समाज

वृद्ध व्यक्ति परिवार पर बोझ नहीं बल्कि परिवार और समाज की जीवित पूंजी हैं! 

कमलेश पांडेय

वृद्ध व्यक्ति परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज की जीवित पूंजी हैं। लिहाजा उनके लिए एक ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें उम्र बढ़ने का अर्थ निर्भरता और अकेलापन नहीं, बल्कि गरिमा, सुरक्षा, सक्रियता और अनुभव के सम्मान के साथ लंबा जीवन हो। यही बढ़ती हुई वैश्विक वृद्ध आबादी के लिए स्वस्थ और समावेशी समाज की दिशा है। 

अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस (1 अक्टूबर) केवल बुजुर्गों के सम्मान का दिन नहीं, बल्कि यह सोचने का अवसर है कि बढ़ती उम्र में हर व्यक्ति को सम्मान, स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी कैसे मिले? इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने 1 अक्टूबर को यह दिवस घोषित किया था। 

जानिए आज दुनिया और भारत में वृद्धों की स्थिति क्या है?

दुनिया तेजी से वृद्ध हो रही है। 2025 में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लगभग 1.2 अरब लोग थे; 2050 तक यह संख्या लगभग 2.1 अरब होने का अनुमान है—यानी दुनिया की आबादी का लगभग 20%। 

वहीं, भारत में भी वृद्ध आबादी तेजी से बढ़ रही है। सरकार के अनुसार 60 वर्ष से अधिक आयु की आबादी 2011 के लगभग 10 करोड़ से बढ़कर 2036 में लगभग 23 करोड़ होने का अनुमान है। 

भारत में पहले से AVYAY, NPHCE, Elderline (14567) और वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा की विभिन्न व्यवस्थाएँ हैं। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए AB-PMJAY के तहत ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज भी उपलब्ध कराया गया है। इसलिए अगला कदम केवल नई योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि मौजूदा योजनाओं की जानकारी, पहुंच और जमीनी क्रियान्वयन को और मजबूत करना होना चाहिए।

# समझिए, वृद्ध जीवन की कुछ प्रमुख चुनौतियाँ क्या-क्या हैं:

एक, स्वास्थ्य: उम्र के साथ दीर्घकालिक बीमारियों और देखभाल की आवश्यकता बढ़ सकती है।

दो, अकेलापन और सामाजिक अलगाव: परिवारों के छोटे होने और प्रवास के कारण कुछ बुजुर्ग सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ जाते हैं।

तीन, आर्थिक असुरक्षा: पर्याप्त पेंशन या नियमित आय न होने पर जीवन कठिन हो सकता है।

चार, डिजिटल और सामाजिक बदलाव: बैंकिंग, सरकारी सेवाओं और संचार के डिजिटल होने से डिजिटल साक्षरता जरूरी हो गई है।

पांच, भेदभाव: केवल उम्र के आधार पर किसी व्यक्ति की क्षमता या उपयोगिता को कम आंकना भी एक चुनौती है। WHO उम्र-आधारित भेदभाव को स्वस्थ वृद्धावस्था के रास्ते की बाधाओं में गिनता है। 

छह, देखभाल की बढ़ती जरूरत: 2050 तक 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या भी बहुत तेजी से बढ़ने की संभावना है। 

साथ ही, वृद्धों को केवल सहायता पाने वाला वर्ग समझना उचित नहीं है। वे परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था में ज्ञान, अनुभव, देखभाल और सामुदायिक योगदान देते हैं। संयुक्त राष्ट्र भी वृद्धों को समाज में सक्रिय योगदानकर्ता और परिवर्तन के भागीदार के रूप में रेखांकित करता है। 

# हमें व्यक्तिगत रूप से वृद्धों के लिए क्या करना चाहिए?

एक, सम्मान दें, केवल सहानुभूति नहीं: उनसे सलाह लें, उनकी बात ध्यान से सुनें और महत्वपूर्ण पारिवारिक निर्णयों में उनकी भागीदारी रखें।

दो, समय दें: सप्ताह में कुछ समय केवल बातचीत, साथ बैठने या टहलने के लिए निकालना भी बहुत महत्वपूर्ण है।

तीन, डिजिटल रूप से सक्षम बनाएं: मोबाइल, वीडियो कॉल, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं का सुरक्षित उपयोग सिखाएँ— लेकिन उनकी ओर से संवेदनशील वित्तीय निर्णय खुद न लें।

चार, स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें:

नियमित चिकित्सकीय जांच, उचित भोजन, शारीरिक गतिविधि और मानसिक-सामाजिक सक्रियता में सहयोग करें।

पांच, उनकी स्वतंत्रता बनाए रखें:

हर काम अपने हाथ में लेने के बजाय जहां वे स्वयं निर्णय या काम कर सकते हैं, वहां उन्हें स्वतंत्र रहने दें।

छह, बच्चों और बुजुर्गों के बीच संवाद बढ़ाएं: दादा-दादी, नाना-नानी की जीवन-कथाएँ, अनुभव, स्थानीय इतिहास और पारिवारिक परंपराएँ अगली पीढ़ी तक पहुंच सकती हैं।

# वृद्धों के हितार्थ सरकार को क्या करना चाहिए?

WHO के अनुसार स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए केवल अस्पताल पर्याप्त नहीं हैं; स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा, अनुकूल वातावरण और दीर्घकालिक देखभाल को साथ लेकर चलना जरूरी है। 

इसलिए सरकार के लिए क्षेत्रवार प्राथमिकताएँ हो सकती हैं:

एक, आवश्यक कदम स्वास्थ्य:  हर जिले में मजबूत जेरियाट्रिक सेवाएँ और घर के पास प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन की पर्याप्तता और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

दो, दीर्घकालिक देखभाल: प्रशिक्षित caregivers, home-care और day-care centres का विस्तार करना चाहिए।

तीन, सुरक्षित शहर: senior-friendly फुटपाथ, सार्वजनिक परिवहन, शौचालय और अस्पताल की व्यवस्था करनी चाहिए।

चार, डिजिटल समावेशन: वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरल डिजिटल सेवाएँ और सहायता केंद्र खोलना चाहिए।

पांच, अकेलापन: अकेलापन दूर करने के लिए सामुदायिक वरिष्ठ नागरिक केंद्र, क्लब और inter-generational programmes शुरू करना चाहिए।

छठा, अधिकारों की सुरक्षा: बुजुर्गों से  दुर्व्यवहार, धोखाधड़ी और संपत्ति संबंधी शोषण के विरुद्ध तेज सहायता अभियान प्रारंभ करना चाहिए। 

सातवां, रोजगार/भागीदारी:  इच्छुक और सक्षम वरिष्ठ नागरिकों के लिए part-time वर्क, mentoring और स्वयंसेवी अवसर प्रदान करना चाहिए।

आठवां, देखभाल करने वाले परिवार:  परिवार के caregivers को प्रशिक्षण और आवश्यक सामाजिक/आर्थिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए।

ऐसा करके ही हमलोग अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस को सफल बना सकते हैं। यह बुजुर्गों के प्रति बड़ा उपकार होगा।

कमलेश पांडेय