दीवाली पर एक काम करना- गरीबों का भी ध्यान रखना….

diwaliसामने दीवाली है. एकदम सामने…हर कोई उसके स्वागत को तैयार है. धनपति की अपनी तैयारी है. निर्धन की अपनी आधी-अधूरी तैयारी है . दरअसल दीवाली का सम्बन्ध दिल से है. कहा भी तो गया है, न , कि मन चंगा तो कठौती में गंगा. मन में उदासी है, जेब खाली तो कैसी दीवाली? महंगाई के कारण आम आदमी का दिवाला पिट रहा है. वह भीतर-भीतर रोता है, बाहर-बाहर मुस्काता है. लेकिन त्यौहार हमें नवीन कर देते है. दुःख के पर्वत को काट देते है. त्यौहार के आने से मन में उत्साह जगाता है, कि आने वाला कल शायद बेहतर होगा. इससे बेहतर. घर की सफाई करता है, पुताई करता है. नवीनता को जीने की कोशिश है यह. अभावो के बीच भावः ख़त्म नहीं होते. कंगाली है, फिर भी आदमी दीवाली मनायेगा. अमीर की भी दीवाली है तो गरीब की भी. सब अपनी-अपनी हैसियत से दीवाली मना लेते है. यही है अपना देश. लेकिन दीवाली के पहले भारत माता की ओर से धनपतियो से अपील तो की ही जा सकती है, कि इस दीवाली पर तुम एक काम करना- गरीब बच्चो का भी ध्यान रखना. जो बच्चे अनाथालयों में पल रहे है, उनके लिए भी कुछ मिठाईयां (नकली नहीं..), कुछ पटाखे भी खरीद कर वहां तक पहुंचा देना. यही हमारे नागरिक होने का फ़र्ज़ है. वृधाश्रम में उपेक्षित बुजुर्ग रहते है. उनके बीच भी जाना. दीवाली की खुशियाँ तब और बढ़ जायेगी. ये नुसखे आजमा कर तो देखें. दीवाली के पहले ये अपील इसलिए ताकि कोई हलचल हो. वैसे देश में अच्छा सोचने और करने वालों की कमी नहीं. मै जो बात कह रहा हूँ, बहुत से लोग ये सब करते है. उससे कहीं ज्यादा करते है .

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