लेखक परिचय

अरुण तिवारी

अरुण तिवारी

पानी प्रणय पक्ष 

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अरुण तिवारी आतुर जल बोला माटी से मैं प्रकृति का वीर्य तत्व हूं, तुम प्रकृति की कोख हो न्यारी। इस जगती का पौरुष मुझमें, तुममें रचना का गुण भारी। नर-नारी सम भोग विदित जस, तुम रंग बनो, मैं बनूं बिहारी। आतुर जल बोला माटी से…. न स्वाद गंध, न रंग तत्व, पर बोध तत्व है… Read more »

मैं देवदार का घना जंगल

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अरुण तिवारी मैं देवदार का घना जंगल, गंगोत्री के द्वार ठाड़ा, शिवजटा सा गुंथा निर्मल गंग की इक धार देकर, धरा को श्रृंगार देकर, जय बोलता उत्तरांचल की, चाहता सबका मैं मंगल, मैं देवदार का घना जंगल…. बहुत लंबा और ऊंचा, हिमाद्रि से बहुत नीचा, हरीतिमा पुचकार बनकर, खींचता हूं नीलिमा को, मैं धरा के… Read more »



युद्ध और शांति के बीच जल – भाग दो

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( प्रख्यात पानी कार्यकर्ता श्री राजेन्द्र सिंह के वैश्विक जल अनुभवों पर आधारित एक शृंखला ) सीरिया, दुष्काल के चंगुल में  प्रस्तुति : अरुण तिवारी 20 से 25 अक्तूबर, 2015 को टर्की के अंकारा में संयुक्त राष्ट्र संघ का एक सम्मेलन था। यह सम्मेलन, रेगिस्तान भूमि के फैलते दायरे को नियंत्रित करने पर राय-मशविरे के लिए… Read more »

युद्ध और शान्ति के बीच जल

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अरुण तिवारी प्रख्यात पानी कार्यकर्ता राजेन्द्र सिंह के वैश्विक जल अनुभवों पर आधारित एक शृंखला विश्व जल दिवस, 22 मार्च 2018 पर विशेष यह दावा अक्सर सुनाई पड़ जाता है कि तीसरा विश्व युद्ध, पानी को लेकर होगा। मुझे हमेशा यह जानने की उत्सुकता रही कि इस बारे में दुनिया के अन्य देशों से मिलने… Read more »

नीति नियोजन में मीडिया की भूमिका

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अरुण तिवारी इण्डिया हैबिटेट सेंटर, लोदी रोड, नई दिल्ली में एक त्रिदिवसीय आयोजन (07-09 फरवरी, 2018) हुआ। इस त्रिदिवसीय ‘इवेलफेस्ट – 2018’ के दूसरे दिन के अंतिम सत्र की चर्चा का विषय था : प्रमाण आधारित नीति नियोजन में मीडिया की भूमिका। आमंत्रण पाने पर मेरे मन में उठा सबसे पहला सवाल यही था कि… Read more »

नारी सबलता का सबल आयाम नयनों में आकाश औ मुट्ठी में कला

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विचार करें तो किसी संज्ञा-सर्वनाम के भीतर पहले से मौजूद सद्गुण, कौशल तथा वृति को उभारना… विकसित करना ही उसका असल सशक्तिकरण है… असली सबलता है। कहने का मकसद यह है कि यदि किसी अबला को सबला बनना अथवा बनाना हो, तो प्रयास उसके भीतर अंतनिर्हित सद्गुणों और मौलिक शक्तियों को उभारने की दिशा में… Read more »

कीटनाशक यानी ज़हरीली खेती : प्रतिबंध बेहतर या अनुदान ?

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अरुण तिवारी कीटनाशकों को लेकर एक फैसला, पंजाब के कृषि एवम् कल्याण विभाग ने बीती 30 जनवरी को लिया; दूसरा फैसला, 06 फरवरी को उत्तर प्रदेश की कैबिनेट ने। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने कीट रोग नियंत्रण योजना को मंजूरी देते हुए जैविक कीटनाशकों और बीज शोधक रसायनों के उपयोग के खर्च का 75 प्रतिशत तथा… Read more »

मेरी नदी यात्रा

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मेेरी जङें, उत्तर प्रदेश के जिला-अमेठी के एक गांव में हैं। मेरे गांव के दक्षिण से घूमकर उत्तर में फिर दर्शन देने वाली मालती नाम की नदी बहती है। जब भी गांव जाता हूं, इससे मुलाकात होती ही है। बचपन से हो रही है। दिल्ली में पैदा हुआ। पांचवीं के बाद सिविल लाइन्स में आई पी काॅलेज के… Read more »

मतदान के आगे भी है दायित्व

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25 जनवरी : भारतीय राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर विशेष एक वोट ने फ्रांस में लोकतांत्रिक सरकार का रास्ता प्रशस्त किया; एक वोट के कारण ही जर्मनी.. नाजी हिटलर के हवाले हो गया। यह एक वोट ही था, जिसने 13 दिन में ही अटल सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। एक वोट ने ही कभी… Read more »

क्यों नहीं रुक रही भ्रूण हत्या और लिंगभेद ?

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24 जनवरी – भारतीय राष्ट्रीय बालिका सशक्तिकरण दिवस पर विशेष लिंगानुपात में बराबरी का स्वप्न और सत्य लेखक : अरुण तिवारी क़ानूनी तौर पर अभी लिंग परीक्षण, एक प्रतिबंधित कर्म है। ”इसकी आज़ादी ही नहीं, बल्कि अनिवार्यता होनी चाहिए।” – श्रीमती मेनका गांधी ने बतौर महिला एवम् बाल विकास मंत्री कभी यह बयान देकर, भ्रूण हत्या रोक… Read more »