तर्ज : जबसे दूर लगे हो रहने, देखो अश्क लगे हैं बहने
दिल मैंने लगाया था, लगाना ही पड़ा।
ये जादू भी तेरे नैनो का ही तो है
सास -साँस में तू ही बसा है,
साँस न टूटे तेरी आस न छूटे
देखु हर पल तेरे ही नज़ारे
मु: जबसे सपनों में लगे हो आने -२
मुझको हर पल लगे हो सताने -2
अब तो क्या हो गया, मुझको जाने
ओ मेरे सांवरिया तूने ये क्या कर दिया।
अंत १: कोई कुछ भी कहे कोई कुछ भी सुने –
हम तेरे बिना पिया कैसे रहे,
हमें समझ न आये हम समझ न पाएं
दुनिया के तहिने कैसे सहै
(तेरी दर्द जुदाई को कैसे सहें }
मि: जरा आके तो देखो मेरे साँवरिया
ये क्या हुआ
ओ मेरे सांवरिया तूने ये क्या कर दिया।
अंत २: होने लगा मुझे होने लगा
हाय प्यार तुम्ही से है होने लगा
बढ़ने लगा अब बढ़ने लगा
नशा प्यार का तेरे चढ़ने लगा
दर्शन तुमको देना ही न था
तो क्यों मेरा दिल ले लिया
ओ मेरे सांवरिया तूने ये क्या कर दिया।
अंत ३: कोई राधा रट कोई शायमा जपे
मैं तेरा नाम ही गिरधर रटती रहु
मेरे नैनो में बसों मेरे अंग अंग रंगो
तेरे दीदार बिन हम कैसे रहे
ये मीरा तो तेरी ही दासी पिया
तूने बीच भंवर में ही लटका दिया
ओ मेरे सांवरिया तूने ये क्या कर दिया।
अंत ४: श्याम भजें श्यामा रटॆ
तेरी यादो में अश्क मेरे बहते रहे
अब दर्शन दो, क्यों देर करो
नन्दो दीदार बिना तेरे रह न सके
ये साधक सभी तेरे अपने लगे
चरणों में ही क्यों न लगा लिया
ओ मेरे सांवरिया तूने ये क्या कर दिया।
मेरे नैनो में बसों नन्द लाल
मोहिनी मूरत सोहिनी सूरत
नैना बने विशाल
मेरो तो गिरधर गोपाल
दूसरा न कोई
जाके सिर मोर मुकुट
मेरो पति सोई