व्यंग्य

यत्र तत्र,सर्वत्र फूफा

कस्तूरी दिनेश

अपना लोकतंत्र फूफा प्रधान है ! जिस दिशा में नजर दौड़ाइए, पूरा देश फूफाओं से भरा हुआ है ! सगाई हो,शादी हो,तेरहवीं हो,बरसी हो,राजनीति हो,ये हर जगह कण-कण में भगवान की तरह आसन जमाए मिलेंगे | जहां सारे आगन्तुक आयोजन के इन्तजाम से संतुष्ट दिखेंगे, वहाँ एक आदमी मुंह फुलाकर जरुर बैठा होगा,बस जान लो वही फूफा है ! संतुष्टि से उनकी जन्मजात दुश्मनी होती है ! अगर वह संतुष्ट दिखे तो समझ जाइए कि बन्दा फूफा है ही नहीं है ! वह कोई फूफा परम्परा को बदनाम करने वाला रंगा सियार है | ज्यादा हो तो उसके जीन की जांच करवा लीजिये, वह तुरंत पकड़ में आ जाएगा !  इस फूफा नामक जीव की खुशी के लिए लिए इन्द्रलोक की सारी सुविधाएं भी बेकार है !

उपरवाले ने जब से फूफा नामक इस जीव का धरती पर निर्माण किया है, तब से लेकर आज तक उसे किसी आयोजन में प्रसन्न नहीं देखा गया ! हिन्दू परम्परा में बच्चे रिश्ते में अपने पिता की बहन को बुआ और उसके पति को फूफा कहते हैं | सामाजिक जीवन में यह बहुत महत्वपूर्ण और वजनदार रिश्ता माना जाता है | किसी शादी ब्याह या मांगलिक कार्य के अवसर पर सबसे पहले इनकी ही अभ्यर्थना होती है ! यदि फूफा नाराज हो जाए तो समझो गई भैस पानी में ! उसे हरा-हरा चारा दिखाये बिना वह पानी से बाहर आने को तैयार नहीं होता ! जिस बंदे की बहन है तो वहाँ एक अदद फूफा होना ही होना है ! इस तरह देखें तो ये प्राय: हर परिवार में पाए जाने वाला एक ताकतवर घरेलू जीव है !

सामाजिक जीवन के अलावा राजनीति के दरबार में भी इनका चरण अंगद के पाँव की तरह धमाका मारे हुए है ! महिला आरक्षण से लेकर कोई भी जन कल्याणकारी विधेयक हो,मुमकिन है इन राजनीतिक फूफाओं की रजामंदी के बिना पास हो जाए ! सरकार एक मांगलिक विधेयक लाती है तो उसके विरुद्ध सौ फूफा खड़े हो जाते हैं !

राजनीति के अखाड़े में भिन्न-भिन्न प्रकार के फूफा पहलवान हैं ! कोई समाजवादी फूफा है तो कोई कांग्रेसी, कोई आम आदमी फूफा है तो कोई त्रिनमूली फूफा ! कोई राइटिस्ट है तो कोई लेफ्टिस्ट फूफा ! देश का पूरा संसद और राज्यों के विधान-सभा फूफा पहलवानों की गर्जना से कम्पायमान है !

भले ही ये फूफागण सत्ताधारी पार्टी को रावण लगें परन्तु इनके बिना लोकतंत्र की रामलीला पूरी होने वाली भी नहीं ! प्रजातंत्र का वन्दे भारत ट्रेन चलाना है तो फूफागणों को इसके फर्स्ट क्लास में मान-सम्मान के साथ बैठाना ही पड़ेगा, चाहे वे बन्दर की तरह फिजूल की कितनी भी उछल-कूद करें !