, 2024 / February 26, 2024 | Leave a Comment मॉरीशस। वेद के सार्वभौम सिद्धांतों को अपनाने से ही विश्व शांति संभव है। सृष्टि के प्रारंभ में परमपिता परमेश्वर ने वेद का ज्ञान अग्नि, वायु ,आदित्य और अंगिरा जैसे ऋषियों के हृदय में प्रदान किया। जिन्होंने परमपिता परमेश्वर के संदेश को अपने लिए आदेश मानकर आने वाली पीढ़ियों के लिए आगे बढ़ाया। वेद के सिद्धांत […] Read more » वेद के सार्वभौम सिद्धांतों को अपनाने से ही विश्व शांति संभव : डॉ. आर्य
यात्रा वृत्तांत लेख ’’जैतो मोर्चा’’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का स्वर्णिम इतिहास February 22, 2024 / February 22, 2024 | Leave a Comment ’जैतो मोर्चा’ गंगसर साहिब सिक्खों द्वारा अहिंसात्मक पूर्ण एवं शांतिपूर्ण किये गये भारतीय स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन का स्वर्णिम इतिहास है। 21 फरवरी 2024 को जैतो मोर्चा आंदोलन के 100 वर्ष पूर्ण हुए हैं। यह एक साहसपूर्ण संघर्ष का इतिहास है जो सिक्खों द्वारा अंग्रेजों से अपनी संस्कृति व धार्मिक स्थानों को बचाने के लिए अहिंसात्मक […] Read more » Jaito Morcha Jaito Morcha Golden history of Indian freedom struggle