आलोचना साहित्य मान भी जाईये साहब ! ‘शोषण’ ही आज का नया ‘पेशा’ है… March 30, 2016 by हिमांशु तिवारी आत्मीय | Leave a Comment गजब है सियासत भी। आज राजनीतिक पार्टियों के इतर आम जिंदगियों में भी उतर आई है। कहीं न कहीं हर पेशे में अब सियासत दिखाई देने लगी है। दरअसल कुछ लोग अपने सह कर्मचारियों के साथ ही निचले तबके में कार्यरत् लोगों का भी शोषण एकदम जनता सरीखे करना चाहते हैं। जैसे कि कल तक […] Read more » exploitation is the new proffession नया 'पेशा' शोषण
आलोचना साहित्य रिश्ता: ‘आधुनिक अध्यात्म’ और व्यवसाय का ? March 26, 2016 by निर्मल रानी | 2 Comments on रिश्ता: ‘आधुनिक अध्यात्म’ और व्यवसाय का ? निर्मल रानी भारतवर्ष को अध्यात्म के क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा देश माना जाता है। हमारे देश में अनेक ऐसे तपस्वी व त्यागी,महान अध्यात्मवादी,पीर-फ़क़ीर, सूफ़ी-संत गुज़रे हैं जिन्होंने नि:स्वार्थ रूप से समाज में मानवता के परोपकार हेतु तमाम ऐसे कार्य किए जिसकी बदौलत उनके अनुयाईयों की संख्या तथा उनके प्रति श्रद्धा इस हद तक […] Read more » Featured आधुनिक अध्यात्म व्यवसाय
आलोचना साहित्य शिव योगी हैं नशेडी नहीं | March 10, 2016 by अनुज अग्रवाल | Leave a Comment हाल ही में महाशिवरात्रि का पर्व बीत गया | यानि कि भगवान् आशुतोष का दिन | कई मित्रो के मेसेज आये शिवरात्रि की शुभकामनाये प्रेषित करते हुए | सभी का धन्यवाद सभी को शुभकामनाये | रूद्र आप सबकी रक्षा करे | पर मन उस तरह प्रफुल्लित हुआ जिस तरह एक त्यौहार पर होना चाहिए | […] Read more » शिव शिव नशेडी नहीं शिव योगी हैं शिव योगी हैं नशेडी नहीं
आलोचना साहित्य और भाषण बाज नहीं चाहिए ! March 7, 2016 by कीर्ति दीक्षित | Leave a Comment कीर्ति दीक्षित क्षत विक्षत है भारत भूमि का अंग अंग बाणों से । त्राहि त्राहि का नाद निकलता है असंख्य प्राणों से । । दिनकर साहब की ये पंक्तियाँ आज के परिदृश्य में कितनी सफल होकर उतरती हैं, आज ये भारत भूमि यदि कोई मानवी रूप धारित किये होती तो कितने ही बार प्राण तज दिए […] Read more » और भाषण बाज नहीं चाहिए !
आलोचना राजनीति अफजल गुरु,याकूब मेनन कोई शांति के मसीहा नहीं थे February 15, 2016 by श्रीराम तिवारी | Leave a Comment होली का त्यौहार अभी नहीं आया ,किन्तु हमारे जम्बूदीपे -भरतखण्डे के विनोदी सियासतदां एक दूसरे का मजाक उड़ाने में अभी से व्यस्त हैं। पीएम नरेंद्र मोदी जी कांग्रेस और राहुल का मजाक उड़ाते रहते हैं। राहुल गांधी भी जब कभी केरल जाते हैं ,तो एक सांस में पीएम नरेंद्र मोदी जी का और केरल की […] Read more » Featured JNU anti national अफजल गुरु याकूब मेनन कोई शांति के मसीहा नहीं थे
आलोचना विविधा साहित्य प्यार का ढाई आखर जो सनातन, अजर और अमर है February 12, 2016 by एम. अफसर खां सागर | Leave a Comment एम. अफसर खां सागर किसी के लिए जिन्दगी जीने का सलीका तो किसी के लिए जीने की खुबशूरत वजह है। किसी को इसमें रब दिखता है तो किसी के लिए कम्बख्त इश्क है ये। प्यार शब्द तो एक है मगर इसके मायने अनेक हैं। इतिहास गवाह है कि इश्क के नाम पर न जाने कितनी […] Read more » Featured अजर और अमर प्यार का ढाई आखर जो सनातन
आलोचना साहित्य प्रसिद्धि के ये ‘टोटके’ February 11, 2016 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी अधिक से अधिक धन-दौलत अर्जित करना तथा सुख व समृद्धि हासिल करना निश्चित रूप से मानव जाति की एक बहुत बड़ी कमज़ोरी है। समाज में अधिकांश लोग ऐसे मिलेंगे जो ज़्यादा से ज़्यादा पैसा कमाने की कोशिश में दिन-रात लगे रहते हैं। धनवान बनने की यही प्रवृति इंसान को भ्रष्टाचार,जमाख़ोरी,रिश्वतख़ोरी,कालाबाज़ारी,तस्करी तथा अन्य कई […] Read more » Featured प्रसिद्धि के ये ‘टोटके’
आलोचना किकू शारदा ने अनजाने में उस दाढ़ी में हाथ दाल दिया ,जिसमें असंख्य साँप -बिच्छू पल रहे हैं। January 15, 2016 by श्रीराम तिवारी | 3 Comments on किकू शारदा ने अनजाने में उस दाढ़ी में हाथ दाल दिया ,जिसमें असंख्य साँप -बिच्छू पल रहे हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी कह गए हैं कि “प्रीत विरोध समान सन ,,,,,”अर्थात दोस्ती -दुश्मनी तो बराबरी वाले से ही ठीक है। ज्यादा ताकतवर से रार ठानना या असमान दर्जे की दोस्ती हो दोनों ही स्थति में कमजोर की दुर्गति होना सुनिश्चित है। वैसे यह ज्ञान आम तौर पर सभी को है। लेकिन लगता है कि […] Read more » Featured kiku sharda arrested in ram rahim mimicri case किकू शारदा
आलोचना राजनीति ‘आप’ का तुगलकी फरमान December 7, 2015 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 3 Comments on ‘आप’ का तुगलकी फरमान अदालत के यह कहने पर कि दिल्ली में रहना ऐसा है, जैसे ‘गैस चेम्बर’ में रहना, दिल्ली सरकार द्वारा की जा रही तुरंत कार्रवाई पर हमें उसे शाबाशी देनी होगी लेकिन उसने जैसी कार्रवाई सुझाई है, उस पर उसे सबसे ज्यादा शाबाशी कार कंपनियों के मालिक देंगे। यदि दिल्ली सरकार का तुगलकी फरमान स्थायी तौर […] Read more » ‘आप’ का तुगलकी फरमान Featured
आलोचना विविधा साहित्य आमिर, जानते हो देशभक्ति क्या होती है? December 2, 2015 / December 2, 2015 by अश्वनी कुमार, पटना | 5 Comments on आमिर, जानते हो देशभक्ति क्या होती है? आमिर, तुने देश के लिए क्या किया? क्या अपने किसी बेटे को सीमा पर भेजा? कभी किसी आपदाओं में जाकर मदद की? देश के लिए अपना क्या खोया? तुम्हारी बेगम जो अब तुम्हें ये देश छोड़कर जाने को कहती है उससे जरा जाकर पूछो तो की असहिष्णुता का इतिहास किसकी रगों में है? ‘अतुल्य भारत’ […] Read more » Featured आमिर
आलोचना साहित्य आलोचना की हद ! November 16, 2015 / November 18, 2015 by अवन्तिका चन्द्रा | Leave a Comment दुनिया के सबसे बड़े लोकतन्त्त्रिक देश भारत की सबसे अच्छी खूबी यह है की यहाँ बड़े से बड़ा और सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी अपने देश की सरकार से सवाल पूछने और उसकी कमी बताने के लिए स्वतंत्र है . आज विश्व के बहुत से देशों के लोग जहा अपनी ही सरकार की तानाशाही सहने […] Read more » Featured आलोचना की हद !
आलोचना साहित्य साहित्य,स्वहित के बीच पुरस्कार वापसी पर प्रश्न… November 8, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on साहित्य,स्वहित के बीच पुरस्कार वापसी पर प्रश्न… अक्षय दुबे ‘साथी’ कहा जाता है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है,साहित्य कालचक्र का साक्षी होता है.समाज में अच्छाइयों की रचना और बुराइयों की भर्त्सना करते हुए एक लोकतांत्रिक समाज को रचता है यही कारण है कि साहित्य अर्थात ‘सबका हित’ की परंपरा के निर्वहन करने वालों अर्थात साहित्यकारों को समाज बड़े सम्मान […] Read more » samman wapsi पुरस्कार वापसी