तर्ज: बना के क्यों बिगाड़ा रे नसीबा
मु: यह डमरू काहे बजाया रे,
ओ भोले जोगी, जोगी बाबा ओ जोगी बाबा -२।
यह डमरू काहे बजाया रे।
अंत १: जो तुझको चाहिए भिक्षा, तो लेजा तू सम्मान से।
दर्शन तोकु नहीं कराऊ, सुनले बाबा ध्यान से।
डमरू बजाके, अलख जगा के, जगाया रे नन्द लाला।
ओ जोगी, ओ भोले बाबा,
यह डमरू काहे बजाया रे। -२
अंत २: हीरा पन्नो की भिक्षा ले, मैया द्वारे पर आयी, -२
बाबा ने लेने से उसको कर दी साफ़ मनाई।
लाल दर्श की मेरी इच्छा, नहीं चाहिए तेरी भिक्षा।
कैलाश से चल कर मैं आया हूँ, ओ मैया ओ मैया
यह डमरू काहे बजाया रे। -२
अंत ३: दर्शन तुझको कैसे कराउ, लाल मेरा दर जायेगा।
तेरे गले में नाग भयंकर, (रूप है तेरा बड़ा भयंकर,) ब्रज में शोर मच जायेगा।
कहना मान ले, साँच ये जान ले, ये रूप बदल कर फिर आना |
ओ जोगी ओ जोगी भोले बाबा
यह डमरू काहे बजाया रे। -२
अंत ४: कान्हा ने जब ऐसा देखा ,भारी रुदन मचाया,
जोगी ने द्वारे से हट कर, आसान दूर लगाया।
जसुदा मन घबराई, बाबा को बुलवाई,
बोली भोले शंकर से, क्या कर दिया तूने टोना,
ओ जोगी ओ जोगी भोले बाबा
यह डमरू काहे बजाया रे। -२
अंत ५: गोदी में मेरी तू देकर, देखले जसुदा मैया,
तू तो बहुत ही बड़भागी है, चुप हो जाये कन्हैया।
इष्ट देव ये मेरा, लाल बना माँ तेरा, त्रिलोकी का नाथ है ये तो,
लीला अजब दिखायेगा, ओ मैया ओ जसुदा मैया
यह डमरू काहे बजाया रे। -२
अंत ६: यूँ ही माँ ने बाल कृष्णा को, शिव की गॊद में बिठारा ,
हरी ने हर को देखा, कर दिया आँखों में ही इशारा।
रुदन बंद हो गया लाल का, दर्श हो गया महा काल का।
मैया मन में मुस्काई,
नन्दो भैया गुण गायेगा, राकेश भी भजन सुनायेगा |
ओ मैया ओ जसुदा मैया
यह डमरू काहे बजाया रे। -२