ऐ ! मालिक तेरे बन्दे हम |,

ऐ ! मालिक तेरे बन्दे हम |,
ये नेता जो बहरुपिये बने ||
आज के चुनावो में जो खड़े |
उनको कुछ कर दे तू कम ||

ये नेता जो झूठे वादे है करते |
कभी न सच्ची बाते है करते ||
जनता के जेब काट अपनी है भरते |
हथेली पर जो सरसों है उगाते |
आलू से जो सोना ये है बनाते ||
उनको अक्ल है बहुत कम |
ऐ ! मालिक तेरे बन्दे हम ||
ये नेता जो बहरुपिये बने |
आज के चुनावो में जो खड़े |
उनको कुछ कर दे तू कम ||

ये नेता जो घर घर घूम रहे |
पांच साल के बाद दर्शन दे रहे ||
ये चुनाव जो अब आ रहा |
वोटर भी इनसे घबरा रहा ||
ऐसे नेताओ को कर दे तू खत्म |
ऐ ! मालिक तेरे बंदे हम ||
ये नेता जो बहरूपिये बने |
उनको कर दे तू अब कम ||

ये नेता जो टेढ़ी चाल चले |
अपने ही देश को लूटने चले ||
जिन पर संगीन अपराध बने |
उन पर क्यों ने मुकदमा चले ||
ये जो नेता बहात्तर रूपये दे रहा |
क्यों ये जनता से ठगी कर रहा ||
ये क्या गरीबी को कम कर रहा |
शायद अपने को धोखा दे रहा ||
इससे गरीबी न होगी कम |
ऐ ! मालिक तेरे बंदे हम ||

ये जो महा गठबंधन बना |
ये तो अपने बुरे कर्मो से सना ||
क्यों ये बुरे कर्मो से डर रहा |
एक दूजे से हाथ मिला रहा ||
हर पी एम बनना चाह रहा |
एक दूजे की टांग खीच रहा ||
अप तू इनको कर दे खत्म |
ऐ ! मालिक तेरे बंदे हम | |
ये नेता जो बहरुपिये बने |
उनको कर दे तू अब कम ||

आर के रस्तोगी

2 thoughts on “ऐ ! मालिक तेरे बन्दे हम |,

  1. आरके रस्तोगी जी आपने बहुत ही सुंदर लिखा है उम्मीद करते हैं कि आप आगे भी ऐसे लेख लिखते रहेंगे । Gud morning

    1. श्री रामभरत सिंह जी ,प्रंशसा के लिये ह्रदय से आभार | भविष्य में मै ऐसे ही कविता लिखने का प्रयास करूंगा और आशा है आप उन्हें अवश्य पढेगे और अपने कमेंट्स देकर मुझे अनुग्रिहत करेगे | धन्यवाद .

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