रेप के समस्या का समाधान

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रोज रोज रेप होते हुये, एक वैश्या दुखी होकर बोली आ जाओ हवस की दरिंदो,मैंने रेप की दुकान खोली मेरे भी एक औरत है,एक औरत का दर्द समझती हूँ पेट की भूख के कारण, कोठो पर हर पल सजती हूँ मैंने इन दरिंदो के  लिये, यहाँ फ्री सेल लगा रक्खी है मिटा ले अपनी हवस… Read more »

मोक्ष के लिये बुरारी मौत-कांड

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मोक्ष के लिये मौत को गले लगाया सभी तुमने एक नहीं पूरे परिवार को मौत में सुलाया तुमने पढ़-लिख कर भी,ना समझ बन गये थे क्यों तुम ? अंध विश्वासी,रुढ़िवादी अधर्मी बन गये थे तब तुम क्यों उकसाया परिवार को तुमने आत्महत्या के लिये ? क्या मजबूरी थी,उनको मजबूर किया मरने के लिये ? मोक्ष… Read more »

कश्मीर समस्या समाधान पर एक गजल

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370 धारा क्या मिली कश्मीर को हिंदुस्तान से वह अपने आप को अलग समझने लगा हिंदुस्तान से कश्मीर पर ज्यादा खर्च करना अब मुनासिब नहीं दोस्तों गीत गाता है पाकिस्तान का,खाता है वह हिंदुस्तान से कश्मीर एक ऐसी बेवफा औरत है अपने आप में नैन मैटटके करने लगी है वह अब पाकिस्तान से कश्मीर छिनाल… Read more »

नारी की पीड़ा

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नारी तुझको कोई अबला कहता,कोई सबला भी कहता है पुरुष तुझको सबला कहकर,फिर भी वह प्रताड़ित करता है तूही द्वापर में,तूही त्रेता में,तूही कलयुग में आई है कही तुझे जुए में हारा,कही तूने अग्नि परीक्षा पाई है जो नारी का करे अपमान,वह मर्द कभी नहीं हो सकता है जो बहन का करे न सुरक्षा,वह भाई… Read more »

         स्विस बैंकों के रहस्य

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   विजय कुमार,  शर्मा जी बड़े आदमी हैं। इसलिए वे दूसरों के यहां नहीं जाते। उनकी मान्यता है कि बड़ा आदमी कहीं क्यों जाए ? अगर वो हर किसी के पास जाने लगा, तो फिर वह भी अरविंद केजरीवाल की तरह आम आदमी हो जाएगा। इसलिए वे सुबह दस बजे खा-पीकर लोगों से मिलने के… Read more »

बारिश का मौसम है,आओ भीगे सनम

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बारिश का मौसम है,आओ भीगे सनम तन की तपन को शीतल कर ले सजन ये जीवन धीरे से ऐसे ही कट जाएगा आशाओ के सहारे ऐसे ही कट जाएगा निराशा न देना तुम मेरे प्यारे सनम आओ बारिश में भीगे हम तुम सजन बारिस का मौसम है, ………… मन को न मसोसे कभी हम और… Read more »

सावन के महीने में विरहणी के प्रश्न

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आर के रस्तोगी  जब सावन का महीना आता क्या पिया का संदेशा लाता ? जब बादल आसमां में गरजते एक दूजे के लिये क्यों तरसते ? जब बिजली आसमां में चमकती माथे की बिंदिया क्यों दमकती ? जब घनघोर घटायें घिरती विरहणी क्यों दिन में डरती ? जब दिन में ही रात हो जाती पिया… Read more »

फांसी चढ़ा दो मंदसौर के दरिंदों को

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आर के रस्तोगी   फांसी पर चढ़ा दो,रेप करने वाले मंदसौर के दरिंदो को पृथ्वी पर भार बने है,जीने का हक़ नहीं इन दरिंदो को कैंडिल मार्च से कुछ नही होगा,पकड़ लो इन दरिंदो को चौपले पर गोली मारो,खत्म करो अब तुम इन दरिंदो को न्याय मिलेगा,कब मिलेगा,न्याय नहीं अब जल्द मिलता है इस प्रकार… Read more »

ए सनम ! तेरी याद में अब रोती नहीं हूँ मै

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आर के रस्तोगी   ए सनम ! तेरी याद में अब रोती नहीं हूँ मै तेरे गम में अपनी आँखे भिगोती नहीं हूँ मै ए पत्थर के सनम ! दिल को पत्थर बना लिया है मैंने  जिसको माना था भगवान,उसको अब पूजती नहीं हूँ मै बहाये थे जिन आँखों से आँसू,उनको बंद कर लिया है… Read more »

मामूली हैं मगर बहुत खास है…

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तारकेश कुमार ओझा, मामूली हैं मगर बहुत खास है… बचपन से जुड़ी वे यादें वो छिप  छिप कर फिल्मों के पोस्टर देखना मगर मोहल्ले के किसी भी बड़े को देखते ही भाग निकलना सिनेमा के टिकट बेचने वालों का वह कोलाहल और कड़ी मशक्कत से हासिल टिकट लेकर किसी विजेता की तरह पहली पंक्ति में… Read more »