लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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-बीनू भटनागर-  arvind kejariwal cartoon caricature copy

‘आप’ के नेता आम से ख़ास होते जा रहे हैं… बिलकुल सही, ’आप’ के विरोधी और मीडिया लगातार उन्हें ख़ास बनाने मे लगे हुए हैं, बहुत मेहनत कर रहे हैं। वो आम बने रहना चाहें, तो भी ये उन्हें ख़ास बनाये बिना चैन की सांस नहीं लेंगे। अभी विरोधी दल का एक कार्यकर्ता कंहीं से ढूंढ़कर योगेन्द्र यादव का फोन नं. ले आया और उसे सार्वजनिक करके चिल्लाने लगा ‘देखो-देखो’! ये योगेन्द्र यादव का फ़ोन नं. है, इसमें कितने सारे 8 हैं, ये VIP नम्बर है। दूसरी तरफ एक व्यक्ति को कार में मनीष सिसोदिया दिख गये, उसने कार का पीछा करके कार का रजिस्ट्रेश नं. लिख लिया, मानो कोई बड़ी बाज़ी जीत ली हो। फिर सोशल मीडिया पर लिखा ‘मनीष सिसोदिया VIP रजिस्ट्रेशन नम्बर वाली कार में।’ साथ में तस्वीर भी चिपका दी। भाई साहब, ये भी पता कर लेते कि ये दिल्ली सरकार की ये कार कब ख़रीदी गई थी ? किस साल इसका रजिस्ट्रेशन हुआ था। यह कार जब ख़रीदी गई होगी तब आप का जन्म भी नहीं हुआ होगा ।

आशुतोष ने पत्रकारिता छोड़कर ‘आप’ में शामिल होने का निर्णय लिया तो कोई उनका CV ढूंढ़ लाया और थोड़ी जोड़-तोड़ के साथ पेश कर दिया।अरविंद के धरने के दौरान वो लधुशंका के लिये गये तो 500 आदमियों का झुंड पीछे हो लिया। अब कुछ लोग कह रहे हैं कि कै. गोपीनाथ, मल्लिका साराभाई मीरा सान्याल वगैरह तो पहले से ही ख़ास आदमी हैं। तो भैया, मैं या तुम पार्टी में शामिल होंगे तो मीडिया बतायेगा क्या? विरोधियों को एक सलाह बिना मांगे दे रही हूं। वो भी बिलकुल मुफ्त। ये ‘आप’ वाले बड़े मामूली और छोटे लोग हैं, बेवजह इन पर इतना ध्यान मत दो, अपने आप ख़ास से आम हो जायेंगे। आप तो प्रचार के लिये करोड़ों रुपये ख़र्च कर रहे हैं और इनका प्रचार ख़ुद करके बेवकूफ बन रहे हैं।

3 Responses to “आम और खास”

  1. ashok andre

    आपका यह व्यंग लेख आज की सामाजिक सोच को बयां करता है.आप की इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई देता हूँ.
    अशोक आंद्रे

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