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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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डाँ रमेश प्रसाद द्विवेदी

पहले हमने सुना था कि महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक एवं पारिवारिक स्थिति को सुधारने के लिए स्वयं सहायता समूह का गठन किया जाता था और किया भी जा रहा है लेकिन भारत में दिनब-दिन खस्ताहाल होता जा रहा किसान और आत्महत्या की बढती  प्रवृत्ति को रोकने के लिए सर्व प्रथम महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा सामूहिक खेती को अमल में लाने का निर्णय लिया गया है। जिसमें विदर्भ के किसानों को सरकारी सहायता के साथ उत्पादन सहित विपणन की समस्या का समाधान हो जाएगा। महाराष्ट्र के संपूर्ण विदर्भ क्षेत्र सहित नागपुर जिले के 13 तहसीलों में कुल 1000 किसानों के समूह की स्थापना की जाएगी। विदर्भ में ब़ढते बैकलग के कारण जहां कृषि सहित हर क्षेत्र की विकास धारा में प्रभाव पड़ा है। वहीं विदर्भ के किसानों की दशा देखकर केवल विदर्भ के अर्तगत 11 जिलों के लिए सामूहिक खेती की योजना को महाराष्ट्र कैबिनेट मंत्रिमंडल ने 22 फरवरी 2011 को मंजूरी प्रदान कर विदर्भ के किसानों के लिए एक सार्थक कदम उठाया है। जिसमें किसानों के बीच में यह योजना के आने से खुशियां देखी जा रही है जिससे किसानों के उतपादन से लेकर विपणन तक की समस्या का समाधान होगा।

विदर्भ के नावरगांव में पहला किसान समूह

विदर्भ के किसानों की सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए कि्रयान्वयन में आई किसान समूह योजना के तहत विदर्भ क्षेत्र के 11 जिलों में कुल दस हजार समूहों की स्थापना की जाएगी। जिसमें शासन द्वारा अनुमानित 5 करोड़ रूपये खर्च किया जाएगा। विदर्भ को अमरावती कृषि विभाग को 5 एवं नागपुर कृषि विभाग को 6 के बीच बांटा गया है। इस संदर्भ में महाराष्ट्र राज्य के विदर्भ क्षेत्र के तहत नागपुर जिले के मौदा तहसील के नावरगांव में निर्माण किया गया है। जिसमें समूह का नाम परमात्मा एक किसान स्वयं सहायता समूह रख गया है।

राज्य शासन द्वारा प्रस्तावित समूह खेती योजना के तहत क्षेत्र के किसानों द्वारा एक निश्चित भूभाग में रहने वाले किसानों को आपसी सहयोग, सहमति, समन्वय के साथ 10 से 15 किसानों का एक समूह तैयार किया जाएगा। जिसमें आपसी सहमति से समूह या कार्यकारणी बनाकर उसका पंजीकरण कराने के बाद राष्ट्रीकृत बैंक में खाता खोलना होगा। शासन द्वारा 5000रूपये का आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाएगा जिसमें समूह स्थापना तथा वार्षिक देखभार व रखरखाव आदि के लिए 2000 रूपये एवं कुशन तकनीकी, प्रिशक्षण एवं मर्गदर्शन आदि मद के लिए 3000 रूपये की सहायता का समावेश होगा। इस योजना के तहत पंजीकृत समूह के लिए शासन की सहायता बीज, खद,  कृषि उपकरण, दवाइयां इत्यादि सीधे कंपनी से खरीदने की मान्यता समूह को मिल जाएगी तथा उपज के रूप में आई फसल को भी दलालों के चंगुल में न फंसते हुए सीधे सरकारी क्रम के माध्यम से बेची जायेगी, जिसमें किसानों की सामाजिक, आर्थिक, मानसिक धोखधड़ी की संभावना कम होगी।

(विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा पुरस्कृत मुख्य अनुसंधान परियोजना के तथ्यांशों पर आधारित लेख)

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