लेखक परिचय

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

युवा साहित्यकार लोकेन्द्र सिंह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में पदस्थ हैं। वे स्वदेश ग्वालियर, दैनिक भास्कर, पत्रिका और नईदुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। देशभर के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में समसाययिक विषयों पर आलेख, कहानी, कविता और यात्रा वृतांत प्रकाशित। उनके राजनीतिक आलेखों का संग्रह 'देश कठपुतलियों के हाथ में' प्रकाशित हो चुका है।

न्यायपालिका को कठघरे में खड़ा मत करो महाराज

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– लोकेन्द्र सिंह देश में राजनीतिक विरोध का ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा गया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के बीच अपनी राजनीतिक लड़ाई हारे हुए समस्त विपक्षी दल अब भाजपा और केंद्र सरकार को घेरने के लिए संवैधानिक संस्थाओं को भी निशाना बनाने में संकोच नहीं कर रहे हैं। जज बीएच लोया की कथित… Read more »

वो सिर्फ हिन्दू नहीं इंसान भी हैं। 

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केशव पटेल पाकिस्तान में हिन्दुओं को धर्म परिवर्तन करने पर दबाब बनाया जा रहा है। राजस्थान से डिपोर्ट हुए हिन्दू परिवार पाकिस्तान में मुस्लिम धर्म अपनाने को मजबूर हो रहे हैं। कारण साफ है मुस्लिम नहीं, तो जीना मुहाल। बहू-बेटियों की इज्जत से लेकर जान माल तक सब ख़तरे में। पाकिस्तान ही नहीं विश्व के कई… Read more »



प्रार्थनाएं धर्म की नहीं, भारतीयता की प्रचारक

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– लोकेन्द्र सिंह देश के लगभग एक हजार केंद्रीय विद्यालयों में पढऩे वाले विद्यार्थियों को संस्कृत और हिंदी में प्रार्थना कराई जाती हैं। वर्षों से यह प्रार्थनाएं हो रही हैं। परंतु, आज तक देश में कभी विद्यालयों में होने वाली प्रार्थनाओं पर विवाद नहीं हुआ। कभी किसी को ऐसा नहीं लगा कि प्रार्थनाओं से किसी धर्म विशेष… Read more »

ध्रुवीकरण का ओछा प्रयास है पादरी थॉमस मैकवान की चिट्ठी

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– लोकेन्द्र सिंह गुजरात चुनाव में चर्च ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का सीधा प्रयास किया है। गांधीनगर के आर्चबिशप (प्रधान पादरी) थॉमस मैकवान ने चिट्ठी लिखकर ईसाई समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे गुजरात चुनाव में ‘राष्ट्रवादी ताकतों’ को हराने के लिए मतदान करें। यह स्पष्टतौर पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय एवं चुनाव आयोग की आचार… Read more »

सज्जनशक्ति को जगाने का ‘जामवन्ती’ प्रयास

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विजयादशमी उत्सव के उद्बोधन में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि निर्भयतापूर्वक सज्जनशक्ति को आगे आना होगा, समाज को निर्भय, सजग और प्रबुद्ध बनना होगा – लोकेन्द्र सिंह विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए विजयादशमी उत्सव का बहुत महत्त्व है। वर्ष 1925 में विजयादशमी के अवसर पर ही संघ की स्थापना… Read more »

ममता सरकार के तुष्टीकरण को न्यायालय ने दिखाया आईना

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– लोकेन्द्र सिंह माननीय न्यायालय में एक बार फिर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुष्टीकरण की नीति का सच सामने आ गया। ममता बनर्जी समाज को धर्म के नाम पर बाँट कर राजनीति करने वाले उन लोगों/दलों में शामिल हैं, जो अपने व्यवहार और राजनीतिक निर्णयों से घोर सांप्रदायिक हैं लेकिन, तब भी तथाकथित ‘सेकुलर जमात’ की झंडाबरदार… Read more »

गौरी लंकेश हत्याकांड : जवाब माँगते कुछ सवाल

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 लोकेन्द्र सिंह लोकतंत्र और सभ्य समाज में हत्या के लिए किंचित भी स्थान नहीं है। किसी भी व्यक्ति की हत्या मानवता के लिए कलंक है। चाहे वह सामान्य व्यक्ति हो या फिर लेखक, पत्रकार और राजनीतिक दल का कार्यकर्ता। हत्या और हत्यारों का विरोध ही किया जाना चाहिए। लोकतंत्र किसी भी प्रकार तानाशाही या साम्यवादी शासन… Read more »

गौरी लंकेश हत्याकाण्ड : विरोध या सियासत

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 लोकेन्द्र सिंह वामपंथी पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद देश में जिस प्रकार का वातावरण बनाया गया है, वह आश्चर्यचकित करता है। नि:संदेह हत्या का विरोध किया जाना चाहिए। सामान्य व्यक्ति की हत्या भी सभ्य समाज के माथे पर कलंक है। समवेत स्वर में हत्याओं का विरोध किया जाना चाहिए। लेकिन, गौरी लंकेश की हत्या के… Read more »

वैचारिक संघर्ष नहीं, केरल में है लाल आतंक

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राजेश के शरीर पर 83 घाव बताते हैं कि केरल में किस तरह लाल आतंक हावी है, केरल में दिखाई नहीं देता क़ानून का राज लोकेन्द्र सिंह केरल पूरी तरह से कम्युनिस्ट विचारधारा के ‘प्रैक्टिकल’ की प्रयोगशाला बन गया है। केरल में जिस तरह से वैचारिक असहमतियों को खत्म किया जा रहा है, वह एक तरह से कम्युनिस्ट विचार के… Read more »

पत्रकारिता में भी ‘राष्ट्र सबसे पहले’ जरूरी

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– लोकेन्द्र सिंह मौजूदा दौर में समाचार माध्यमों की वैचारिक धाराएं स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। देश के इतिहास में यह पहली बार है, जब आम समाज यह बात कर रहा है कि फलां चैनल/अखबार कांग्रेस का है, वामपंथियों का है और फलां चैनल/अखबार भाजपा-आरएसएस की विचारधारा का है। समाचार माध्यमों को लेकर आम समाज का इस प्रकार… Read more »