गजल:आप हम से मिले जिंदगी की तरह-इक़बाल हिंदुस्तानी

खिल उठी जिंदगी फिर कली की तरह,

आप हम से मिले जिंदगी की तरह।

 

जब उसे पा लिया हम ने चाहा जिसे,

ग़म भी लगने लगे खुशी की तरह।

 

ख़ास अंदाज़ हैं अपने जीने के भी,

दुश्मनी भी जो की दोस्ती की तरह।

 

चैन मिल पायेगा मेरे दिल को तभी,

मुझ पे छा जाइये चांदनी की तरह।

 

आपके मुंतज़िर हम हैं दीदार को,

लम्हा लम्हा लगे है सदी की तरह ।

 

जलके मरती रहीं आपकी बेगमें,

आप भी तो जलें अब सती की तरह।

 

सब धरी रह गयीं मौत की साज़िशें,

आप हम से मिले जिंदगी की तरह।

 

आप ने कर दिया एक पड़ौसी का खूं,

आप लगते नहीं आदमी की तरह।।

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