लेखक परिचय

श्‍यामल सुमन

श्‍यामल सुमन

१० जनवरी १९६० को सहरसा बिहार में जन्‍म। विद्युत अभियंत्रण मे डिप्लोमा। गीत ग़ज़ल, समसामयिक लेख व हास्य व्यंग्य लेखन। संप्रति : टाटा स्टील में प्रशासनिक अधिकारी।

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rojgharनिर्णय जो भी कोर्ट का मिल सब करें प्रणाम।

खुदा तभी मिल पायेंगे और मिलेंगे राम।।

 

मंदिर-मस्जिद नाम पर कितने हुए अधर्म।

लोग समझ क्यों न सके असल धर्म का मर्म।।

 

हुआ अयोध्या नाम पर धन-जन का नुकसान।

रोटी पहले या खुदा सोचें बन इन्सान।।

 

कम लोगों को राज है अधिक यहाँ पर रंक।

यही व्यवस्था चल रही फैल रहा आतंक।।

 

रंग सियासी यूँ चढ़ा डोल रही सरकार।।

लग जाते उद्योग तो मिलते कुछ रोजगार।।

 

असली मुद्दा खो गया बुरा देश का हाल।

आज मीडिया सनसनी बाँटे करे कमाल।।

 

मानवता ही धर्म है और धर्म है दूर।

भारत है हर सुमन का भाई सब मंजूर।।

 

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