लेखक परिचय

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

युवा साहित्यकार लोकेन्द्र सिंह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में पदस्थ हैं। वे स्वदेश ग्वालियर, दैनिक भास्कर, पत्रिका और नईदुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। देशभर के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में समसाययिक विषयों पर आलेख, कहानी, कविता और यात्रा वृतांत प्रकाशित। उनके राजनीतिक आलेखों का संग्रह 'देश कठपुतलियों के हाथ में' प्रकाशित हो चुका है।

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लोकेन्‍द्र सिंह राजपूत

‘सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण अधिनियम-२०११’ की आग में जलेगा देश। कांग्रेस काटेगी वोटों की फसल। बहुसंख्यकों पर होगा अत्याचार।

कां ग्रेस की नीतियां अब देशवासियों की समझ से परे जाने लगी हैं। संविधान की शपथ लेकर उसकी रक्षा और उसका पालन कराने की बात कहने वाली यूपीए सरकार संविधान विरुद्ध ही कार्य कर रही है। उसने देश को एकसूत्र में फिरोने की जगह दो फाड़ करने की तैयारी की है। वोट बैंक की घृणित राजनीति के फेर में कांग्रेस और उसके नेताओं का आचरण संदिग्ध हो गया है। हाल के घटनाक्रमों को देखकर तो ऐसा ही लगता है कि कांग्रेस फिर से देश बांट कर रहेगी या फिर देश को सांप्रदायिक आग में जलने के लिए धकेलकर ही दम लेगी। सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने ‘सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक-२०११’ तैयार किया है। लम्बे समय से सब ओर से इस विधेयक का विरोध हो रहा है। लगभग सभी विद्वान इसे ‘देश तोड़क विधेयक’ बता रहे हैं। इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ माना जा रहा है। इसे कानूनी जामा पहनाना देश के बहुसंख्यकों को दोयम दर्जे का साबित करने का प्रयास है। इसके बावजूद कांग्रेस की सलाहकार परिषद ने बीते बुधवार को इसे संसद में पारित कराने के लिए सरकार के पास भेज दिया।

‘समानांतर सरकार’ नहीं चलने देंगे। ‘सिविस सोसायटी’ को क्या अधिकार है विधेयक तैयार करने का। यह काम तो संसद का है। इस तरह के बहानों से लोकपाल बिल का विरोध करने वाले सभी कांग्रेसी इस विधेयक को पारित कराने के लिए जी जान से जुट जाएंगे। वह इसलिए कि इस विधेयक को उनकी तथाकथित महान नेता सोनिया गांधी के नेतृत्व में तैयार कराया गया है, किसी अन्ना या रामदेव के नेतृत्व में नहीं। इसलिए भी वे पूरी ताकत झोंक देंगे ताकि इस विधेयक के नाम से वे अल्पसंख्यकों के ‘वोटों की फसल’ काट सकें। अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के सुझाव मानने से तो उनकी ‘लूट’ बंद हो जाती। जबकि यह विधेयक उन्हें भारत को और लूटने में मददगार साबित होगा। कांग्रेस की यह ‘दादागिरी’ कि हम पांच साल के लिए चुनकर आए हैं हम जो चाहे करेंगे। इससे देश का मतदाता स्वयं को अपमानित महसूस कर रहा है। अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के आंदोलन में बड़ी भारी संख्या में शामिल होकर उसने कांग्रेस को बताने का प्रयास किया कि उसकी नीतियां देश के खिलाफ हो रही हैं। वक्त है कांग्रेस पटरी पर आ जाए, लेकिन सत्ता के मद में चूर कांग्रेस आमजन की आवाज कहां सुनती है। आप खुद तय कर सकते हैं कि यह विधेयक देश में सांस्कृतिक एकता के लिए कितना घातक है। फिर आप तय कीजिए क्या ऐसे किसी कानून की देश को जरूरत है? क्या ओछी मानसिकता वाली कांग्रेस की देश को अब जरूरत है? क्या यूपीए सरकार की नीतियां और उसका आचरण देखकर नहीं लगता कि शासन व्यवस्था में ‘देशबंधु’ कम ‘देशशत्रु’ अधिक बैठे हैं? क्या कांग्रेस नीत यूपीए सरकार को पांच साल तक सत्ता में बने रहने का अधिकार है? क्या इस तरह देश में कभी चैन-अमन कायम हो सकेगा? क्या इससे ‘बहुसंख्यक’ अपने को कुंठित महसूस नहीं करेगा?

‘सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक-२०११’ कहता है…

1- ‘बहुसंख्यक’ हत्यारे, हिंसक और दंगाई प्रवृति के होते हैं। (विकीलीक्स के खुलासे में सामने आया था कि देश के बहुसंख्यकों को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की इस तरह की मानसिकता है।) जबकि ‘अल्पसंख्यक’ तो दूध के दुले हैं। वे तो करुणा के सागर होते हैं। अल्पसंख्यक समुदायक के तो सब लोग अब तक संत ही निकले हैं।

2- दंगो और सांप्रदायिक हिंसा के दौरान यौन अपराधों को तभी दंडनीय मानने की बात कही गई है अगर वह अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों के साथ हो। यानी अगर किसी बहुसंख्यक समुदाय की महिला के साथ दंगे के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय का व्यक्ति बलात्कार करता है तो ये दंडनीय नहीं होगा।

3- यदि दंगे में कोई अल्पसंख्यक घृणा व वैमनस्य फैलता है तो यह अपराध नहीं माना जायेगा, लेकिन अगर कोई बहुसंख्यक ऐसा करता है तो उसे कठोर सजा दी जायेगी। (बहुसंख्यकों को इस तरह के झूठे आरोपों में फंसाना आसान होगा। यानी उनका मरना तय है।)

4- इस अधिनियम में केवल अल्पसंख्यक समूहों की रक्षा की ही बात की गई है। सांप्रदायिक हिंसा में बहुसंख्यक पिटते हैं तो पिटते रहें, मरते हैं तो मरते रहें। क्या यह माना जा सकता है कि सांप्रदायिक हिंसा में सिर्फ अल्पसंख्यक ही मरते हैं?

5- इस देश तोड़क कानून के तहत सिर्फ और सिर्फ बहुसंख्यकों के ही खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है। अप्ल्संख्यक कानून के दायरे से बाहर होंगे।

6- सांप्रदायिक दंगो की समस्त जवाबदारी बहुसंख्यकों की ही होगी, क्योंकि बहुसंख्यकों की प्रवृति हमेशा से दंगे भडकाने की होती है। वे आक्रामक प्रवृति के होते हैं।

७- दंगो के दौरान होने वाले जान और माल के नुकसान पर मुआवजे के हक़दार सिर्फ अल्पसंख्यक ही होंगे। किसी बहुसंख्यक का भले ही दंगों में पूरा परिवार और संपत्ति नष्ट हो जाए उसे किसी तरह का मुआवजा नहीं मिलेगा। वह भीख मांग कर जीवन काट सकता है। हो सकता है सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का दोषी सिद्ध कर उसके लिए जेल की कोठरी में व्यवस्था कर दी जाए।

८- कांग्रेस की चालाकी और भी हैं। इस कानून के तहत अगर किसी भी राज्य में दंगा भड़कता है (चाहे वह कांग्रेस के निर्देश पर भड़का हो।) और अल्पसंख्यकों को कोई नुकसान होता है तो केंद्र सरकार उस राज्य के सरकार को तुरंत बर्खास्त कर सकती है। मतलब कांग्रेस को अब चुनाव जीतने की भी जरूरत नहीं है। बस कोई छोटा सा दंगा कराओ और वहां की भाजपा या अन्य सरकार को बर्खास्त कर स्वयं कब्जा कर लो।

सोनिया गांधी के नेतृत्व में इन ‘देशप्रेमियों’ ने ‘सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक-२०११’ को तैयार किया है-

१. सैयद शहबुदीन

२. हर्ष मंदर

३. अनु आगा

४. माजा दारूवाला

५. अबुसलेह शरिफ्फ़

६. असगर अली इंजिनियर

७. नाजमी वजीरी

८. पी आई जोसे

९. तीस्ता जावेद सेतलवाड

१०. एच .एस फुल्का

११. जॉन दयाल

१२. जस्टिस होस्बेट सुरेश

१३. कमल फारुखी

१४. मंज़ूर आलम

१५. मौलाना निअज़ फारुखी

१६. राम पुनियानी

१७. रूपरेखा वर्मा

१८. समर सिंह

१९. सौमया उमा

२०. शबनम हाश्मी

२१. सिस्टर मारी स्कारिया

२२. सुखदो थोरात

२३. सैयद शहाबुद्दीन

२४. फरह नकवी

8 Responses to “देश बांट कर रहेगी कांग्रेस”

  1. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    ईसाई आक्रामकों की यह पुरानी चाल है कि इस प्रकार के कानून बनाओ जिस से हिन्दू और मुस्लिम संघर्ष व घृणा बढे और उसका लाभ ईसाई उठायें. उपरोक्त कानून बनाने के पीछे भी यही चाल है कि मुस्लिम अपने हित में इस कानून को उपयोगी समझ कर इसका समर्थन करें और इसका विरोध करने वाले हिन्दुओं को अपना शत्रु मानें….उनसे संघर्ष में अपनी सारी ताकत लगाएं. हिन्दू भी इस संघर्ष में उलझ जाएँ. …. इस सारे जाल में फंस कर हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष करते रहें और ईसाई ताकतें अपने उद्देश्य की पूर्ति करती जाएँ….. असल में तो इस कानून का इस्तेमाल सोनिया के संरक्षण में ईसाईयों द्वारा किया जाना है. …इतनी मूर्ख तो सोनिया जुंडली है नहीं कि मुस्लिमों को ताकत प्रदान करें, उनका तो ईसाई हितों के लिए केवल इस्तेमाल किया जाना है. हिदू शक्ति के साथ मुस्लिमों को भिड़ा कर मरवाना है और अंत में मुस्लिम रक्षा के नाम पर हिन्दुओं को कुचल देना है. और ईसाई वर्चस्व की स्थापना बड़ी चालाकी से कर देनी है. देशभक्त ताकतों कोयूरोपीय ईसाईयों की इस पुरानी,कुटिल चाल को ठीक से समझना चाहिए.

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  2. Raj

    विमलेश जी आप ने बहुत अच लिखा है नयी जानकारी मिली , वैसे हिंदुयों का बहुत बुरा समय आने वाला है खान ग्रेस माता जल्दी इस देश को बाट देंगी और हमेश की तरह हिंदुयों पे खप्पर फोड़ देंगी जैसा पिचले बार किया था

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  3. RAM NARAYAN SUTHAR

    कांग्रेस के भविष्य में राजनीती का हिस्सा है यह विधेयक……………….

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  4. vimlesh

    इस देश की मीडिया मर गयी ?? खबरनवीस मर गया क्या ??? या बिक गया ????
    By Bhagat on June 17th, 2011

    डा.सुब्रमण्यम स्वामी ने देहरादून में ये आरोप लगाया की इधर देश में कोहराम मचा है और राजमाता सोनिया जी और युवराज पिछले चार दिन से switzerland में बैठे हैं .अब पिछले कुछ सालों में सुब्रमण्यम स्वामी ने देश विदेश में ये image बनायी है की वो अनर्गल प्रलाप नहीं करते हैं ..जो बोलते हैं सोच समझ कर बोलते हैं …नाप तोल कर बोलते है …….कुछ भी बोलने से पहले पूरी research करते हैं ……..पिछले कुछ सालों में उन्होंने बहुत बड़े बड़े ….विशालकाय घोटाले खोजे हैं ….

    आज टेलिकॉम घोटाला और कामनवेल्थ घोटाले को सामने लेन में सुब्रमण्यम स्वामी की बड़ी भूमिका रही है .उनपे बड़ी व्यापक खोजबीन की है.अब इतनी बड़ी बात कह दी उन्होंने….आरोप लगाया की दोनों माँ बेटा switzerland गए हैं अपने खातों की देखरेख करने ………पूरे देश में आम आदमी ये बात खुल कर कहता है और मानता है की प्रधानमन्त्री श्री मनमोहन सिंह जी व्यक्तिगत रूप से बेहद इमानदार होते हुए भी भ्रष्टाचार एवं काले धन पर कोई प्रभावी कदम इसलिए नहीं उठा पा रहे क्योंकि कांग्रेस के बड़े नेता गण……( गाँधी परिवार समेत ) की गर्दन सबसे पहले नप जाएगी ……..अब ऐसे माहौल में आज कोढ़ में खाज हो गयी ….कमबख्त ….मुए स्वामी ने इतनी बड़ी बात कह दी किसी एक चैनल पर ..अब हमारे जैसे लोग चिपक गए भैया टीवी से …वैसे भी हम लोग चिपके ही रहते हैं ..पर वाह ….क्या बात है …….किसी भी माई के लाल हमारे न्यूज़ चैनल ने उस बयान को दुबारा नहीं दिखाया ….खोज बीन करना….बाल की खाल निकालना तो दूर की बात है ……..सारा दिन टीवी पर surfing करने के बाद ( हांलाकि न्यूज़ तो अब भी चल रही है )

    शाम को हमने इन्टरनेट पर गोते लगाए ..सारी न्यूज़ खोज मारी ..कहीं तो कुछ निकलेगा …….कहीं तो कोई चर्चा होगी …किसी ने डॉ स्वामी को quote ही किया होगा …कहीं से कोई खंडन ही आया होगा ……….अब हम क्या जानें दिल्ली में कौन क्या कर रहा है ….पर दिल्ली वाले तो जानते हैं की कहाँ हैं सोनिया जी ….कहाँ हैं अपने राहुल बाबा …..और इन मीडिया वालों के लिए तो ये एक मिनट का काम है …..एक फोन मारा और ये लो …..हो गयी पुष्टि ….या ये रहा खंडन ……….पर कुछ नहीं ….शांति …एकदम मरघट वाली शांति है आज ……..न पुष्टि…. न खंडन ………..

    हर बात का जबाब देने वाले कांग्रेस के पालतू प्रवक्ता क्यों आज तक चूप है ?

    पर दोस्तों …..मरघट की ये शांति …….चीख चीख कर कुछ कह रही है …………..ध्यान से सुनिए …..दूर वहां कोई रो रहा है ………किसी की मौत पर …..पर मुझे सचमुच विश्वास नहीं होता की वो मर गया ……….इतनी आसानी से मरने वाला वो था तो नहीं ….बड़ी सख्त जान था कमबख्त …….क्या वाकई मर गया …खबरनवीस …………न कोई आवाज़ न हलचल ……..माजरा क्या है …..
    आज सुबह एक लेख लिखा मैंने की कैसे सरकार हमारे मूल अधिकारों को कुचल रही है …..इसके अलावा मैं लिखता रहा हूँ की कैसे न्यूज़ मर रही है …………पिछले दस दिनों से मैं महसूस कर रहा हूँ की news channels पर सरकारी विज्ञापनों की बाढ़ सी आ गयी है ………अब ये कोई खोजी पत्रकार या संस्था ही आंकड़े खोजेगी की किस महीने में कब कितने सरकारी विज्ञापन आये news channels पर, और अखबारों में ……….. …..सच्चाई सामने आनी ही चाहिए ………..और जैसे ही इन्हें सरकारी विज्ञापन मिले इनकी तोपों का मुह सिविल सोसाइटी की तरफ मुड़ गया ……….ये लगे जन आन्दोलन को बदनाम करने ….सरकार और पार्टी का गुणगान करने और भ्रम फैलाने …………..जो मीडिया एक एक byte के लिए मारा मारा फिरता है ….आज डॉ सुब्रमण्यम स्वामी के इतने सनसनीखेज बयान के बाद भी चुप है ….मरघट सी शांति है …….पुष्टि नहीं तो खंडन तो आना चाहिए ……..सरकार की तरफ से न सही पार्टी की तरफ से ही सही …….अगर सोनिया जी और राहुल जी देश में हैं तो बताया जाए और डॉ स्वामी से कहा जाए की प्रलाप बंद करो ……और अगर कहीं बाहर हैं तो ये भी बताया जाए की कहाँ हैं ………. चुप्पी साध के देश का मीडिया गाँधी परिवार को बचा रहा है क्या ??????? या ये मुद्दा…ये प्रश्न ….सचमुच इतना छोटा …इतना घटिया है की इसपे टिप्पणी करना नहीं चाहता …………पर ये बहुत कडवी सच्चाई है की आज अधिकाँश लोग …चाहे वो कांग्रेस समर्थक लोग ही क्यों न हों…….. ये मानते हैं की गांधी परिवार के खाते हैं…… विदेशी banks में …….अब इसका जवाब या तो हाँ में हो सकता है या ना में ……..चुप रहना कोई जवाब नहीं है ….और चुप रहे तो गाँधी परिवार रहे ….मीडिया क्यों चुप है

    लोकतंत्र का चौथा खम्बा भी टूट रहा है क्या ????????

    हम भी टीवी के चिपककर सुनने की कोशिश करते रहे कि कहीं तो प्रतिवाद होगा, लेकिन नहीं हुआ। इस परिवार को बचाने का ठेका मीडिया ने ले रखा है, किसी का भी चरित्रहनन करने में सबसे आगे रहता है यह मीडिया लेकिन जैसे ही सोनिया का नाम आता है ऐसे चुप हो जाता है

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  5. यदि बोलोगे नहीं तो कोई सुनेगा कैसे?-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'/ Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-सम्पादक-PRESSPALIKA, राष्ट

    ये बातें जो यहाँ पर लिखी गयी हैं, इनमें कितनी बातें सच हैं और कितनी असत्य हैं? इस बात का पाठकों के लिए आकलन करना असंभव है! ये बात इस कारण से लिखी जा रही है क्योंकि यहाँ पर कथित विधेयक के जैसे प्रावधानों का उल्लेख किया गया है, वे हमारे संविधान के अनुच्छेद १३ (2) तथा १४ के विपरीत होने के कारण असंगत हैं जिनके बनने की आशा नहीं की जा सकती और बन भी हाय तो सुप्रीम कोरक में एक ही सुनवाई में असंवैधानिक घोषित कर दिए जायेंगे!

    इस कारण जो कुछ लिखा गया है, उस पर संदेह होना लाजिमी है!

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  6. vikas

    यह 1947 नहीं है. यह 2011 है. 1947 में हिन्दुओ की तरफ से बोलने वाला कोई नहीं था. अब हिन्दुओ ने भी अपनी ताकत एवं नेत्रत्व को पहचान लिया है. अब देश का बटवारा हिन्दू नहीं होने देंगे, अपितु जो लोग पुन: बटवारे की बात करेंगे उन्हें पाकिस्तान एंव बंगलादेश भगा दिया जायेगा.

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  7. vimlesh

    रंग बदलते कोंग्रेसियों के बयान……औंधे मुंह गिरती चतुर चाले और ‘नग्न’ मीडिया

    स्वामी रामदेवजी से ही क्यों डरती है कांग्रेस? विदेशी लोगों का समर्थ…न करने वाली मिडिया क्यों पड़ी है स्वामी जी के पीछे ???? दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है स्वामी रामदेव जी से ही कांग्रेस क्यों परेशान है और डरती है, जानिए कारण:

    स्वामी रामदेवजी जी के तर्क के आगे कांग्रेस के तथाकथित प्रवक्ता 5 मिनट भी नहीं टिकेंगे.
    स्वामी जी के पास कांग्रेस का वास्तविक इतिहास का साक्ष्य है और कांग्रेस के कारनामो का काला चिटठा है,
    kbhi तो बात आएगी मंच पर बहस की, जिसकी की आगे के किसी भी चुनाव में जोर देकर मांग की जायेगी, तब ये अज्ञानी प्रवक्ता मंच पर जनता को क्या जवाब देंगे, सरकार हर साल लोगों से 134 प्रकार के टैक्स से कितना पैसा जमा कराती है और ये पैसे कहा खर्च हो जाते है? मंदिरों का पैसा सरकार किस मद में खर्च कराती है जिसे सिर्फ हिन्दू दान देकर इकठ्ठा करता है, ये बहुत बड़ा प्रश्न है.
    मंच पर ये बहस नहीं होगी की क्या विकास किया, बहस होगी की राहुल, सोनिया, चिदंबरम, पवार, मनमोहन, विलासराव देशमुख, अहमद पटेल, प्रणव मुखर्जी जैसे लोंगो के भी काले धन के खाते है क्या?
    काले धन का इतिहास क्या है, पहले कपिल सिब्बल ने कहा कोई भी नुकसान २ जी घोटाले में नहीं हुआ है, फिर अहलुवालिया ने कहा की हा वास्तव में कोई घोटाला नहीं हुआ है, फिर मनमोहन ने कहा इसकी जाँच चल रही है, विपक्ष को टालते रहे, राजा जैसा आदमी जिसके पास अपनी मोबाइल को टाप अप करने का पैसा नहीं हो, यदि वह अपनी पत्नी के नाम 3000 करोड़ रुपया मारीशाश में जमा कर दे, क्या यह सब बिना सोनिया की जानकारी के कर सकता है, उस पार्टी में जहा पर बिना सोनिया के पूछे कोई वक्तव्य तथाकथित प्रवक्ता नहीं दे सकते है, फिर आया महा घोटाला देवास-इसरो डील का जिसमे की 205000 करोड़ की बैंड विड्थ को मात्र 1200 करोड़ के 10 साल के उधार के पैसे में दे दिया गया, भला हो सुब्रमनियम स्वामी जी का जिन्हें इन चोरो को नंगा कर दिया, हमारी कांग्रेसी और विदेशी मिडिया सुब्रमनियम स्वामी की तस्वीर हमेशा से गलत पेश किया है जब की वास्तव में भारत देश को ऐसे ही इमानदार नेताओ की जरुरत है जिसने कभी भी चोरी के बारे में सोचा ही नहीं, फिर आया कामनवेल्थ खेल का 90000 करोड़ का घोटाला, फिर कोयला का घोटाला जिसमे ठेकेदारों द्वारा 10 पैसे प्रति किलो के भाव से कोयला खरीदा जाता है और उसे बाजार में 4 रुपये किलो तक बेचा जाता है, यह रकम अब तक 26 लाख करोड़ होती है,
    इटली के 8 बैंक और स्वीटजरलैंड के 4 बैंको को 2005 में भारत में क्योंखोला गया है और इसमे किसका पैसा जमा होता है, ये बैंक किसको लोन देते है और इनका ब्याज क्या है, इनकी जरुरत क्यों आ पड़ी भारत में जब की भारत के ही बैंकरों की बैंक खोलने की अर्जियाँ सरकार के पास धूल खा रही है, इन बैंको को चोरी छुपे क्यों खोला गया है, इन बैंको आवश्यकता क्यों है जब भारत में 80% लोग 20 रूपया प्रतिदिन से भी कम कमाते है.
    भारत के किसानो से कमीशन लेने वाले चोर कत्रोची के बेटे को अंदमान दीप समूह में तेल की खुदाई का ठेका क्यों दिया गया 2005 में, किसने दिया ठेका, किसके कहने पर दिया ठेका, क्या वहा पर पहले से ही तेल के कुऊ का पता लगाकर वह स्थान इसे दे दिया गया जैसे की बहुत बार खबरों में अन्य संदर्भो में आती है, यह खबर क्यों छुपाई गयी अब तक, इसे देश को क्यों नहीं बताया गया, मिडिया क्यों इसे छुपा गई, और विपक्ष ने इसे मुद्दा क्यों नहीं बनाया.
    सरकार ने पहले कहा की बाबा बकवास कर रहे है, काला धन नाम की कोई चीज नहीं है,
    फिर खबर आयी की काला धन है और सबसे ज्यादा भारतीयों का है, यह स्विस बैंको के आलावा 70 और दुसरे देशो में जमा है,
    सरकार ने कहा की टैक्स चोरी का मामला है, हम उन देशो से समझौते कर रहे है, जिससे की दोहरा कर न देना पड़े,
    यह टैक्स चोरी नहीं भारत देशको लूट डालने का मामला है जिसकी सजा किसान से पूंछो तो सिर्फ मौत देना चाहता है वह भी सब कुछ वसूल लेने के बाद
    फिर बात आई की यदि ये भ्रष्टाचारी और लुटेरे इसमे से 15% टैक्स सरकार को दे तो इसे भारत के बैंको में जमा करने दिया जायेगा और किसी को यह हक़ नहीं होगा की वह पूछे की या इतना पैसा कैसे कमाया या लूटा. सरकार इस पर एक कानून ला रही है, क्यों? किसको बचाया जा रहा है? जिसने भी यह गद्दारी की है उसे तो भीड़ ही मार डालेगी, इन्ही लोगो की वजह से भारत में इतनी महागायी है की लोग शादी खर्च से बचने के लिए बेटियों की जान ले ले रहे है, किसान आत्महत्या कर रहा ई, गरीब दवा नहीं करा रहा है, बच्चे स्कुल नहीं जा रहे है, इन्हें तो किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जा सकता है, ये यूरिया घोटाला करते है और यूरिया किसान को दुगुने दाम बचा जाता है, फिर गेहू सस्ते में खरीदा जाता है, और अब तो घोटाला 115% हो जायेगा, 115 चुराओ, 15 सरकार को देकर 100 खुद रख लो.
    हमारे देश में क्यों अनुसन्धान के लिए पर्याप्त पैसा नहीं दिया जाता है, यह कीसकी चाल है, जिसकी वजह से हम 5-10 गुना दाम में विदेशी चीजे खरीदते है,
    ऐसे कौन से कारण है जिनके कारन हम नेहरू के द्वारा ट्रांसफर अफ पॉवर अग्रीमेंट 14 अगस्त 1947 को दस्तखत करने के बाद भी आज तक विक्सित नहीं बन पाए, जब की हमारी जनता हफ्ते में 90 घंटा काम करती है जबकि कामचोर अंग्रेज हफ्ते में सिर्फ 30 घंटा काम करते है,
    क्या कारण है की हमारे 45 रुपये में 1 डालर और 90 रुपये में 1 पौंड मिलाता है, जब की 1947 में 1 रुपये में 1 डालर मिलता था.
    क्या कारण है की हमारे देश में एक भी सोलर ऊर्जा वैज्ञानिक नहीं है और दुनिया भर के परमाणु वैज्ञानिक है जो हमें हमेशा झूठा अश्वाव्हन देते है की यह परमाणु बिजली सस्ती और निरापद है भारत की परमाणु से सम्बंधित कुल बाजार 750 लाख करोड़ का होगा. जब की हम भारत में 400000 मेगावाट सोलर बिजली बना सकते है,
    हम अभी तक सुरक्षित अन्ना भण्डारण की व्यवस्था क्यों नहीं बना पाए जब की हमारे पास धन की कमी ही नहीं है, क्योकि अन्न को सडा दिखाकर उसे कौड़ियो के भाव शराब माफिया को बचा जाता है जब की गरीब अन्ना बिना मर रहा है, इसके लिए तो कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार होगा, उसकी सजा क्या है,
    मीडिया को निष्पक्ष बनाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है, सभी भारतीयों को पता चल गया है की मिडिया , टीवी और पत्रिकाए सरकार को बिक चुकी है, बड़े शर्म की बात है, शाम को सिर्फ 4 रोटी खाने के लिए भारत माता से गद्दारी क्यों? 19. अगर देश में 2 लाख करोड़ रुपये की नकदी सर्कुलेशन में है तो देश की अर्थव्यवस्था करीब 100 लाख करोड़ रुपयों की होती है. और हमारे देश में रिजर्व बैंक अबतक लगभग 18 लाख करोड़ रुपयों के नोट छाप चुका है और कमसे कम 10 लाख करोड़ रुपये सर्कुलेशन में है. इस हिसाब से देश की अर्थव्यवस्था करीब 400 से 500 लाख करोड़ रुपये होनी चाहिए लेकिन अभी हमारी अर्थव्यवस्था केवल 60 लाख करोड़ की है. जबकि इतनी अर्थव्यवस्था के लिए दो लाख करोड़ से भी कम सर्कुलेशन मनी की जरूरत है.
    अगर 400 लाख करोड़ रूपये का काला धन देश में वापिस आ जाता है तो देश की अर्थव्यवस्था करीब 20,000 लाख करोड़ रुपये होगी … क्या आप जानते हैं कि इस समय अमेरिका सबसे शक्तिशाली देश है और उसकी अर्थव्यवस्था करीब 650 लाख करोड़ की है… मतलब 400 लाख करोड़ रुपये वापिस मिलने पर हम अमरीका से भी 30 गुना ज्यादा शक्तिशाली बन सकते है.
    मीडिया मे बिके हुए देनिक भास्कर ने आज कहा की बाबा स्वदेशी का प्रचार कराते है और खुद के पतंजलि मे 2 एलसीडी सेमसंग की है और ब्लेकबेरी का मोबाइल उनके अधिकारी के पास हैइसी बिके हुए देनिक भास्कर नाम के दल्ले से एक प्रश्न आप अपने आपको मीडिया कहते हो देश बचाने वाले ? क्या आपने कभीकोशिश भी की स्वदेशी को अपनाने की ? आपके लिए एक एग्रीमेंट स्वतन्त्रता हो जाता है लेकिन स्वदेशी आंदोलन कोई महत्व नहीं रखता ? क्योंकि आपकी झोली भारती है सेमसंग जेसी कंपनीय देनिक भास्कर के वैबसाइट पर ही देख लीजिये कितनी विज्ञापन है सेमसंग के देनिक लाखो मे दिल होती है उत्सव मे तो तादात बढ़ जाती है फिर देनिक भास्कर क्यूँ हरामखोरी नहीं करेगा ? बाबा के स्वदेशी आंदोलन से इन दलालो के मालिक कंपनियों ने इन्हे आदेश दिया है की अपनी कलम हमारे यहाँ गिरवी रखें और बाबा का विरोध करें लोगो को बर्गलाए । जिस दिन इस क्रांति ने आक्रामकता का रूप लिया तब इन मीडिया के दलालो का भी हश्र वही होगा जो हेडलाइन टुडे के दफ्तर मे हुआ था आरएसएस के बारें मे झूठ फेलाने के लिए उस स्टिंग से क्या हुआ ना कोई केस ना कोई समान सिर्फ एक झूठ था जनता को बरगलाने के लिए

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  8. AJAY GOYAL

    HUMNAI RAJ HI “BHARAT” KO BATVA KAR SHURU KIYA THA , AUR AB TO HAMARA HI RAJ HAI, AB CHAHE JO MARGI KARAI HUM ?

    FROM—- EK CONGRESSI

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