लेखक परिचय

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

वामपंथी चिंतक। कलकत्‍ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन।

Posted On by &filed under विविधा.


-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

हमारे अनेक ब्लॉग पाठक आस्था के आधार पर हाल ही में आए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के फैसले पर मुग्ध हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि वे राम-राम जपते-जपते इस भवसागर को आसानी से पार कर जाएंगे। आस्था को इन लोगों ने तर्क, विज्ञान, आधुनिक न्याय, संविधान आदि सबसे ऊपर स्थान दिया है।

संघ परिवार आस्था के आधार पर आम लोगों को बेबकूफ बनाने में लगा है, मेरे ब्लॉगर दोस्त आस्था के नशे में डूबे हैं उन्हें अब राम मंदिर दे ही दिया जाए और एक राम मंदिर नहीं सारे देश को राम मंदिर में तब्दील कर दिया जाए।

देश की सारी जनता से कहा जाए कि वह अपने घर, इमारत, स्कूल, कॉलेज-विश्वविद्यालय, न्यायालय, विज्ञान की प्रयोगशालाएं आदि सबको राम मंदिर में तब्दील कर दे। जनता सड़कों पर रहे, खुले आसमान के नीचे रहे। हम सबके घरों को भव्य राम मंदिरों में रूपान्तरित कर दिया जाए।

संघ परिवार और रामभक्तों को इस देश में प्रत्येक इमारत को भव्य राम मंदिर में रूपान्तरित करने का जिम्मा दे दिया जाए। सारा देश राम का है और रामभक्तों का है। राम और राम भक्तों को तो भारत में सिर्फ राममंदिर चाहिए चाहे उसके लिए कोई भी कीमत देनी पड़े। वे बच्चों की तरह राम लेंगे -राम लेंगे की रट लगाए हुए हैं। हम चाहते हैं कि इस प्रस्ताव पर सभी रामभक्त गंभीरता से सोचकर जबाब दें कि देश की सभी इमारतों को भव्य राम मंदिर में रूपान्तरित क्यों न कर दिया जाए।

हम अब न कुछ पैदा करेंगे, न ज्ञान की बातें करेंगे,न रेशनल बातें करेंगे,न विज्ञान की चर्चा करेंगे,हम न पढ़ेंगे ओर न लिखेंगे। इंटरनेट, टीवी, रेडियो आदि का धंधा भी बंद कर दिया जाए सिर्फ राम धुन होगी, राम की इमेज होगी। अधिक से अधिक सरसंघचालक के कुछ अमरवचन होंगे जिन्हें हम सुनेंगे और धन्य हो धन्य हो करेंगे।

आस्था में राम हैं। सारे वातावरण में राम हैं। यह देश राम का है और राम के अलावा इस देश में किसी भी देवी-देवता और मनुष्य की आस्था का कोई महत्व नहीं होगा। राम के प्रति आस्था के खिलाफ कोई अगर जुबान खोलेगा तो उसका वध होगा। राम हमारी राष्ट्रीय आस्था के प्रतीक हैं अब आगे से हम राम का ही उत्पादन और पुनरूत्पादन करेंगे।

राम घरों में रहेंगे मनुष्यों घरों के बाहर रहेगें। वैज्ञानिकों,इंजीनियरों,वकीलों, न्यायाधीशों, अध्यापकों,आस्तिकों-नास्तिकों,नागरिकों और सभी किस्म के पेशवर लोगों को उनके धंधे से हटा दिया जाएगा अब आगे से हम सिर्फ आस्था खाएंगे,आस्था पीएंगे आस्था में जीएंगे। अब इस देश में सिर्फ रामभक्त रहेंगे। जो रामभक्त नहीं हैं वे अपने लिए अन्य देश खोज लें और हमारे राम जो भारत के बाहर

अन्य देशों में चले गए हैं वहां से हम सभी राम मूर्तियों को ले आएंगे। राम को हम विदेशों में नहीं रहने देंगे। गुस्ताखी देखो की जब एकबार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महाज्ञानी पुरातत्व विशेषज्ञों ने बता दिया और उस पर लखनऊ न्यायालय के न्यायसंपन्न न्यायाधीशों ने मुहर लगा दी कि राम का जन्म कहां हुआ था तो इस बात को तो दुनिया की अब तक की सबसे महान खोज मान लिया जाना चाहिए और जो लोग नहीं मान रहे हैं उनकी व्यवस्था वैसे ही की जाए जैसी रामजी ने राक्षसों की कीथी।

हमें खुश होना चाहिए कि हमारा देश सिर्फ राम का है यहां राम और रामभक्तों के अलावा किसी की नहीं चलेगी। हमारे यहां संसद, अदालत, संविधान और उसमें प्रदत्त नागरिक अधिकारों का अब कोई महत्व नहीं रह गया है अब राम हमारे देश में जन्म ले चुके हैं और हमें उन सैंकड़ों-हजारों किताबों को आग के हवाले कर देना है जो राम के विभिन्न किस्म के रूपों की चर्चा करती हैं। उन विद्वानों को रामभक्तों की कैद में ड़ाल देना है जो राम को नहीं मानते, राम जन्म को नहीं मानते। अयोध्या को तो अब रामभक्त एकदम स्वर्ग बनाकर छोडेंगे और भारत को रामराज्य और स्वर्गलोक। हम चाहते हैं कि रामभक्त और संघ परिवार जल्दी से जल्दी मिशन राम मंदिर को सारे राष्ट्र में साकार करे। हो सके तो रातों-रात रामजी से मिलकर सभी इमारतों को राममंदिर में तब्दील करा दें। जब देश राम और देशवासी राम के तो किसी तर्क, विवेक, विज्ञान, न्याय आदि के आधार पर सोचना नहीं चाहिए। जय श्री राम।

13 Responses to “आस्था की जय-जयकार में रेशनल की विदाई”

  1. schs

    चतुर्वेदी जी के इस आख्यान को उनका प्रलाप न माना जाय। वे प. बंगाल में रहते हैं, कम्युनिस्ट सरकार का नमक खाते हैं, वहां के बौद्धिक जगत में जिन्दा रहना चाहते हैं, साहित्यिक सत्ता की मलाई पाते रहने के इच्छुक हैं। ऐसे धीरोदात्त नायक की मजबूरी है कि मार्क्सवादी एजेंडे को बार-बार राम-धुन की तरह रटते रहा जाय। वही वे कर रहे हैं। अगर अगले साल ममता दीदी ने बंगाल में अपना परचम फहरा दिया तो हो सकता है कि चतुर्वेदी जी अपने मन में बसे राम को हनुमान की तरह छाती फाड़ कर दिखा दें।
    उनके नाम में चतुर शामिल है और चतुरता तभी कहलायेगी जब वे मार्क्सवाद की जाती हुई बयार में जो कुछ लपेट ना हो लपेट लें। आगे तो वही होने वाला है जो दीदी की मर्जी।

    Reply
  2. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    chaturvedi ji ko samjhne ke liye adhunatan ,addytan vaigyanik drushti chahiye .ishwar se prarthana{shriramji se bhi}hai ki ye jo aadhe adhure ardhshikshit tatwawadion ka jo anvshyk vaak prahaar shri chaturvedi par ho raha hai …usase ve ranchmaatr vichlit na hokar isi trh saty ke path pradarshak bane rahen …aameen

    Reply
    • आर. सिंह

      R.Singh

      Tiwariji maharaaj ,Chaturvediji aap ke aaraadhya ho sakte hain,par usase yah nahi siddh hota ki chaturvedi ji sarvagya hain.Main to apne ko aaj bhi ek gyaan pipaasu ke roop mein dekhtaa hoon ,par bina koi thos adhaar ke is tarah ke aalekh dwaaraa un sabko, jo ki aapke vichaaron se asahamat hain ek hi laathi se haank denaa paagalpan ke sivaa aur bhi kuchh ho sakataa hai ,aisaa main nahi maanataa.Rah gayee baat vidwataa ki to main to ek saadhaaran manushya matra hoon jo hameshaa insaan banane ki cheshtaa karataa rahaa hai.

      Reply
  3. आर. सिंह

    R.Singh

    चतुर्वेदीजी, आप के इस लेख के बाद तो मुझे लगाने लगा है की आप पगला गए हैं.फैसले की चर्चा करते करते आप बहकते हुए कहाँ पहुच गए इसका आपको पता ही नहीं चला,यह पागलपन की स्थिति नहीं तो और क्या है? आप मेरे एक टिपण्णी पर राम नाम कहते हुए निकल गए हैं और शायद यहाँ भी वाही करें,इसलिए मैं अपनी स्थिति साफ़ कर देना चाहता हूँ की मैं इश्वर के किसी रूप में विस्वास नहीं करता.वे चाहे हिन्दुओं के इश्वर हों या उनके विभिन अवतार या कोई अन्य देवी देवता. या फिर वे अल्लाह हों या क्रिश्चियानो के गौड़. पर इसका मतलब यह नहीं होताकी मैं बेपेंदी का लोटा बन जायुं जैसा आप बने हुए हैं. आप के लिए बेहतर होगा की जल्दी से जल्दी किसी मनोचिकित्सक से मिल लीजिये नहीं मानसिक असंतुलन ज्यादा बढ़ जाने से पागलखाने जाने की नौबत आ सकती है.

    Reply
  4. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    chaturvedi ji ko is shaandar tathyparak aalekh ke liye badhai .vaakai aap ko schcha bharteey or dharmnirpeksh vicharak hone ka hk hai .jo log aapke aalekh men sannihit drushtikon se sahmat nahin we unke apne agraj shree aadvani ji ka aaj ka aalekh hi padh dalen .unhone bhi mana hai ki lucknow court men kaanoon ne aastha ka man rakha .ab kahne sunane ko kya raha .chaturvedi ji aaj yadi shreeram hote to be bhi kahte ki mujhe sirf ayodhya ya bharat ya bhoomandal tk hi kyon seemit karteho meain to —
    rom -rom prati lageu .koti koti brhmaand.

    Reply
    • शैलेन्‍द्र कुमार

      shailendra kumar

      आप दोनों लोग खुश रहें इसी में देश की भलाई है भगवन आप दोनों लोगो को सदा खुश रक्खे
      गेट वेल सून

      Reply
  5. विजय प्रकाश सिंह

    चतुर्वेदी जी ,मैंने आपका आपका लेख पढ़ा , मुझे इस बात का कष्ट है कि आप जैसा विद्वान प्रोफ़ेसर ने भी बिना जजमेंट पढ़े ही लेख लिखा है | खबरिया चैनलों की बात और है जिन्हें ब्रेकिंग न्यूज देना होता है और राजनैतिक दल भी अपनी टिप्पडी पार्टी लाइन पर देते है | अगर आप किसी वाम पंथी दल के कार्यकर्ता है तो बात ठीक है क्योंकि कार्यकर्ता तो अपने नेताओं के द्वारा टिप्पड़ियों को दोहरा देता है | लेकिन आप विचारक हैं , वामपंथी ही सही , लेकिन पहले पढ़ तो लेते फिर तर्क के साथ , जजमेंट के पैरे को उद्दृत करके न्यायाधीश के तर्क की काट पेश करते तो हम जैसे निरपेक्ष लोगो को भी समझ आता और हम भी आप से इत्तफाक रखते |

    आपकी जानकारी के लिए – पूरा फैसला कोर्ट की वेब साईट पर उपलब्ध है , आप भी पढ़ सकते हैं |

    यह फैसला तर्क पर आधारित है आस्था पर नहीं | इस बारे में जल्द ही एक लेख मै लिखूंगा , प्रार्थना है कि अगर मौक़ा मिले तो ‘www.mireechika.blogspot.com” पर पढियेगा |

    Reply
  6. अहतशाम "त्यागी"

    जगदीश्वर जी राम के फेवर में नहीं लिखते तो भी लोग नाखुश और अगर आज फेवर में लिखा तो भी न खुश
    इससे लगता है कुछ लोग लेख पर नहीं जगदीश्वर पर टिप्पड़ी करते हैं
    सही तो लिखा है –रामरामरामरामरामरामरामरामरामराम

    Reply
  7. sadhak ummedsingh baid

    चतुर्वेदीजी जान लें, ‘जगदीश्वर’ हैं राम्। भेदभाव ना जानते, सबके रक्षक राम। सबके रक्षक राम, विरोधी भी यह मानें। आपकी तबियत अच्छी हो, जल्दी यह मानें। कह साधक कवि, अब तक क्या थे ‘चतुर्देदीजी?’ राम को ही अब कोस रहे हैं चतुर वेदीजी? sahiasha.com

    Reply
  8. Rajeev Dubey

    तर्क, विवेक, विज्ञान, न्याय पर तो यह लेख आधारित नहीं लगता … यह तो नाराजगी और व्यंग्य का खज़ाना लगता है . इतनी भी चिंता की ज़रुरत नहीं है . आपको सारी सुविधाएं मिलाती रहींगी .

    Reply
  9. शैलेन्‍द्र कुमार

    शैलेन्द्र कुमार

    प्रवक्ता से अनुरोध है की वो माननीय जगदीश्वर जी को आराम दे उनकी हालत बहुत बिगड़ गयी है
    जगदीश्वर जी गेट वेल सून

    Reply
  10. Awadhesh

    जब वामपन्थी नेता विदेशियो का साथ दे रहे थे तब देश को आज़ाद कराने मे अग्रणी भूमिका निभाने वाले लोग राम राम जप कर देश मे राम राज्य लाने की बात कर रहे थे…
    राम के नाम से देश मे कितने परिवर्तन हुए इस पर भी चिन्तन कीजीये……

    Reply
  11. दिवस दिनेश गौड़

    Er. Diwas Dinesh Gaur

    अति सुंदर चतुर्वेदी जी…
    किन्तु जिस दिन समस्त भारत राम का घर बन जाएगा उस दिन यहाँ कोई किसी का पराया नहीं होगा. आपने यह कैसे मान लिया लोगों को सड़कों पर रहना पड़ेगा? राम ने ये दुनिया हमारे लिए ही तो बनाई है, उसके घर में हम सब के लिए स्थान होगा. सब से मेरा तात्पर्य केवल हिन्दू नहीं, सभी धर्म, जातिया, विचार, धरती पर बसने वाले सभी जीव राम की ही तो संतानें हैं, राम भी उनसे असीम प्रेम करते हैं, फिर वे भला उन्हें सड़कों पर क्यों पड़े रहने देंगे? राम का घर हमें क्या पूरी सृष्टी को अपने अंदर समा सकता है. हम यदि उसके चरणों में रहे तो यह तो हमारा सौभाग्य होगा. और ऐसा नहीं है की राम का घर बन जाने से यहाँ केवल राम का नाम जपने वाले ही रहेंगे. जब राम ने यहाँ जन्म लिया था तब भी भारत ज्ञान विज्ञान में उन्नत था, और वे सभी ज्ञानी-विद्वानी-कला प्रेमी-साहित्य प्रेमी-वैज्ञानिक भी राम की भक्ति में ही विज्ञान के चमत्कार करते गए, कला, साहित्य व अर्थशास्त्र में महारत पाते गए, तो आज भी वह संभव है. ऐसा तो नहीं है की जो राम नाम जपेगा वह और कोई कार्य ही नहीं करेगा. देश में सब कार्य होंगे, ज्ञान विज्ञान में देश फिर उन्नती करेगा, देश का गौरव फिर से बढेगा, हिन्दू भाई मुस्लिम भाई सब प्रेम से रहेंगे, क्योंकि जहाँ राम है वहां नफरत रुपी राक्षस कहाँ से आएगा? विद्वानों से विद्वान, ज्ञानियों से ज्ञानी वह sabse bada vigyaani सब par प्रेम barsaaega. और वही होगा सही अर्थों में स्वतंत्र भारत, सुनहरा भारत, pyaara भारत, हमारा भारत…

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *