तर्ज – तेरे नैनों के मैं दीप जलाऊँगा…….
दोहा: दास (भक्त) द्वारे पर आया है जल लौटा ले हाथ।
श्रद्धा से अर्पित करे स्वीकारो भोलेनाथ।।
भोले बाबा दया से जल चढ़ाता है
तेरे चरणों में जो शीश झुकाता है
बाबा तू डमरू वाला है
तेरे शीश पर गंगा धारा है
(बाबा तू त्रिशूल धारी है,
संग में गौरा माँ प्यारी है। )
ओ भोले कैलाशी है घट-घट का तू वासी है ओ भोले……
सुना है हमने भोले तू अविनाशी है,
जलचर थलचर नभचर का तू वासी है
ओ भोले कैलाशी है घट-घट का तू वासी है, ओ भोले……
तू ही है जग में माता पिता भी तू है,
तू ही जग में पानी चिता भी तू ही है
ओ भोले कैलाशी है घट-घट का तू वासी है, ओ भोले……
तेरा ही नूर धरा में आकाश में तू ही है
कण-कण में है समाया सबके पास तू ही है
ओ भोले कैलाशी है घट-घट का तू वासी है, ओ भोले……
तेरी शरण में भोले जो जन भी आते हैं
माया जाल में न फंस अमर पद पाते हैं
ओ भोले कैलाशी है घट-घट का तू वासी है, ओ भोले……
नन्दो बल्लो ने अब शरण ली है तेरी
दर्शन दिखा दो शम्भू करते हो क्यों देरी
ओ भोले कैलाशी है घट-घट का तू वासी है, ओ भोले……