सिनेमा जाह्नवी कपूर की काबिलियत में कोई कमी नहीं September 19, 2025 / September 19, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment सुभाष शिरढोनकर एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर बॉलीवुड की पॉपुलर स्टार में से एक हैं। वह ना सिर्फ अपनी एक्टिंग बल्कि लुक्स से भी हमेशा फैंस को दीवाना बनाए रखती हैं। उनका स्टाइलिंग सेंस लोगों को कायल कर देता है। वेस्टर्न हो या इंडियन, हर लुक में वह बेहद कमाल लगती हैं। मराठी में बनी सुपरहिट फिल्म ‘सैराट’ की […] Read more » जाह्नवी कपूर
मनोरंजन सिनेमा श्वेता तिवारी के लुक्स पर फिदा हैं फैंस September 16, 2025 / September 16, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment सुभाष शिरढोनकर टीवी की सबसे हॉट, सबसे ज्यादा भुगतान पाने वाली मशहूर एक्ट्रेस श्वेता तिवारी 12 सितंबर को दर्शकों के लिए अमेजन प्राइम वीडियो पर उपलब्ध करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन व्दारा निर्मित कॉमेडी और ड्रामा वेब सीरीज ‘डू यू वाना पार्टनर ?’ में तमन्ना भाटिया, डायना पेंटी और नकुल मेहता के साथ नजर आ रही हैं। सीरीज में श्वेता तिवारी […] Read more » श्वेता तिवारी
मनोरंजन डिजिटल डिटॉक्स क्यों जरूरी है ? September 11, 2025 / September 11, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डा वीरेन्द्र भाटी मंगल वर्तमान समय डिजिटल युग का है। मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने हमारी दुनिया को छोटा कर दिया है। सूचना, शिक्षा और मनोरंजन हमारी उंगलियों पर हैं लेकिन यही सुविधा धीरे-धीरे हमारी सबसे बड़ी समस्या भी बनती जा रही है। लोग घंटों-घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने लगे हैं जिसके कारण […] Read more » Why is digital detox necessary डिजिटल डिटॉक्स
मनोरंजन सिनेमा शैतान’ (2024) की ‘जाह्नवी’, जानकी बोदीवाला September 11, 2025 / September 11, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment सुभाष शिरढोनकर जानकी बोदीवाला ने गुजराती फिल्म ‘वश’ (2023) में आर्या और फिर उसी के रीमेक ‘शैतान’ (2024) में अजय देवगन की बेटी जाह्नवी बनकर दर्शकों का दिल जीत लिया था। हाल ही में जानकी ‘वश’ (2023) के साइकोलॉजिकल थ्रिलर सीक्वल ‘वश लेवल 2’ (2025) में नजर आईं। मूलत: गुजराती में बनी इस फिल्म को 27 अगस्त 2025 को गुजराती के साथ हिंदी में डब कर रिलीज किया […] Read more » जानकी बोदीवाला
मनोरंजन विश्ववार्ता नेपाल का ऑनलाइन लॉकडाउन: आज़ादी पर सवाल September 9, 2025 / September 9, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment सोशल मीडिया पर नेपाल का बड़ा ताला: लोगों की आवाज़ पर रोक या नियमों की ज़रूरत? नेपाल सरकार ने 26 बड़े सोशल मीडिया और संदेश भेजने वाले मंच—जिनमें फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स (पहले ट्विटर) शामिल हैं—को देश में बंद करने का आदेश दिया है। सरकार का तर्क है कि कंपनियों ने स्थानीय कार्यालय […] Read more » A question mark on freedom in Nepal by banning of social media Nepal's online lockdown
सिनेमा ‘यशराज’ की अगली फिल्म में एक्ट्रेस अनीत पड्डा September 9, 2025 / September 9, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment सुभाष शिरढोनकर फिल्म ‘सैयारा’ (2025) की कामयाबी से रातों रात स्टार बनी एक्ट्रेस अनीत पड्डा अब ‘बैंड बाजा बारात’ (2010) फेम डायरेक्टर मनीष शर्मा की पंजाब बेस्ड लव स्टोरी फिल्म में नजर आएंगी। इस फिल्म के जरिए मनीष शर्मा कमबैक करने जा रहे हैं। फिल्म ‘फना’ (2006) से बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर अपना करियर शुरू करने […] Read more » एक्ट्रेस अनीत पड्डा
मनोरंजन सिनेमा ‘सराहना’ के बाद ‘व्यावसायिक सफलता’ के इंतजार में अलाया एफ September 4, 2025 / September 4, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment सुभाष शिरढोनकर 28 नवंबर 1997 को मुंबई में एक्ट्रेस पूजा बेदी की बेटी के तौर पर पैदा हुई एक्ट्रेस अलाया एफ की शुरूआती पढाई मुंबई के जमुना बाई नर्सरी स्कूल में हुई। उसके बाद वह आगे की पढाई उन्होंने न्यूयार्क यूनिवर्सिटी से पूरी की। अलाया ने न्यूयार्क फिल्म ऐकेडमी से एक साल का एक्टिंग कोर्स […] Read more » Alaya F waiting for 'commercial success' after 'Sarahna' अलाया एफ
मनोरंजन सिनेमा बड़े फिल्म मेकर्स के पसंदीदा एक्टर हैं पंकज त्रिपाठी September 2, 2025 / September 2, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment सुभाष शिरढोनकर पंकज त्रिपाठी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं। अपने अंदाज से दुनिया का दिल जीतने का हुनर उन्हें बखूबी आता है। उनका अंदाज इतना लाजवाब होता है कि लोग बस तारीफ में कसीदे ही पढ़ते नजर आते हैं। साल 2023 में पिता के निधन के बाद पंकज त्रिपाठी एक […] Read more » पंकज त्रिपाठी
मनोरंजन विधि-कानून न्याय होता हुआ दिखेः तारीख़ पर तारीख़ की संस्कृति बदले September 1, 2025 / September 1, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- देश के सर्वाेच्च न्यायालय ने अपने 75 वर्ष का गरिमामय सफर पूरा किया है। यह केवल एक ऐतिहासिक पड़ाव नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा को परखने का अवसर भी है। न्यायपालिका ने इन आठ दशकों में अनेक युगांतरकारी फैसले दिये, जिन्होंने संविधान की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की। किंतु आज […] Read more » Justice should be seen to be done: The culture of date after date should change तारीख़ पर तारीख़ की संस्कृति बदले
खेल जगत मनोरंजन संघर्ष से शिखर तक: भारतीय महिला खिलाड़ियों का ओलम्पिक उदय August 29, 2025 / September 1, 2025 by डा. शिवानी कटारा | Leave a Comment भारतीय खेल इतिहास लंबे समय तक पुरुष प्रधान रहा, लेकिन बीते कुछ दशकों में महिलाओं ने जिस तरह से अपनी पहचान बनाई है, वह अभूतपूर्व है। कभी खेलों में महिलाओं की भागीदारी सीमित और हाशिए पर थी, परंतु आज भारतीय बेटियाँ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देश का परचम लहरा रही हैं। भारतीय महिला खिलाड़ियों का ओलंपिक […] Read more » भारतीय महिला खिलाड़ियों का ओलम्पिक उदय
खेल जगत हॉकी और हनुमानगढ़… बल्ले बल्ले! August 28, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment राष्ट्रीय खेल दिवस ( 29 अगस्त) हॉकी जादूगर मेजर ध्यानचंद को समर्पित ~साधना सोलंकी स्वतंत्र पत्रकार सचमुच…हॉकी और हनुमानगढ़ की सरजमीं का कुछ ऐसा ही नाता है कि जिसने भी इसे जाना- समझा… इसके नशे को घूंट घूंट पिया तो मुंह से उल्लास की बोली पंजाबियत की महक लिए फूट पड़ी…बल्ले बल्ले! दरअसल यह शहर […] Read more » राष्ट्रीय खेल दिवस
खेल जगत भारत कब बनेगा विश्व की खेल शक्ति? August 28, 2025 / August 28, 2025 by डॉ घनश्याम बादल | Leave a Comment डॉ० घनश्याम बादल आज हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती को देश खेल दिवस के रूप में मना रहा है तो मौका है कि हम खेलों के हालात पर आत्म मंथन करें । यदि पिछले एक वर्ष में खेलों में भारत की उपलब्धियों पर एक नजर डाली जाए तो यें काफी संतोषजनक लगती हैं । वैसे यह बात भी सही है कि भी अभी आसमान छूना बहुत दूर है। पैरालंपिक्स 2024 में भारतीय खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया और अभूतपूर्व सफलता हासिल की उन्होंने कुल 29 पदक: 7 स्वर्ण, 9 रजत और 13 कांस्य, जीते जो भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इन खेलों में प्रमुख पदक विजेता थे: अवनी लेखारा, नीतेश कुमार, सुमित अंतिल, धरमबीर, हरविंदर सिंह और नवदीप सिंह। पैरिस ओलंपिक 2024 में भी धमाकेदार प्रदर्शन जारी रहा वहां हमने कुल 6 पदक — 1 रजत (नीरज चोपड़ा, जेवलिन थ्रो) और 5 कांस्य जीते। शूटर मणि भाकर: 10 मीटर एयर पिस्टल में दो कांस्य पदक, एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी तो स्वप्निल कुशाल भी पीछे नहीं रही और उन्होंने 50 मीटर राइफल थ्री–पोजीशन में कांस्य जीता। अमन सेहरावत पुरुषों की फ्रीस्टाइल (57 किलो) में कांस्य लेकर भारत के सबसे युवा ओलंपिक पदक विजेता होने का श्रेय पाया। पुरुष हॉकी टीम ने स्पेन को हराकर लगातार दूसरा ओलंपिक पदक जीता यह सफलता 1972 के बाद हुई पहली बार मिली है । कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने सर्वाधिक गोल किए (10) किए और टॉप स्कोरर रहे। क्रिकेट में भी Iआई सी सी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब जीता, फाइनल में न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया। टीम ने बिना कोई मैच हारें ट्रॉफी जीती। यह पहली बार हुआ कि कोई टीम बिना हार के इस ट्रॉफी को जीती है। बाद में संन्यास ले लेने वाले हिटमैन रोहित शर्मा को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। शतरंज में व डी गुकेश ने 18 वर्ष की उम्र में सबसे कम उम्र में वर्ल्ड चेस चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया। भारतीय पुरुष और महिला शतरंज टीमों ने 45वीं फीडे चेस ओलंपियाड, बुडापेस्ट में स्वर्ण पदक जीते तो एथलेटिक्स में नीरज चोपड़ा का ने मई 2025 में दोहा डायमंड लीग में 90.23 मीटर की थ्रो दर्ज कर 90 मीटर क्लब में शामिल होते हुए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। पर लाख टके का सवाल यह है कि140 करोड़ लोगों के दुनिया के सबसे बड़े देश के लिए क्या इतनी सीमित सफलता से संतुष्ट हुआ जा सकता है? आज हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन गए हैं और हमारा लक्ष्य 2047 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने का है परन्तु खेलों में हमारी स्थिति बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती । एक तरफ दुनिया में क्यूबा , कोरिया, जापान , बुल्गारिया, रोमानिया, इटली ही नहीं वरन् कई छोटे – छोटे व गरीब देश हैं जो भारत से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं । वहीं ओलंपिक व विश्व खेलों में अमेरिका, चीन, रूस व ब्राजील जैसे देश खेल जगत की विश्वशक्ति बने हुए हैं पर हम कहां हैं ? हम पिछले तीन ओलंपिक व शुरु के कुछ ओलंपिक खेलों में ज़रुर गिनती के पदक जीत सके हैं अन्यथा तो हम खेलों में हम फिसड्डी देश के रूप ही जाने जाते हैं । पर ,एक मज़ेदार बात यह भी है कि हम भले ही फिसड्डी रहे हों पर हमारे पास हॉकी के जादूगर , क्रिकेट के भगवान , बैडमिंटन के विश्व चैंपियन , युगल टेनिस के विंबलडन विजेता, स्नूकर व बिलियर्ड के वर्ल्ड चैंपियन भी रहे हैं यानि व्यक्तिगत स्तर पर हमने काफी उपलब्धियां पाई भी हैं पर, एक देश के रूप में खेलों में हम बेहद पीछे खड़े दिखते हैं । खेलों के प्रति हमारा नज़रिया ही इस क्षेत्र में दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण रहा है । हमारे यहां तो ‘पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब ,खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब’ की कहावत रही है , रोजी रोटी कमाने में खेल यहां यूजलेस माने जाते रहे हैं , जिसके चलते खिलाड़ी होने का मतलब नालायक होना बन गया , ऊपर से खर्चे की मार ने खेलों कों उपेक्षित कर दिया । पर, अब ऐसा नहीं है । पढ़-लिखकर भले ही नवाब न बन पाएं पर अगर आप खेलों में चमक गए तो फिर तो आपकी बल्ले बल्ले है। आज खेलों में शौहरत पैसा, इज्जत तो हैं ही एक सोशल स्टेटस तथा सेलिब्रेटी का रुतबा भी है । अभी कुछ दशकों पहले तक कोई सोच भी नहीं सकता था कि कोई खिलाड़ी करोड़ों या अरबों का मालिक हो सकता है मगर आज देश के एक नहीं कई खिलाड़ी इस हैसियत को रखते हैं। अब मां बाप की सोच में भी परिवर्तन आ रहा है वें भी बच्चों के अब केवल पढ़ाई के पीछे भागने पर जोर नहीं देते बल्कि अपने होनहार बच्चे में नीरज चोपड़ा, डी गुकेश, शुभ्मन गिल, विराट, वाइचुंग भुटिया, मैरीकोम, मिताली या जसपाल अथवा अभिनव बिंद्रा, सायना,, राजवर्धन सिंह राठौर विनेश फोगाट नीरज चोपड़ा और सानिया जैसा भविष्य देख रहे हैैं । यकीनन इससे खेलों की दुनिया का स्कोप बढ़ा है । पर , अब भी हमें खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए बहुत कुछ करना होगा । क्रिकेट में भारतीय खिलाड़ी आज सुपर स्टार हैं, एक समय राष्ट्रीय खेल होने के बावजूद बर्बाद हो चुकी हॉकी भी पिछले दो ओलंपिक खेलों में पदक जीत कर आस जगा रही है । लेकिन जिस तरह से हमारे परंपरागत खेल यूरोपीय देशों की कूटनीति के शिकार हो कर अंतर्राष्ट्रीय , ओलंपिक या राष्ट्रमंडल खेलो सें से गायब हो रहे हैं उससे जूझने के लिए हमें जागना और अड़ना लड़ना होगा । स्कूल बनें खेल हब: अभी भी स्कूल स्तर पर हमें अच्छे खिलाड़ी तराशने का लक्ष्य हासिल करना बाकी है । आज भी अधिकांश स्कूलों का लक्ष्य अच्छी किताबी शिक्षा देना ही है जिसका मतलब छात्रों के लिए केवल अच्छे अंक, प्रतिशत या ग्रेड़ तक सीमित है वें उसी में अपना भविष्य तलाशते हैं, यहां योग्यता का अर्थ केवल एकेडेमिक एक्सीलेंस बन गया है क्योंकि उसी से कैरियर बनता या बिगड़ता है । उच्च पदों से पैसा कमाने का सीधा संबंध है । जबकि खेल केवल मनांरजन के सबब समझे जाते हैं। खेलों के बल पर रोजगार पाने वाले बिरले ही भाग्यशाली निकलते हैं अन्यथा आज भीे खेलों में खिलाड़ी युवावस्था गुजरते ही गरीबी , बेरोजगारी , अभावों के अंधेरे में खोने को विवश हैं । उस सोच व हालातों का बदलना होगा अगर खेल में भारत को महाशक्ति बनना है तो । डॉ घनश्याम बादल Read more » मेजर ध्यानचंद जयंती