लेखक परिचय

पारसमणि अग्रवाल

पारसमणि अग्रवाल

(साहित्यिक सक्रियता के लिये क्षेत्रीय सांसद द्वारा सम्मानित) महासचिव- प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) कोंच 156, मियागंज जवाहर नगर कोंच (जालौन) उत्तरप्रदेश

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परसमणि अग्रवाल
चुनाव के आने की आहट मिलते ही राजनैतिक गलियारों में सियासत की आंधी चलना शुरू हो गई। रणनीति बनने लगी, गोंटें बिछने लगी। नाकामियां तलाशी जाने लगी आरोप-प्रत्यारोप का दौर आरम्भ हो गया। आगामी लोकसभा चुनाव की तैंयारियों का शंखनाद हो गया। ऐसे ही गर्मागम राजनैतिक वातावरण में एक ऐसे सवाल ने जन्म ले लिया है जिसका जवाब सम्भवतः भविष्य के गर्भ में छिपा है। क्या टोंटी और टाइल्स  पर सियाशी रोटियां सेंकी जायेगी? यह सवाल अनबूझ पहेली सा बनकर रह गया है। आपको बताते चले कि विगत दिनों सुर्खियों में आया अखिलेश के बंगले विवाद पर अब लोग मजे ले रहे है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर आरोप लगा था कि कालीदास मार्ग स्थित सरकार बंगले को खाली करते समय वह बंगले में न सिर्फ तोड़फोड़ कर गए बल्कि टोंटी और टाइल्स भी चुरा ले गए। ट्वीटर पर अखिलेश यादव ने मोबाइल फोन उत्पादक प्लांट को लेकर ट्वीट किया था जिसमें लिखा था कि प्रदेश में दुनिया का जो सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक प्लांट शुरू हो रहा है उसकी शुरूआत हमारी तरक्की के सोच ने 2016 में ही कम्पनी को हर अनुमति प्रदान करके की थी। ये ‘कैंचीवाली सरकार’ या तो कैंची से सामाजिक सौहार्द के धागे काट रही है या बस हमारे कामों के उद्धाटन के फीते। अखिलेश के इस ट्वीट पर लोगों ने जमकर मजा लिया और अलग- अलग अंदाज में उन्हें कमेंट कर टोंटी चोर बताया। संजू देवी यादव ने कमेंट किया कि जो कहते है थे मैं हवा हॅू आने वाले कल का गालिब, वो आजकल टोंटी चुरा रहे। मजाक के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए गौरव राघव कमेंट करते है जैसें टोंटी चोर ने भी मायावती के बनाए हुए यमुना एक्सप्रेस वे उद्धघाटन स्वंय मायावती से कराया था और मैं ये सोचकर परेशान हॅू कि योगी जी की पुलिस की नाक के नीचे इतनी बढिया क्वालिटी की चरस टोंटी चोर को कहॉ से मिल रही है। श्रीधर मिश्रा अपने कमेंट में टोंटी चोर की जय करते है। अखिलेश की इसी पोस्ट पर महेन्द्र लिखते है कि पड़ोस के निर्माणधीन मकान से कल रात टोटीं और टाइल्स चोरी हो गए चोर ने बताया कि वह अखिलेश यादव से प्रभावित है और उनके जैसा ही बनना चाहता है। ट्वीटर पर अखिलेश अपनी ही पोस्ट पर उपहास का मुख्यबिन्दु बन रहे है। लोगों मजे ले ले कर अखिलेश को टोटीं चोर बता रहे है। अब देखना यह है कि टोंटी और टाइल्स प्रकरण अखिलेश की सियाशी राह में अवरोधक साबित हो गया या फिर वक्त के साथ यह प्रकरण भी अतीत बनकर रह जायेगा।

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