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    Homeसाहित्‍यकविताआ तुझ को तुझ से चुरा लू

    आ तुझ को तुझ से चुरा लू


    आ तुझ को तुझ से चुरा लू,
    प्यार से तुझे दिल में बसा लू।
    ख्वासिश है यह आखरी मेरी,
    तुझ को मै अपना बना लू।।

    कजरे की जगह तुझे लगा लू,
    बंद नयनों में मै तुझे बसा लू।
    तुम मेरे श्याम हो मै राधा तेरी,
    यह मोहनी सूरत तेरी बसा लू।।

    गजरे की जगह तुझे लगा लू,
    बालो में तुझ को मै सजा लू।
    खश्बू आती रहेगी तेरी मुझे,
    आ तुझ को मै पास सुला लू।।

    सिंदूर हो तुम सुहाग भी मेरे,
    प्रिय प्रियतम जीवन के मेरे।
    तुम बिन जीवन कैसे बिताऊं,
    सात फेरे लेलो साथ तुम मेरे।

    होठों की लाली हों तुम मेरे,
    लाली आती नही है बिन तेरे।
    स्पर्श करू कैसे तेरे लबों का,
    समझ आती नही है अब मेरे।।

    मंगल सूत्र तुम्हे मै बना लू,
    गले में तुमको मैं लटका लू।
    दिल के पास रहोगे तुम मेरे,
    कैसे तुमको मैं अब भुला लू।।

    मेरे जीवन के भरतार हो मेरे,
    मै नाव हूं तुम पतवार हो मेरे।
    भवसागर से पार उतारो मुझे,
    मेरे जीवन के खिवैया हो मेरे।।

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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