गजल-भारत मेरा काबुल नहीं बग़दाद नहीं है….-इकबाल हिंदुस्तानी

खुदग़र्जियां तो है मगर जेहाद नहीं है,

सब भूल गये हम हमें कुछ याद नहीं है।

 

बेमेल मुहब्बत का नतीजा ही तो ग़म है,

शीरीं तो हैं कर्इ मगर फ़रहाद नहीं है।

 

नेपाल है प्यारा हमें लंका भी पसंद है,

भारत मेरा काबुल नहीं बग़दाद नहीं है।

 

हम में से कोर्इ कुछ हो मुहाजिर तो नहीं है,

दिलवाली दिल्ली है इस्लामाबाद नहीं है।

 

अपनी बनार्इ जेल में तू भी तो जा के देख,

सेवक ही तो है देश का दामाद नहीं है ।

 

उनको तो छेड़ने की भी क़ीमत अदा हुयी,

हम क़त्ल भी हुए तो इमदाद नहीं है।

 

बर्बाद था बर्बाद है बर्बाद ही रहेगा,

वो शख़्स जिसको इल्मे अजदाद नहीं है।

 

बेटा ना सही बेटी भी है आंख का तारा,

जा पूछ जिसके घर औलाद नहीं है।

 

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