लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

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rbiडॉ. मयंक चतुर्वेदी

भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा लिया गया यह निर्णय निश्चित ही स्वागत योग्य है, जिसमें उसने यह सुनिश्चित किया है कि बैंकों की लापरवाही या असावधानी की वजह से यदि किसी के साथ कोई फ्रॉड, फर्जी बैंकिंग लेनदेन हुआ है अथवा इस प्रकार की कोई घटना घटती है, तो इसके लिए ग्राहक जिम्मेदार नहीं होगा। साथ ही इससे होने वाले नुकसान की भरपाई बैंक करेगा। यह निर्णय इसलिए भी सार्थक है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग के बढ़ते चलन के साथ ही धोखाधड़ी की लगाता बढ़ती घटनाएं आए दिन प्रकाश में आ रही हैं। ऐसे में उन पर नियंत्रण के उपाय जितने जरूरी हैं, जिम्मेदारी और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। वस्तुत: इस दृष्टकिोण से भी आरबीआई द्वारा तैयार ग्राहक सुरक्षा प्रस्ताव सही दिशा में सही कदम कहा जा सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी ड्राफ्ट सर्कुलर में इन सभी बातों का जिक्र करने से आज एक बात तो यह साफ हो गई है कि सरकार भी स्वीकार कर रही है कि देश में अनाधिकृत बैंकिंग लेनदेन के केस लगातार बढ़ रहे हैं। अक्सर देखने में यही आता है कि भले ही इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग में बैंक की पहली नजर में गलती हो, लेकिन धोखाधड़ी का खामियाजा अकेले ग्राहक को भुगतना पड़ता है। बैंक कई बातों के जरिए और नियमों का हवाला देकर यही सिद्ध करने की कोशिश करते हैं कि गलती उनकी तरफ से नहीं, बल्कि ग्राहक की तरफ से ही हुई है। बैंक की उसमें कोई भागीदारी नहीं। वस्तुत: कई मामलों में जब ग्राहक स्वयं आगे होकर अपने साथ हुई धोखाधड़ी की सूचना बैंक को देता है, तब भी संबंधित बैंक अपनी जिम्मेदारी-जवाबदेही से पल्ला झाड़ लेने से पीछे नहीं हटते। वहीं, ऐसे मामलों में जब कुछ जिद्दी किस्म के ग्राहक कोर्ट का सहारा लेते हैं या मीडिया में अपनी बात कहकर बैंक को उसकी गलती के लिए घेरते हैं, तो लंबे वाद-विवाद के बाद बैंक क्षतिपूर्ति के नाम पर कुछ राशि की पूर्ति ही करते हैं। कुल मिलाकर ठगी का शिकार होने के बाद भी ग्राहक को ही पूरी तरह खामियाजा भुगतना पड़ता है।

अब आरबीआई के इस ताजा निर्णय के बाद उम्मीद की जा सकती है कि ऐसे मामलों में ग्राहक को पर्याप्त राहत और न्याय मिलेगा। हालांकि ग्राहक की भागीदारी सीमित करने संबंधी तैयार ड्रॉफ्ट सर्कुलर में इस बात का जिक्र किया गया है कि यदि कोई गलत बैंकिंग लेनदेन ग्राहक की गलती की वजह से हुआ है, तो ग्राहक की भी जवाबदेही बनती है और इसके लिए ग्राहक को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। हां, इसमें यह जरूर है कि कुछ बातों को लेकर ग्राहक को भी हमेशा सचेत एवं सजग रहना होगा, जैसे कि उसके साथ बैंकिग लेनदेन में कुछ गलत होता है, तो वह तुरंत उसकी सूचना अपनी संबंधित बैंक शाखा को दे।

दूसरी ओर नया ड्राफ्ट यही कहता है कि ऐसे लेनदेन जहां किसी ग्राहक की भागीदारी स्पष्ट तौर पर सिद्ध नहीं होती है, तो ऐसी स्थिति में ग्राहक का अधिकतम दायित्व 5 हजार रुपए तक का होगा। लेकिन ऐसी स्थिति में यह ध्यान रखना होगा कि ग्राहक को इस बावत अपनी शिकायत बैंक में फ्रॉड होने के 4 से 7 दिनों के अंदर करवानी होगी। यदि ग्राहक 7 दिनों के बाद ऐसी कोई शिकायत बैंक में करता है, तो बैंक के बोर्ड से अप्रूव्ड पॉलिसी के हिसाब से इस पर निर्णय लिया जाएगा।

ड्राफ्ट के मुताबिक यदि ग्राहक बैंक में अपने साथ हुई गड़बड़ी की शिकायत करता है तो इस गड़बड़ी में जिस रकम का हेरफेर है वह बैंक को 10 दिनों के भीतर ग्राहक के खाते में क्रेडिट करना होगी। साथ ही ग्राहक की शिकायत का निपटारा भी अब 90 दिनों के भीतर करना अनिवार्य किया गया है। यदि यह शिकायत क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से जुड़ी है तो बैंकों को यह भी तय करना होगा कि इस अवधि का ब्याज ग्राहकों को न लगाया जाए।

यह भी प्रस्तावित है कि बैंकों को अपने ग्राहकों को इलैक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शन के लिए रजिस्टर कराने के लिए अनिवार्य रूप से कहें, जिससे उन्हें ईमेल या मैसेज के जरिए हर छोटे बड़े लेनदेन की जानकारी मिल सके। इसमें दोराय नहीं कि बदलती कार्यशैली और व्यस्तता के बीच इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ग्राहक और बैंक, दोनों के लिए ही बेहद सुविधाजनक है, लेकिन इसमें जो कमियां हैं, उनमें सुधार होना चाहिए। निश्चित ही रिजर्व बैंक का यह प्रस्ताव बेहद संतुलित और व्यावहारिक है। इसमें ग्राहक और बैंक, दोनों को ही जिम्मेदार बनाते हुए उनकी जवाबदेही तय की गयी है। यह व्यवस्था कारगर ढंग से काम कर पाये, इसके लिए जरूरी होगा कि बैंक हर लेनदेन की सूचना समय से ग्राहक को दें।

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