राजनीति

हरियाणा की भाजपा सरकारें कितनी सफल-विफल रहीं

कमलेश पांडेय

हरियाणा में भाजपा की सरकार (2014 से अब तक) का मूल्यांकन करते समय हमें इसके दो चरणों को देखना चाहिए—पहला, Manohar Lal Khattar का दौर (2014–2024) और दूसरा, Nayab Singh Saini का दौर (2024–वर्तमान)। चूंकि भाजपा ने यहां 2024 विधानसभा चुनाव जीतकर लगातार तीसरी बार सरकार बनाई, जो अपने आप में एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाती है। फिर भी सफलता-विफलता में चोली दामन का रिश्ता है, जो अक्सर साथ साथ चलती हैं। समझिए कैसे?

जहां तक भाजपा सरकार की प्रमुख सफलताएँ की बात है तो वह निम्नलिखित हैं:-

पहला, प्रशासनिक पारदर्शिता और डिजिटलीकरण: भाजपा सरकार ने भर्ती, सेवाओं और सरकारी योजनाओं के वितरण में डिजिटल प्रणालियों को बढ़ावा दिया। सरकार का दावा रहा कि इससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार में कमी आई तथा लाभार्थियों तक सीधे लाभ पहुँचाने की व्यवस्था मजबूत हुई। 

दूसरा, आधारभूत संरचना (Infrastructure): राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर तथा गुरुग्राम-एनसीआर क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के प्रयास भाजपा शासन की बड़ी उपलब्धियों में गिने जाते हैं। हरियाणा आज देश के प्रमुख औद्योगिक और ऑटोमोबाइल हब में शामिल है। 

तीसरा, किसान और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण: पीएम-किसान जैसी योजनाओं के तहत हरियाणा के लाखों किसानों को सीधे आर्थिक सहायता मिली। राज्य सरकार एमएसपी पर खरीद और किसानों को भुगतान के रिकॉर्ड का भी उल्लेख करती रही है। 

चौथा, सामाजिक समीकरणों में बदलाव: हरियाणा की राजनीति लंबे समय तक जाट-केंद्रित मानी जाती थी। भाजपा ने गैर-जाट, ओबीसी और अनुसूचित जाति वर्गों में अपना आधार मजबूत किया और इसी रणनीति के कारण लगातार चुनावी सफलता हासिल की। 

पांचवां, नई पहलें: नायब सिंह सैनी सरकार ने जल संरक्षण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वच्छ वायु परियोजना तथा पंचायतों को अधिक वित्तीय अधिकार देने जैसी योजनाओं पर काम शुरू किया है। 

जहां तक भाजपा सरकार की प्रमुख विफलताओं यानी कमजोरियाँ और आलोचनाएँ की बात है तो वह इस प्रकार हैं:-

पहला, बेरोजगारी: हरियाणा लंबे समय से युवाओं में बेरोजगारी को लेकर चर्चा में रहा है। विपक्ष का आरोप है कि उद्योग और निवेश बढ़ने के बावजूद पर्याप्त रोजगार सृजन नहीं हुआ। 

दूसरा, किसान आंदोलन का प्रभाव: 2020–21 के किसान आंदोलन में हरियाणा प्रमुख केंद्र रहा। इससे भाजपा सरकार और किसान समुदाय के एक हिस्से के बीच दूरी बढ़ी, जिसका राजनीतिक असर भी देखा गया।

तीसरा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक तनाव: जातीय एवं सामुदायिक तनाव, विशेषकर 2016 का जाट आरक्षण आंदोलन और बाद के कुछ हिंसक घटनाक्रम, सरकार की छवि पर प्रश्नचिह्न बने रहे।

चौथा, एनसीआर शहरों की समस्याएँ: गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में ट्रैफिक, जलभराव, प्रदूषण और शहरी अव्यवस्था को लेकर लगातार आलोचना होती रही है। कुछ नागरिक समूहों और ऑनलाइन चर्चाओं में भी यह असंतोष दिखाई देता है। 

पांचवां, सत्ता-विरोधी भावना (Anti-incumbency): 

लगातार 10 वर्ष सत्ता में रहने के कारण भाजपा को सत्ता-विरोधी माहौल का सामना करना पड़ा। इसी कारण 2024 में नेतृत्व परिवर्तन कर खट्टर के स्थान पर नायब सैनी को मुख्यमंत्री बनाया गया। 

जहां तक समग्र निष्कर्ष की बात है तो यदि 10 में अंक दिए जाएँ तो क्षेत्रवार अंक (10 में) निम्नलिखित होंगे:- 

प्रशासनिक सुधार में 8, आधारभूत संरचना में 8, निवेश आकर्षण में 8, कृषि समर्थन में 7, रोजगार में 5, कानून-व्यवस्था में 6, शहरी प्रबंधन में 6 और सामाजिक समावेशन

में 7. कुल मिलाकर हरियाणा की भाजपा सरकारों को “मध्यम से अच्छी सफलता” (लगभग 7/10) वाली सरकार कहा जा सकता है। जहां प्रशासनिक सुधार, डिजिटलीकरण और राजनीतिक स्थिरता इनके मजबूत पक्ष रहे हैं जबकि बेरोजगारी, किसान असंतोष और शहरी समस्याएँ इनके सामने सबसे बड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। 

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतना भाजपा की सबसे बड़ी सफलता है लेकिन शासन के पैमाने पर अगले कुछ वर्षों में रोजगार, कृषि और शहरी अवसंरचना की चुनौतियों का समाधान ही इसकी वास्तविक परीक्षा होगी।

कमलेश पांडेय