धर्म-अध्यात्म देवयज्ञ अग्निहोत्र करने से मनुष्य पाप से मुक्त व सुखों से युक्त होते हैं December 16, 2020 / December 16, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य चेतन प्राणी है। चेतन होने के कारण इसे सुख व दुख की अनुभूति होती है। सभी मनुष्य सुख चाहते हैं, दुःख प्राप्त करना कोई मनुष्य नहीं चाहता। ऐसा होने पर भी अनेक कारणों से हमें सुख व दुःख दोनों ही प्राप्त होते हैं। मनुष्य को सुख प्राप्त करने के लिये प्रयत्न व […] Read more » By performing Agnihotra people are free from sin and full of happiness. देवयज्ञ अग्निहोत्र
धर्म-अध्यात्म चतुर्वेद संहिताओं का प्रकाशन एवं इनका अग्रिम ग्राहकों को प्रेषण आरम्भ December 16, 2020 / December 16, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहितकारी प्रकाशन समिति, हिण्डोन सिटी के द्वारा चार वेदों की मूल संहिताओं का चार खण्डों में प्रकाशन होकर इसे ग्राहकों व पाठकों को प्रेषण करना आरम्भ कर दिया गया है। हमने भी वेद संहिताओं का एक पूरा सैट प्रेषित करने के लिये निवेदन किया था। कल की स्पीड पोस्ट डाक से हमें चार […] Read more » Publication of Chaturveda Codes and dispatch of these to customers in advance चतुर्वेद संहिताओं का प्रकाशन
धर्म-अध्यात्म मनुष्य को अपने सभी शुभ व अशुभ कर्मों का फल भोगना पड़ता है December 15, 2020 / December 15, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हमारा मनुष्य जन्म हमें क्यों मिला है? इसका उत्तर है कि हमने पूर्वजन्म में जो कर्म किये थे, उन कर्मों में जिन कर्मों का भोग हम मृत्यु के आ जाने के कारण नहीं कर सके थे, उन कर्मों का फल भोगने के लिये हमारा यह जन्म, जिसे पूर्वजन्म का पुनर्जन्म भी […] Read more » Man has to bear the fruits of all his auspicious and inauspicious deeds. कर्मों का फल
धर्म-अध्यात्म वेद के सिद्धान्तों एवं मान्यताओं का प्रचारक प्रमुख ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश December 15, 2020 / December 15, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यवेद सृष्टि के आदि ग्रन्थ होने सहित ज्ञान व विज्ञान से युक्त पुस्तक हैं। वेद जितना प्राचीन एवं सत्य मान्यताओं से युक्त अन्य कोई ग्रन्थ संसार में नहीं है। वेद से मनुष्य के जीवन के सभी पहलुओं पर प्रकाश पड़ता है और मार्गदर्शन प्राप्त होता है। वेदों के सत्यार्थ को जानकर हम न […] Read more » Principal book Satyarth Prakash propagator of Vedic principles and beliefs वेद के सिद्धान्तों एवं मान्यताओं का प्रचारक प्रमुख ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश
धर्म-अध्यात्म वेदों के प्रचार से अविद्या दूर होने सहित विद्या की प्राप्ति होती है December 14, 2020 / December 14, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य अल्पज्ञ प्राणी है। परमात्मा ने सब प्राणियों को स्वभाविक ज्ञान दिया है। मनुष्येतर प्राणियों को अपने माता, पिता या अन्य किसी आचार्य से पढ़ना व सीखना नहीं पड़ता। वह अपने स्वभाविक ज्ञान के सहारे अपना पूरा जीवन व्यतीत कर देते हैं। इसके विपरीत मनुष्य के पास स्वाभाविक ज्ञान इस मात्रा में नहीं […] Read more » The attainment of knowledge including the removal of ignorance from the propagation of Vedas वेदों के प्रचार
धर्म-अध्यात्म हमारा यह संसार इससे पहले अनन्त बार बना व नष्ट हुआ है December 14, 2020 / December 14, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहम इस संसार में जन्में हैं व इसमें निवास कर रहे हैं। हमारी आंखें सीमित दूरी तक ही देख पाती हैं। इस कारण हम इस ब्रह्माण्ड को न तो पूरा देख सकते हैं और अपनी अल्पज्ञता के कारण इसको पूरा पूरा जान भी नहीं सकते हैं। सभी मनुष्यों में यह इच्छा होती है […] Read more » This world of ours has been built and destroyed forever before संसार
धर्म-अध्यात्म ईश्वर की उपासना से उपासक को ज्ञान व ऐश्वर्य प्राप्त होते हैं December 11, 2020 / December 11, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य जब किसी कार्य को उचित रीति से ज्ञानपूर्वक करता है तो उसका इष्ट व प्रयोजन सिद्ध होता है। उपासना भी ईश्वर को उसके यथार्थ स्वरूप में जानकर उचित विधि से करने पर ही सार्थक व लाभकारी सिद्ध होती है। उपासना के लिये ही प्राचीन काल में ऋषि पतंजलि ने योगदर्शन […] Read more » ईश्वर की उपासना
धर्म-अध्यात्म ब्रह्मचर्यादि चार आश्रमों में गृहस्थ आरम्भ ही ज्येष्ठ है December 10, 2020 / December 10, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यवैदिक धर्म वह धर्म है जिसका आविर्भाव ईश्वर प्रदत्त ज्ञान, ‘वेद’ के पालन व आचरण से हुआ है। वैदिक धर्म के अनुसार मनुष्य को ईश्वर प्रदत्त शिक्षाओं को ही मानना व आचरण करना होता है। ऐसे ग्रन्थ वेद हैं जिसमें परमात्मा के सृष्टि की आदि में दिए गये सभी वचन व शिक्षायें विद्यमान […] Read more » Brahmacharyadi is the eldest beginning of the four ashrams. चार आश्रमों में गृहस्थ आरम्भ
धर्म-अध्यात्म वेदज्ञान सृष्टि में विद्यमान ज्ञान के सर्वथा अनुकूल एवं पूरक है December 9, 2020 / December 9, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हमारी सृष्टि ईश्वर की रचना है। यह ऐसी रचना है जिसकी उपमा हम अन्य किसी रचना से नहीं दे सकते। ऐसी रचना ईश्वर से अतिरिक्त कोई कर भी नहीं सकता। परमात्मा प्रकाशस्वरूप एवं ज्ञानवान् सत्ता है। ज्ञानवान होने सहित परमात्मा सर्वशक्तिमान भी हैं। वह सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वव्यापक, सर्वान्तयामी एवं सर्वज्ञ हैं। […] Read more » Vedic knowledge is completely compatible and complementary to the knowledge available in the universe. वेदज्ञान
धर्म-अध्यात्म ईश्वर, वेद और ऋषि दयानन्द के सच्चे अनुयायी स्वामी श्रद्धानन्द December 8, 2020 / December 8, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य आर्यसमाज के इतिहास में ऋषि दयानन्द के बाद स्वामी श्रद्धानन्द जी का प्रमुख स्थान है। स्वामी श्रद्धानन्द जी ने बरेली में ऋषि दयानन्द जी के दर्शन किये थे और और उनके उद्देश्यों व कार्यों को यथार्थ रूप में जाना व समझा था। उन्होंने मन वचन व कर्म से उनके कार्यों को […] Read more » a true follower of God a true follower of Vedas and sage Dayanand swami shraddhanand स्वामी श्रद्धानन्द
धर्म-अध्यात्म क्या हम वास्तव में मनुष्य हैं? December 7, 2020 / December 7, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य हम स्वयं को मनुष्य कहते व मानते हैं। संसार में जहां भी दो पैर वाले मनुष्य की आकृति वाले प्राणी जो बुद्धि से युक्त होते हैं, उन्हें मनुष्य कहा जाता है। प्रश्न यह है कि क्या हम वास्तव में मनुष्य हैं? यदि हैं तो क्यों व कैसे है? इन प्रश्नों का […] Read more » क्या हम वास्तव में मनुष्य हैं?
धर्म-अध्यात्म देश में गुरुकुल होंगे तभी आर्यसमाज को वेद प्रचारक विद्वान मिल सकते हैं December 6, 2020 / December 6, 2020 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on देश में गुरुकुल होंगे तभी आर्यसमाज को वेद प्रचारक विद्वान मिल सकते हैं –मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा ने सृष्टि के आरम्भ में वेदों का ज्ञान दिया था। इस ज्ञान को देने का उद्देश्य अमैथुनी सृष्टि में उत्पन्न व उसके बाद जन्म लेने वाले मनुष्यों की भाषा एवं ज्ञान की आवश्यकताओं को पूरा करना था। सृष्टि के आरम्भ से लेकर महाभारत काल पर्यन्त भारत वा आर्याव्रत सहित विश्व […] Read more » वेद प्रचारक विद्वान