राजनीति

नए हरियाणा की नींव : आधुनिक सेक्टरों से बदलेगी शहरी विकास की तस्वीर

हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के 71 शहरों में नए आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक सेक्टर विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना वास्तव में “नए हरियाणा” की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, हिसार, पानीपत, सिरसा, यमुनानगर, रोहतक, भिवानी, सोनीपत, डबवाली सहित अनेक शहरों में नियोजित ढंग से नए सेक्टर विकसित करने की यह योजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के आधुनिक, सुरक्षित, स्वच्छ और आत्मनिर्भर शहरों की कल्पना को साकार करने का प्रयास है।
आज हरियाणा तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। रोजगार, शिक्षा और बेहतर जीवन की तलाश में गांवों से शहरों की ओर पलायन निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे में यदि समय रहते योजनाबद्ध शहरी विकास नहीं किया गया, तो अवैध कालोनियों, यातायात अव्यवस्था, जल संकट, प्रदूषण और आधारभूत सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं विकराल रूप धारण कर सकती हैं। हरियाणा सरकार की यह योजना इन चुनौतियों का दूरदर्शी समाधान प्रस्तुत करती दिखाई देती है।
इन नए सेक्टरों को केवल “कालोनी” के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन शैली के अनुरूप “स्मार्ट एवं आत्मनिर्भर शहरी इकाइयों” के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। पुरानी कालोनियों की सबसे बड़ी समस्या अव्यवस्थित निर्माण, संकरी गलियां, बिजली की खुली तारें, जलभराव, पार्कों की कमी और सफाई व्यवस्था का अभाव रही है। नई योजना में इन कमियों से सीख लेकर भविष्य की आवश्यकताओं को केंद्र में रखना अत्यंत आवश्यक है।
सबसे पहले ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रत्येक भवन पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की अनिवार्य व्यवस्था की जाए, जिससे बिजली की खपत कम हो और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिले। यदि हजारों मकानों की छतों पर सोलर प्लांट स्थापित होते हैं, तो यह हरियाणा को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी अग्रणी राज्य बना सकता है।
इसी प्रकार बिजली की सभी केबलों को भूमिगत रखा जाना चाहिए। इससे न केवल शहरों की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि दुर्घटनाओं और तकनीकी बाधाओं में भी कमी आएगी। बरसात और आंधी के समय बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या भी काफी हद तक समाप्त हो सकती है।
हर आधुनिक शहर की पहचान उसके हरित क्षेत्र से होती है। इसलिए नए सेक्टरों में पर्याप्त ग्रीन बेल्ट, पार्क, खुले मैदान और वृक्षारोपण के लिए स्थान सुरक्षित रखा जाना चाहिए। तेजी से बढ़ते प्रदूषण और घटते पर्यावरण संतुलन के बीच हरियाली ही नागरिकों को स्वस्थ जीवन प्रदान कर सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और युवाओं के लिए खुले और सुरक्षित सार्वजनिक स्थल किसी भी विकसित समाज की पहचान होते हैं।
इसके अतिरिक्त आवारा कुत्तों और बेसहारा पशुओं की समस्या पर भी गंभीरता से ध्यान देना होगा। आज अधिकांश शहरों में यह समस्या नागरिकों की सुरक्षा और स्वच्छता के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। यदि प्रारंभ से ही उचित प्रबंधन किया जाए, तो नई कॉलोनियों को इस समस्या से मुक्त रखा जा सकता है।
सफाई व्यवस्था को लेकर भी स्थायी और प्रभावी नीति आवश्यक है। नियमित सफाई कर्मियों की नियुक्ति, कचरा प्रबंधन प्रणाली और आधुनिक सीवरेज व्यवस्था को प्रारंभिक स्तर पर ही मजबूत बनाना होगा। स्वच्छ शहर ही स्वस्थ समाज की आधारशिला होते हैं।
पेयजल व्यवस्था भी इस योजना का महत्वपूर्ण भाग होना चाहिए। प्रत्येक सेक्टर में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु आधुनिक जल शोधन संयंत्र लगाए जाएं, ताकि नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिल सके। इसके साथ ही वर्षा जल निकासी की भूमिगत व्यवस्था इतनी सुदृढ़ हो कि बरसात के समय सड़कों पर जलभराव की समस्या उत्पन्न ही न हो।
यदि हरियाणा सरकार इस योजना को दूरदर्शिता, पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक के साथ लागू करती है, तो आने वाले वर्षों में हरियाणा देश के सबसे सुव्यवस्थित और आधुनिक राज्यों में शामिल हो सकता है। यह योजना केवल भवनों का निर्माण नहीं, बल्कि भविष्य के विकसित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर हरियाणा का निर्माण है।
-सुरेश गोयल धूप वाला