सिनेमा

मोदी के दौर की फिल्म है बाहुबली

अगर सत्यजीत रे का सिनेमा नेहरु के दौर का प्रतिनिधित्व करता है तो बाहुबली मोदी के दौर का सिनेमा है जिसमें साहस है, शौर्य है, वैभवशाली और समर्थ भारत की एक कल्पना है। जहां नायक शपथ लेता है – मैं… महेंद्र बाहुबली माहिषमति की असंख्य प्रजा और उनके मान और प्राण की रक्षा करूंगा, इसके लिए यदि मुझे अपने प्राणों की आहुति भी देनी पड़ी तो पीछे नहीं हटूंगा।

विनोद खन्नाः अभियन की स्कूल के प्रिसिंपल … .!!

80 के दशक के शुरूआती वर्षों तक अभियन के इन दो धुरंधरों की टक्कर जारी रही। अक्टूबर 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद अमिताभ बच्चन राजनीति में चले गए और इलाहाबाद से सांसद निर्वाचित होकर संसद भी पहुंच गए। तब विनोद खन्ना के लिए सुपर स्टार के रूप में उभरना आसान था। हालांकि फिल्म से दूरी के बावजूद अमिताभ बच्चन के प्रशंसकों के लिए किसी अन्य हीरों को सुपर स्टार के तौर पर स्वीकार करना मुश्किल था।

फिल्म समीक्षा (रिव्यु )– कटप्पा और बाहुबली की गुत्थी सुलझाता है ‘बाहुबली 2

फिल्म का नाम: बाहुबली 2: द कन्क्लूजन डायरेक्टर: एस एस राजामौली स्टार कास्ट: प्रभास ,…