जिन्ना हाउस ध्वस्त होना ही चाहिए, आखिर भारत के विभाजन की निशानी है 

-निरंजन परिहार-

पाकिस्तान के राष्ट्रपिता मोहम्मद अली जिन्ना ने भारत के टुकड़े करने के लिए जिस जगह का उपय़ोग किया, वह जिन्ना हाउस एक बार फिर खबरों में है। इस बार उसे ध्वस्त करने की मांग की गई है। महाराष्ट्र में बीजेपी के वरिष्ठ विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा चाहते हैं कि भारत के विभाजन की याद दिलानेवाले जिन्ना हाउस को ध्वस्त करके उसकी जगह एक कल्चरल सेंटर का बनाना चाहिए। विधायक लोढ़ा ने जिन्ना हाउस को ध्वस्त करने की यह मांग विधानसभा में की। आज़ादी से पहले भारत के तीन टुकड़े करने का षड़यंत्र जिस जिन्ना हाउस में रचा गया,  वह षडयंत्र संपन्न इमारत,अब एनिमी प्रॉपर्टी एक्ट संसद में पास हो जाने के बाद यह सरकार की संपत्ति है। मोहम्मद अली जिन्ना ने जिस इमारत में बैठकर भारत के विभाजन करने का ताना बाना बुना, उसे ध्वस्त किये जाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं होना चाहिए। क्योंकि उसे देखकर देश के तीन टुकड़े होने की याद आती है, और इस तरह की याद किसी भी तरह से आनेवाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी नहीं हो सकती।

करीब दस साल तक जिन्ना हाउस में बैठकर भारत के तीन टुकड़े करवाने के बाद 15 अगस्त 1947 से पहले मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान चले गए। लेकिन उनके सपनों को पूरा करनेवाला यह उनका यह घर वे साथ नहीं ले जा सकते थे, सो जिन्ना हाउस मुंबई में ही रह गया। करीब 70 साल से जिन्ना हाउस उजाड़ पड़ा है। भारत की आजादी के साथ ही राजस्थान, पंजाब व कश्मीर से सटा इलाका पश्चिमी पाकिस्तान बना और पश्चिम बंगाल से सटा इलाका जो पाकिस्तान को दिया गया, वह जो अब बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है, वह पूर्वी पाकिस्तान बना। तब से लेकर जिन्ना हाउस पर कब्जे के लिए जिन्ना की बेटी दीना वाड़िया एवं उनके नाती नुस्ली वाडिया कई कोशिशें करते रहे हैं। लेकिन अब आखिरकार एनिमी प्रॉपर्टी एक्ट संसद में पास हो जाने के बाद जिन्ना के वारिसों का इस संपत्ति पर कानूनी अधिकार समाप्त हो गया है। वाडिया परिवार द्वारा जिन्ना हाउस पर अब अपना कब्जा बताने का कानूनी औचित्य ही नहीं हैं। जिस जिन्ना में बैठकर भारत के टुकड़े किये गए,  उस षड्यंत्र स्थल जिन्ना हाउस के टुकड़े टुकड़े करके वहां पर महाराष्ट्र की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर वहां पर महाराष्ट्र की अस्मिता को प्रकाशित करनेवाला एक कल्चरल सेण्टर स्थापित करने की मांग लोढ़ा ने की। महाराष्ट्र में लगातार पांचवी बार विधायक बने लोढ़ा अपनी राष्ट्रप्रेम एवं देशभक्ति के लिए जाने जाते हैं। लोढ़ा 25 साल पहले बांग्लादेश द्वारा भारत की तीन बीघा जमीन पर कब्जा करने के खिलाफ मुंबई में प्रदर्शन करके पहली बार खबरों में आए थे। कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन,  शहीदों का सम्मान, देवी देवताओं के अश्लील चित्रण का विरोध, अवैध कत्लखानों के खिलाफ मुहिम, साधु संतों पर हमलों का सख्त विरोध, हुक्का पार्लरों को बंद कराने की मुहिम, पाकिस्तानी घुसपैठ के विरोध में मुंबई में प्रदर्शन, रेसकोर्स में डेढ़ लाख लोगों के समक्ष ऐ मेरे वतन के लोगों गीत को पचास साल बाद फिर से लता मंगेशकर से गंवाना, शहीदों की विधवाओं एवं उनके परिवारों का सम्मान जैसे कार्यक्रमों का उनका लंबा इतिहास है। उनके द्वारा अब जिन्ना हाउस को ध्वस्त करने की मांग को भारत के सामान्य देशप्रेमी समाज की भावना के रूप में स्वीकारा जाना चाहिए।

वैसे भी  ऐतिहासिक इमारतें किसी भी समाज के लिए धरोहर मानी जाती हैं। लेकिन जिस जगह पर राष्ट्र के विभाजन की साझिश रची गई हो, उसे धरोहर तो किसी भी हाल में नहीं माना जा सकता। जिन्ना हाउस निश्चित रूप से भारत के दुखद विभाजन का प्रतीक है। दक्षिण मुंबई में सबसे महंगे इलाके मलबार हिल में भाऊसाहेब हीरे मार्ग पर स्थित जिन्ना हाउस सन 1936 में बनाया गया था। उस जमाने में इसके निर्माण पर कुल दो लाख रुपए की लागत आई थी। ब्रिटिशकालीन इंडो गोथिक स्टाइल के भवन निर्माण शैली में करीब 2.5 एकड़ जमीन पर निर्मित जिन्ना हाउसवास्तुकार क्लाउड बेटली के निर्देशन में बनाया गया था। सन 1944 से लेकर 1947 में भारत विभाजन तक जिन्ना ने इसी इमारत में देश के टुकड़े करने का षड़यंत्र रचा एवं जिन्ना ने महात्मा गांधी एवं जवाहर लाल नेहरू को भी कई बार इसी इमारत में बुलाकर बैठकें की थीं। इस तरह की दुखद यादों वाली इमारत जिन्ना हाउस को ध्वस्त किये जाने में कोई किसी को कोई आपत्ति भी नहीं होनी चाहिए। क्योंकि भारत में गांधी हाउस का तो महत्व है, लेकिन जिन्ना हाउस के बने रहने का क्या औचित्य ?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

17,162 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress