डॉ. नीरज भारद्वाज
भारतवर्ष का कण-कण अध्यात्म, भक्ति, दर्शन आदि से भरा हुआ है। जब हम बांगाल की बात करते हैं तो यह भूमि भी आध्यात्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक आदि गुणों का केंद्र रही है। यहाँ भक्ति मार्ग से लेकर ज्ञान मार्ग तक के कई महान संत हुए हैं, जिन्होंने बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के आध्यात्मिक, साहित्यिक आदि स्वरूप को प्रभावित किया है। मध्यकालीन संतों में श्री चैतन्य महाप्रभु(1486–1534) का नाम लिया जा सकता है। महाप्रभु को’गौड़ीय वैष्णववाद’ का प्रवर्तक माना जाता है। इन्होंने सोलह अक्षरों के’हरे कृष्ण हरे कृष्ण’ महामंत्र का जाप समाज कोदिया, भक्ति मार्ग में कीर्तन की परंपरा शुरू की।इन्हें श्री कृष्ण का अवतार भी माना जाता है।चंडीदास एक महान कवि-संत थे। इनकी रचनाएँ राधा-कृष्ण के प्रेम और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित हैं। इनका प्रसिद्ध कथन है— “सबार उपरे मानुष सत्य, ताहार उपरे नाइ” (मनुष्य का सत्य सबसे ऊपर है, उसके ऊपर कुछ नहीं)।महाकाव्य ‘गीत गोविन्द’ के रचयिता जयदेव का जन्म बंगाल के बीरभूम जिले (केंदुली ग्राम) में हुआ। इनके पदों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य पर गहरा प्रभाव डाला है।
आधुनिक युग के महान संतों की बात करें तो श्री रामकृष्ण परमहंस (1836–1886) जी का नाम अग्रिम पंक्ति में लिया जाता है। यहदक्षिणेश्वर के काली मंदिर के पुजारी रहे। इन्होंने ‘जितने मत, उतने पथ’ का सिद्धांत दिया।जिसका अर्थ है कि सभी धर्म एक ही ईश्वर की ओर ले जाते हैं।रामकृष्ण परमहंस के मुख्य शिष्यों में से एकस्वामी विवेकानंद (1863–1902) भी इसी मिट्टी से जुड़े हुए हैं।इन्होंने भारतीय वेदांत और योग को पश्चिमी दुनिया तक पहुँचाया। इन्होंने ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की और मानव सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म बताया।रामप्रसाद सेन और कमलाकांत ये दोनों ही माँ काली के अनन्य भक्त और प्रसिद्ध ‘श्यामा संगीत’ के रचयिता थे। इनकी भक्ति रचनाएँ आज भी बंगाल के घर-घर में गाई जाती हैं।श्री अरबिंदो (1872–1950) एक क्रांतिकारी भी रहें और बाद में योगी बन गए। इन्होंने पांडिचेरी में अपना आश्रम बनाया और ‘पूर्ण योग’ का दर्शन दिया। परमहंस योगानंद ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी’ (एक योगी की आत्मकथा) के लेखक। अनुकूलचंद्र चक्रवर्ती (श्री श्री ठाकुर) सत्संग आंदोलन के प्रवर्तक, जिनके अनुयायी आज पूरे विश्व में फैले हुए हैं।प्रभुपाद विजयकृष्ण गोस्वामी उन्होंने ब्रह्म समाज से अपनी यात्रा शुरू की और बाद में पारंपरिक वैष्णव भक्ति मार्ग को अपनाया। इन संतों ने बंगाल के समाज में जाति-पाति के भेदभाव को मिटाने का प्रयास किया और समाज में प्रेम तथा भाईचारे का संदेश दिया।
साहित्यकार युग दृष्टा और सृष्टा होता है। विचारक यह भी मानते हैं कि जब हम किसी देश, काल, समाज के साहित्य को पढ़ते हैं तो उसमें संवेदना के स्तर एक ही होते हैं। विचार करें तो बंगाल की भूमि से निकला साहित्य वैश्विक साहित्यिक पटल पर विशिष्ट स्थान रखता है। इन साहित्यकारों ने आधुनिक भारतीय साहित्य की नींव रखी और समाज में सुधार लाने के लिए अपनी लेखनी चलाई। इसमें महाकवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर (1861–1941) का नाम प्रमुख है। यहआधुनिक भारतीय साहित्य के सबसे बड़े स्तंभ हैं। टैगोर साहित्य में नोबेल पुरस्कार पाने वाले प्रथम एशियाई थे,’गीतांजलि’ (1913)के लिएइनको यह सम्मान मिला। इन्होंने कविताएँ, लघु कथाएँ, उपन्यास और नाटक लिखकर बंगाली साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाई। भारत और बांग्लादेश के राष्ट्रगान इन्हीं की रचनाएँ हैं। आधुनिक बंगाली उपन्यास का जनक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय (1838–1894) को माना जाता है। प्रसिद्ध राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ इनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ से लिया गया है। साहित्य के सबसे लोकप्रिय कथाकारों में से एक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय (1876–1938) हैं।इनकी रचनाओं में मध्यम वर्ग और महिलाओं की पीड़ा का गहरा चित्रण मिलता है। ‘देवदास’, ‘श्रीकांत’, ‘चरित्रहीन’ और ‘पाथेर दाबी’ कालजयी कृतियाँ हैं। इसी कड़ी में विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय, ताराशंकर बंद्योपाध्याय आदि के नाम भी गिनाए जा सकते हैं।
फोर्ट विलियम कॉलेज कलकत्ता (अब कोलकाता) में खुला,इसकी स्थापना 10 जुलाई, 1800 को हुई। कुछ विचारक इसकी आधिकारिक शुरुआत लॉर्ड वेलेजली के द्वारा4 मई, 1800 भी मानते हैं। यह भारतीय शिक्षा, साहित्य और आधुनिक भारतीय भाषाओं के विकास में एक मील का पत्थर माना जाता है। इसकी स्थापना से अंग्रेजी अधिकारियों को भारतीय संस्कृति, भाषा आदि से परिचित कराना था। फोर्ट विलियम कॉलेज का सबसे बड़ा योगदान हिंदी गद्य (Prose) के विकास में रहा है। कॉलेज में हिंदुस्तानी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जॉन बॉर्थविक गिलक्रास्ट थे। उन्होंने अधिकारियों को सिखाने के लिए सरल और बोलचाल की भाषा की पुस्तकें प्रकाशित कराई। उन्होंने अरबी-फारसी मिश्रित भाषा (हिंदुस्तानी) और हिंदी (खड़ी बोली) दोनों को बढ़ावा दिया। कॉलेज में हिंदुस्तानी विभाग में चार (लल्लू लाल, सदल मिश्र, सदासुख लाल, इंशा अल्ला खाँ) प्रमुख लेखक रहे। लल्लू लाल ने ‘प्रेमसागर’ की रचना की, जिसे खड़ी बोली हिंदी का महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। सदल मिश्रने ‘नासिकेतोपाख्यान’ लिखी। इनकी भाषा में पूर्वीपन का प्रभाव था लेकिन यह गद्य विकास में सहायक सिद्ध हुई।इनके अतिरिक्त कॉलेज से बाहर सदासुख लाल और इंशा अल्ला खाँ भी इसी कालखंड में सक्रिय रहे। 1806 में इंग्लैंड में ‘हेलीबरी कॉलेज’ की स्थापना के बाद फोर्ट विलियम कॉलेज का महत्व धीरे-धीरे कम होने लगा क्योंकि अधिकारियों का प्रशिक्षण वहीं शुरू हो गया था। अंततः 1854 में डलहौजी के शासनकाल के दौरान इस कॉलेज को पूरी तरह बंद कर दिया गया।
जब हम हिंदी पत्रकारिता की बात करते हैं तो सबसे पहले हमारे सामने श्री युगलकिशोर शुक्ल जी का नाम आता है। यही हिन्दी के ‘आदिसम्पादक’ रहे और उनके द्वारा सम्पादित ‘उदन्त मार्तण्ड’ हिन्दी का पहला साप्ताहिक पत्र था।इस पत्र का पहला अंक 30 मई, सन् 1826 को प्रकाशित हुआ था और इसका प्रकाशन श्री शुक्ल ने ‘हिन्दुस्तानियों के हित हेतु’ अपने ही प्रयास से सर्वथा साधनहीन अवस्था में अकेले ही किया था।आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष शांतिनिकेतन में बिताए। वहीं रहते हुए उन्होंने हिंदी साहित्य की मध्यकालीन भक्ति धारा और कबीर पर मौलिक शोध किया। उनके साहित्य पर रवींद्रनाथ टैगोर और बंगाली संस्कृति का गहरा प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ने मतवाला पत्रिका का संपादन कोलकाता से ही किया था। निराला जी का प्रारंभिक जीवन और साहित्यिक संघर्ष महिषादल (मेदिनीपुर, बंगाल) से ही शुरू हुआ था। यहाँ ओर भी कितने ही साहित्यकारों के नाम गिनाए जा सकते हैं।
संक्षेप में समझें तो भक्ति, योग, शिक्षा, अध्यात्म, साहित्य, संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन आदि सभी के लिए बंगाल की भूमि अग्रिम रही है। यहाँ से हर क्षेत्र का विकास हुआ है। स्वतंत्रता के बाद राजनैतिक दृष्टि और दृष्टिकोण के चलते विकास नहीं हो पाया, यह एक अलग बात है। अब इस चुनाव के बाद एक नया परिवर्तन बंगाल में देखने को मिला है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों एक ही पार्टी की बनी है। मोदी जी का अंतिम व्यक्ति तक विकास का संकल्प सार्थक होता दिखाई दे रहा है। अब एक बड़ा परिवर्तन चारों ओर दिखाई दे रहा है। बंगाल के लोगों का उत्साह देखते ही बनता है।