कविता

भजन: सत्संग महिमा

तर्ज: जिंदगी की न टूटे लड़ी

मु: सत्संग की है महिमा बड़ी,
नाम जपले घडी २ घडी। -२
मोहमाया के जाल को तोड़ो
संसार के मोह को छोड़ो
प्रभु नाम में है शक्ति बड़ी
नाम जपले घडी २ घडी।

अंत १: तूने पाप कमाया तो क्या,
कुछ पुण्य कमाई कर ले।
तेरा जीवन है बीता यूँ ही,
अब तो सत्संग में तू चल ले -२
छूटे आदत बुरी जो पड़ी।
नाम जपले घडी २ घडी। -२

अंत २ : जब दीक्षा गुरूजी से लेगा,
तेरा जीवन बदल जाएगा।
जब शिविर गुरु के भरेगा
ध्यान तेरा भी लग जायेगा।
होगी तेरी कमाई खरी
नाम जपले घडी २ घडी। -२

अंत ३: तेरा नूतन जन्म फिर होगा ,
ईश्वर का भी दीदार होगा।
दुनिया पागल है तुझको कहेगी,
मिथ्या संसार है लगने लगेगा
टूटे जन्म मरण की कड़ी।
नाम जपले घडी २ घडी। -२

अंत ४: बापू जी का यही समझाना।
मत व्यर्थ है तू जीवन गवाना ।
गुरु वचनों को तू अपना ले,
जीवन अपना तू सफल बनाना।
कल आये न आये ये घडी
नाम जपले घडी २ घडी। -२

अंत ५: गुरु सेवा जो बन्दे करेगा,
ध्यान इष्ट का अपने धरेगा।
सभी परिस्थितियाँ अनुकूल होगी
(तेरे प्रकृति भी अनुकूल होगी )
प्रभु प्रेम का पुष्प खिल जाएगा।
नंदो खुशियों की लग जाये झड़ी।
सत्संग की है महिमा बड़ी,
नाम जपले घडी २ घडी। -२