जय हो बाजार की!

0
182

डिस्काउंटों से भरे बाजारों , अखबारों में अखबारों से बड़े छपे विज्ञापनों को देख अब मुझे भीतर ही भीतर अहसास हो गया है कि हे राम ! तुम बनवास काट, घर के भेदी से लंका ढहवा अयोध्या की ओर लखन, सीता सहित कूच कर गए हो। और हम खालिस मध्यमवर्गीय तुम्हारे आने की खुषी में फटे झोले लिए बाजारों में सेल का माल खरीदने के लिए कतारों में खड़े हैं।

इनदिनों तुम्हारे आने का पता हमें तबही चलता है जब हमारे बाजारों में पितरों से पीछा छुड़ाने के बाद सेल एटम बंब के धमाके सी शुरू होती है। जिधर देखो सेल ! बस सेल! डिस्काउंट ही डिस्काउंट! बाजार का हर लाला है कि तुम्हारे आने की खुशी में घी के दीए जलाना छोड़ अपने पुराने सुराने, गले सड़े माल को औने पौने दाम पर निकालने के लिए सेल डिस्काउंट के सहारे उतारू है। देखो तो, तुम्हारे आने की खुशी में अबके भी बाजार कैसे शर्म हया छोड़ सजा है। वह चाहता है कि इससे पहले कि तुम आओ, बाजार से सेल में उसका सड़ा फड़ा माल बिन हाथों के भी हाथों हाथ उठ जाए और तुम्हारे चलने के लिए बाजार का रास्ता खुला मिले ताकि तुम बाजार में से मजे से अपने महलों की ओर जा सको। इसलिए उसने कमेटी वाले तक पटा लिए हैं।

देखो तो, बाजार से ही पता चला कि तुम सीता, लक्ष्मण और हनुमान सहित इस साल फिर लौट कर आ रहे हो तो मेरी पत्नी फिर पागल हो उठी है। इसलिए नहीं कि वह तुम्हारे स्वागत के लिए बेचैन है। वह तो इसलिए बौरार्इ है कि अब आएगा मजा सेल में अंट शंट माल की खरीददारी करने का! सोचती है, तुम्हारे आने से पहले जितना सेल का फायदा उठा लिया जाए, उठा लिया जाए। कल को क्या पता बाजार में सेल का माल मिले या न मिले। इधर तुम अयोध्या पहुंचे उधर सेल बंद!

वैसे तो वह साल भर खरीददारी को लेकर पागल ही रहती है। पर तुम्हारे लौट कर आने के दिनों में वह विशेष रूप से पागल हो जाती है। राम नाम की सेल है, लूट सके तो लूट! अंत काल पछताएगी जब सेल जाएगी उठ! मैं उसे बहुत समझाता हूं कि भागवान! अपने देश के बाजारों में किसी न किसी के आने, किसी न किसी के जाने पर सेल लगती ही रहती है,पर उसके पास कान हों तो वह सुने।

सच कहूं! अब हम मध्यमवर्गियों को तुम्हारे आने की खुशी उतनी नहीं होती जितनी तुम्हारे आने पर सेल लगने की होती है। तुम्हारे आने की खुशी में सेल के बहाने आटा दाल तक न खरीद पाने वाले भी सेल में बूट सूट तो खरीद ही लेते हैं! इसलिए कि कल दिन तुम ये न कहो कि मैं आया, पर मेरे आने की खुशी में हमने दो बरतन भी न खरीदे। तुम्हारे आने की खुशी में बाजार अपने नफे नुकसान को भूला भक्तों का उद्धार करने में जुट जाता है।

तुम्हारे आने की खुशी में नुक्कड़ों तक की टूटी रेहडि़यों पर भी सेल! लाले हैं कि खुद नंगी टांगों के खड़े हैं, पर तुम्हारे आने की खुशी में जनता को सेल में पाजामें लंगोटी के भाव दे पुण्य लूट रहे हैं। कहीं र्इमानदारी की सेल तो कहीं सच की सेल! कहीं नैतिकता के साथ मानवीय मूल्य फ्री में देने के आष्वासन तो कहीं त्याग के साथ सातिवक प्रेम फ्री । पर लोग हैं कि देश काल वातावरण को देख इन्हें उठाने को सेल में भी तैयार नहीं। बेइमानी, भ्रस्टाचार, छल, कपट खरीदने से फुर्सत हो तो तो इस ओर बेचारी देखे।

अब तुम्हारे आने के बारे में पंडित जी नहीं बताते, वे तो अपने यजमानों को छोड़ टीवी पर जा जमे हैं। अब बाजार से ही पता चलता है कि तुम आ रहे हो! वसंत के आने की सूचना कोयल नहीं देती, अब तो बाजार ही बताता है कि वसंत आ रहा है। होली आने की सूचना खिले फूल नहीं देते, बाजार ही देता है। बाजार को कुछ पता हो या न पर हमारे हर तीज त्यौहार का उसे पूरा पता है। देखा राम! बाजार हम लोगों की धार्मिक भावनाओं का कितना ध्यान रखता है? सच कहूं! आज की डेट में अगर बाजार न होता तो हम जैसे सांस्कृतिक तौर पर कभी के दिवालिए हो चुके होते!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

17,090 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress