लेखक परिचय

अरुण तिवारी

अरुण तिवारी

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अरुण तिवारी


परसों खबर मिली कि विशेषज्ञ समिति ने माना है कि श्री श्री रविशंकर द्वारा गत् वर्ष यमुना पर किए आयोजन के कारण यमुना की क्षति हुई है। कल खबर मिली कि दिल्ली के जलसंसाधन मंत्री श्री कपिल मिश्रा ने विशेषज्ञ समिति के निष्कर्षों का मज़ाक ही नहीं उड़ाया, बल्कि श्री श्री को पुनः यमुना तट पर आयोजन हेतु आमंत्रित भी किया है। मज़ाक भी किसी प्राइवेट लिमिटेड विशेषज्ञ समिति का नहीं, बल्कि खुद भारत के सरकार के जलसंसाधन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति का उड़ाया गया है।

दुखद भी, अविश्वसनीय भी

मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि पर्यावरण विशेषज्ञ समिति का मज़ाक उड़ाने वाला यह शख्स वही है, जिसे मैने पर्यावरण के जाने-माने विशेषज्ञ स्व. श्री अनुपम मिश्र की अन्तिम संस्कार के मौके पर गांधी शांति प्रतिष्ठान से लेकर निगम बोध घाट तक हर जगह घंटों हाथ बांधे खड़ा देखा था। नई दिल्ली में आयोजित भारत नदी सप्ताह के मौके पर स्व. श्री अनुपम मिश्र की संगत करते इस शख्स का वक्तव्य सुनकर तब यह आभास ही नहीं हुआ था कि एक मंत्री की कथनी और कथनी में इतना फर्क भी हो सकता है। संभवतः यह आभास स्व. श्री अनुपम मिश्र को हमेशा से था। इसीलिए वे कहा करते थे कि सत्ता पाने पर अच्छे लोगों को भी राजरोग लग जाता है। वे राजरोगी हो जाते हैं। अनुपम होते तो शायद कहते – ”कपिल अच्छे आदमी है, लेकिन आप क्यों भूलते हैं कि वह राजरोगी भी हैं। राजरोगियों से जनयोग की अपेक्षा करना ही भूल है। जब राज जायेगा, राजरोग अपने आप चला जायेगा। अरुण भाई, थोड़ा तो इंतजार करो।”

पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पिछले साल श्री श्री रविशंकर की अगुवई में दिल्ली में विश्व सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया गया था। यह आयोजन मयूर फेज वन के सामने यमुना डूब क्षेत्र पर हुआ था। इसे लेकर यमुना जियो अभियान के श्री मनोज मिश्र ने राष्ट्रीय हरित पंचाट में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। आपत्तियों को महत्वपूर्ण मानते हुए हरित पंचाट ने आयोजकों को दोषी करार दिया था और एक विशेषज्ञ समिति को यह जिम्मा सौंपा था कि वह आकलन कर बताये कि यमुना पारिस्थितिकी को कितना नुकसान हुआ है और उसकी भरपाई में कितना खर्च व वक्त लगेगा। विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता भारत सरकार के जलसंसाधन मंत्रालय के सचिव शशिशेखर को सौंपी गई थी।

समिति आकलन

लंबा वक्त लगाने के बाद विशेषज्ञ समिति ने अपना आकलन पेश किया। समिति ने कहा कि विश्व सांस्कृतिक महोत्सव ने यमुना के डूब क्षेत्र को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। सबसे ज्यादा नुकसान उस जगह हुआ है, जहां विशाल स्टेज बनाया गया था। ऐसा अनुमान है कि यमुना नदी के पश्चिमी भाग के बाढ़ क्षेत्र में करीब 120 हेक्टेयर और पूर्वी भाग में करबी 50 हेक्टेयर बाढ़ क्षेत्र पारिस्थितिकीय रूप से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसे ठीक करने में दस साल का वक्त लगेगा। श्री श्री रविशंकर के इस कार्यक्रम से यमुना की पारिस्थितिकी को हुए भौतिक नुक़सानको ठीक करने में 28.73 करोड़ और जैविक नुकसान की भरपाई करने में 13.29 करोड़ रुपये लगेंगे।

जलमंत्री की प्रतिक्रिया

संवाददाता सूत्रों से दिल्ली के एक प्रतिष्ठित अखबार में छपी खबर के अनुसार, श्री कपिल मिश्रा ने इस निष्कर्ष का मज़ाक उड़ाया। श्री कपिल मिश्रा ने कहा – ”यह तो बिल्कुल वैसा ही है, जैसे कि विश्व सांस्कृतिक कार्यक्रम से पहले यमुना में डाॅल्फिन तैरती थी। विश्व भर से पर्यटक यहां अचंभे के तौर पर आते थे। उस समय श्री श्री आये…….उन्होने इसे इतनी क्षति पहुंचा दी कि उसे बहाल करने में दस साल का समय लग जायेगा।”

दुर्भाग्यपूर्ण है कि बतौर जलमंत्री श्री कपिल मिश्र जहां यमुना को पुनर्जीवित करने के लिए हरसंभव कोशिश करने की संकलप जता रहे थे, वह आज दिल्ली की यमुना में घुलित आॅक्सीजन की शून्य मात्रा का आंकड़ा पेश कर उसे नाला बताने में लगे हैं। कटे पर नमक यह श्री मिश्र ने कहा कि इस कार्यक्रम को यमुना तट पर बार-बार आयोजित होना चाहिए। इतना ही विशेषज्ञता और जनभावना के साथ-साथ न्यायपालिका और कार्यपालिका का भी एक तरह से मज़ाक ही उड़ा रहे हैं। यह राजरोग नहीं तो और क्या है ? काश कि यह झूठ हो; वरना् यह दुखद भी है और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के भविष्य को लेकर आत्मघाती भी।

One Response to “जलमंत्री कपिल मिश्रा को भी लगा राजरोग”

  1. अंकुश लट्ठ

    श्री श्री रविशंकर ने यह आयोजन सरकार के सभी संबंधित विभागों की पूर्वानुमति लेकर किया था। एनजीटी को अगर दोषी मानकर किसी को सजा देनी थी तो वह संबंधित विभाग और एजेंसियां हैं न कि आर्ट आफ लिविंग

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