लेखक परिचय

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

लेखन विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन लोकमत समाचार नागपुर में तीन वर्षों तक व्यंग्य स्तंभ तीर तुक्का, रंग बेरंग में प्रकाशन,दैनिक भास्कर ,नवभारत,अमृत संदेश, जबलपुर एक्सप्रेस,पंजाब केसरी,एवं देश के लगभग सभी हिंदी समाचार पत्रों में व्यंग्योँ का प्रकाशन, कविताएं बालगीतों क्षणिकांओं का भी प्रकाशन हुआ|पत्रिकाओं हम सब साथ साथ दिल्ली,शुभ तारिका अंबाला,न्यामती फरीदाबाद ,कादंबिनी दिल्ली बाईसा उज्जैन मसी कागद इत्यादि में कई रचनाएं प्रकाशित|

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अपने मम्मी पापा के संग ,

चुहिया पहुंची थाने|

बोली चूहे के घरवाले,

हैं दहेज दीवाने|

शादी के पहले से ही वे,

मांग रहे हैं कार|

बंद करो थाने में उनको,

चटपट थानेदार|

इस पर भालू कॊतवाल ने,

चूहे को बुलवाया|

थाने में घरवालों के संग,

उसको बंद कराया|

 

3 Responses to “दहेज‌”

  1. yamuna shankar panday

    चुहिया की जगह यदि हमारी लड़की हो तो अवश्य कोई बकताव्य देते यह नहीं पता चल रहा है की कवी महोदय क्या कहलवाना चाहते हैं ! यद्यपि पुरे समाज की यही मंनोदशा दर्शा रही है की हम उक्त दान दहेज़ के स्वतः जिम्मेदार हैं ! हम पडोशी के लडके को क्या दहेज़ में मिला , यह जानने के लिए अधिक उतावले रहतें हैं !! यह दहेज़ दानव कितनों का घर नष्ट करेगा कहा नहीं जा सकता ? भारत के कवी बुद्धिजीवी समजोद्धोरक , और समाज शास्त्री सब इस गूढ़ राहशी को सुलझाना चाहते हैं परन्तु कैसे ? यह कब होगा इस ज्वलंत प्रश्न का कोई उत्तर किसी के पास नहीं है? कब नया सवेरा होगा ????

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