लेखक परिचय

राजीव रंजन प्रसाद (बीएचयू)

राजीव रंजन प्रसाद (बीएचयू)

शोध-छात्र प्रयोजनमूलक हिन्दी(पत्रकारिता) हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी

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राजीव रंजन प्रसाद

आज राहुल गाँधी का जन्मदिन है। पिछले साल ‘राहुल जन्मदिवस’ पूरे रूआब के साथ मना था। हमारे शहर वाराणसी में भी ‘केक’ कटे थे। अख़बार के कतरन बताते हैं कि 10-जनपथ पर जश्न का माहौल था। लेकिन इस साल स्थितियाँ पलटी मारी हुई दिख रही हैं। राहुल गाँधी मीडिया-पटल से लापता हैं। उन्हें जन्मदिन की बधाईयाँ देने वाले बेचैन हैं। आज के दिन मैंने उनके लिए एक स्क्रिप्ट लिखा है; ताकि वे जनता के सामने अपने जन्मदिन के मौके पर बाँच सके। अगर उनकी ख़बर लगे, तो यह स्क्रिप्ट आप उन्हें पढ़ा देना अवश्य:

‘‘प्यारे देशवासियों, योगगुरु रामदेव अपने किए की सजा भुगत रहे हैं। उन जैसों का यही हश्र होना चाहिए। बाबा रामदेव की मंशा ग़लत थी। वह सत्याग्रह के नाम पर लोकतंत्र को बंधक बनाना चाहते थे। दिल्ली पुलिस ने समय रहते नहीं खदेड़ा होता, तो बाबा रामदेव संघ के साथ मिलीभगत कर पूरे कानून-तंत्र की धज्जियाँ उड़ाकर रख देते। संघ और भाजपा से उनके रिश्ते कैसे हैं? यह देश की जनता जान चुकी है। जनता जागरूक है। वह भारतीय राजनीतिज्ञों का नस-नस पहचानती है।

इस देश के लिए मेरी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी ने जान दिए हैं। मेरे पिता ने अपना बलिदान दिया है। मेरी माँ ने प्रधानमंत्री पद का लोभ नहीं किया। सिर्फ इसलिए कि वे जनता के लिए बनी हैं। कांग्रेस पार्टी अकेली ऐसी पार्टी है जो सही और गलत में भेद करना जानती है। कांग्रेस जैसी जनसेवी पार्टी को आज बुरा कहने वाले खुद कहाँ दूध के धुले हैं? लूटेरों और अपराधियों की पार्टी है बसपा जिसका जंगलराज है यूपी में। भट्टा-पारसौल का उदाहरण मेरे सामने है। अगर मैं और मेरी पार्टी के लोग समय से इस गाँव का दौरा नहीं किए होते; अपनी बात को प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह के समक्ष नहीं रखते, तो शायद ही वहाँ घटित पुलिसिया जुल्म का भयावह चेहरा सामने आ पाता। शायद! ही बड़े पैमाने पर लोगों के मारे जाने तथा ग्रामीण औरतों के साथ हुए दुर्व्यवहार की ख़बर प्रकट हो पाती।

बिहार में भले ही कांग्रेस को जनता ने वोट नहीं दिया हो। लेकिन वहाँ की जनता ने कांग्रेस को नकारा नहीं है। कांग्रेस की साख आज भी बिहार में बेजोड़ है। अगली विधानसभा चुनाव में जनता हिसाब बराबर कर देगी। नितिश सरकार का कथित विकास का प्रोपोगेण्डा फेल होगा और प्रांतीय सत्ता में कांग्रेस बहुमत से काबिज होगी। बिहार में चल रहे भाजपा-जद(यू) गठबंधन को केन्द्र ने करोड़ों-करोड़ रुपयों का फंड भेजा है। नितिश सरकार अपने ग़िरबान में नहीं झाँकती है। विकास कार्य करने में वह खुद अक्षम है। ये पार्टियाँ अपने भीतर की बुराइयों से नहीं निपटना चाहती हैं। उल्टे कांग्रेस के ऊपर धावा बोलती हैं। यह जानते हुए कि कांग्रेस पार्टी देश की सबसे पुरानी पार्टी है। स्वाधीनता संग्राम में उसकी प्राथमिक भूमिका रही है। आजादी मिलनेे के बाद देश को औद्योगिक क्रांति, हरित क्रांति, श्वेत क्रांति से होते हुए संचार क्रांति के द्वार तक पहुँचाने वाली पार्टी कांग्रेस ही है। गौरवशाली परम्परा वाली इस पार्टी पर जनता को आज भी सबसे अधिक भरोसा है। मनमोहन सिंह जैसे ईमानदार छवि वाले नेता अन्य पार्टियों में शायद ही हों। भाजपा भी पाक-साफ नहीं है। बसपा, सपा, राजद, लोजपा, जद(यू) और वामदल कांग्रेस पार्टी से प्रतिस्पर्धा अवश्य करते हैं; लेकिन जनता हमारे साफ-सुथरी छवि के सादगीपसंद नेताओं को ही लायक समझती है।

तमाम आलोचनाओं, आरोपों और छींटाकशी के बावजूद कांग्रेस का कोई जोड़ नहीं है। आप ही सोचिए, गरीबों, मजदूरों, किसानों की पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अगर सही नहीं होती, तो जनता मुर्ख नहीं है जो उसे जनादेश सौंपती। उसके किए को सराहती और दुबारा-तिबारा संसद में पहुँचाने खातिर पूर्ण बहुमत प्रदान करती।

भाइयों, यूपी विधानसभा चुनाव में अगली बारी कांग्रेसियों की है। हमारी पार्टी को प्रचार की जरूरत नहीं है। हमें खुशी है कि प्रांतीय मोर्चा संभालने वाली प्रखर वक्ता और बुद्धिजीवी नेता रीता बहुगुणा जोशी जी हमारे साथ है। जनता उनकी आत्मीयता भरे मुसकान की कायल है। वे जमीन से जुड़ी हुई नेता हैं। उनके नेतृत्व में मिशन-2012 में कांग्रेस का प्रदेश की सत्ता पर सौ-फीसदी काबिज़ होना तय है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस ने जो भी काम किए हैं; सब के सब जमीन से जुड़े हैं। कांग्रेस पार्टी में जनता की अगाध निष्ठा है। क्योंकि कांग्रेस पार्टी आमआदमी की पार्टी है। उनके दुख-दर्द में हमेशा साथ रहने वाली पार्टी है।

जिस दिन योगगुरु रामदेव ने दिल्ली में कुहराम मचाया। मैं हतप्रभ रह गया। एक सामान्य मसले को जिस ढंग से गंभीर और भीषण मामला बनाने की षड़यंत्र रची गई। जनता की पार्टी को बदनाम करने की साजिश हुई। काले धन को ले कर भगवा पोशाक वालों ने ऐसा बवेला मचाया कि दिल्ली के सभ्य जनता को भारी कोफ्त हुई। जिस देश की राजधानी में सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से होता है। लोग रोजमर्रा की जिन्दगी में सुकून की सांसे लेते हैं। उस वातावरण को बाबा रामदेव के भीड़बाजों ने विषाक्त कर दिया। मेहनतकश दिल्लीवासियों की नींद हराम कर दी। यह तो अच्छा हुआ कि ‘हेल्दी दिल्ली’ का स्वप्न देखने वाली दिल्ली सरकार ने समय रहते ठोस कार्रवाई की। नौटंकीबाज बाबा रामदेव को रामलीला मैदान से बाहर निकाल फेंका। कई दिनों तक बाबा के ‘मीडिया सेटरों’ ने कांग्रेस पार्टी को लक्ष्य कर दिन-दिन भर जनभावना भड़काने वाले कथा बाँचें। इलेक्ट्रानिक माध्यम पर भौंडे ढंग से दिल्ली पुलिस की छवि खराब करने वाली ख़बरें प्रकाशित की जो कि अपने दायरे में एकदम सही और उपयुक्त कार्रवाई करने का ज़ज़्बा दिखाया है।

इस पूरे घटनाक्रम में देश बिल्कुल शांत रहा। कहीं कोई जुलूस-प्रदर्शन नहीं हुए। जनता में जनाक्रोश भी नहीं दिखा। दरअसल, विपक्षी पार्टियाँ कांग्रेस की सफेदी से डरती है। वे जानती हैं कि काला धन जैसा कोई मामला ही नहीं है। जिन लोगों के पैसे स्विस बैंकों में जमा है; उसकी छानबीन जारी है। कांग्रेस अगर भ्रष्ट होती, तो सुरेश कलमाड़ी, ए0 राजा और कनिमोझी जैसे भ्रष्टाचार का आरोप झेलते लोगों को जेल के सलाखों के पीछे नहीं डालती। कांग्रेस देश में बेहतर कल का निर्माण करना चाहती है। हर व्यक्ति को रोजगार देने को दृढ़संकल्प है। भूख, गरीबी, बीमारी, अकाल, सूखा, बाढ़, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वह ठोस प्रयास करने में जुटी है। ऐसी नेकनाम पार्टी को बदनाम करने पर तुली पार्टियों को जनता अवश्य सबक सिखाएगी। यह निश्चित है।

भाइयों, दिल्ली पुलिस की बहादुरी को दाद देनी होगी जिसने चंद घंटों में रामलीला मैदान से उन अराजक तत्त्वों को बाहर खदेड़ दिया जिसका लीडर खुले मंच से सशस्त्र सेना बनाने की बात करता है। कांग्रेस पार्टी ऐसी नहीं है। वह नीड़ का निर्माण करना चाहती है। सभी वर्ग के लोगों का उत्थान। कांग्रेस जाति तोड़ो अभियान का समर्थक है। धर्म और संप्रदाय के नाम पर फसाद करने वाली पार्टी नहीं है कांग्रेस।

हिन्दुस्तान की जनता को मालूम है कि बाकी पार्टियाँ झूठी हैं, मक्कार और लंपट है। इसीलिए कांग्रेस ही सत्ता का स्थायी हकदार है। कांग्रेस देसी जनसमर्थन वाली पार्टी है। इसके प्रायोजक पूँजीपति नहीं है। औधोगिक घरानों से चंदा-उगाही करना इस पार्टी को नहीं आता है। तभी तो, कांग्रेस अपने देश की जनपक्षधर हाथों पर भरोसा करते हुए शासन-व्यवस्था में बनी रहती है। यह छुपा तथ्य नहीं है कि कांग्रेस में नाजायज़ पैसों की आमद-आवक शून्य है। अधिकांश सांसद जमीनी सरोकार से जुड़े जमीनी लोग हैं। उनकी अर्जित संपति जनता का विश्वास है। हमारी पार्टी जनता के बीच काम करते हुए दिखना चाहती है। वह करोड़पति सांसदों से लदी-फदी पार्टी नहीं है। कांग्रेस महात्मा गाँधी की संतान है जिनका फ़लसफ़ा था-‘सादा जीवन, उच्च विचार।’ हम नाजायज ढंग से बटोरे गए सम्पति के खिलाफ हैं। ऐय्याशी हमारा जन-धर्म नहीं है। कांग्रेस पार्टी का एजेण्डा वैचारिक स्तर पर खुला है। हम ‘गाँधी जी के जंतर’ को ध्येय-वाक्य समझते हैं।

वहीं अन्य पार्टियों को देखिए, वे तो इसी में आकंठ डूबी हैं। उनका एक ही मकसद; येन-केन-प्रकारेण पैसा बनाना है। चाहे देश जाए जहन्नुम में। जबकि कांग्रेस हिन्दुस्तान को जन्नत बनाने का स्वप्न देखती है। जहाँ-जहाँ केन्द्र-प्रान्त का कांग्रेसी सह-अस्तित्व है; वहाँ विकास और समृद्धि का रौनक देख लीजिए। अंतर से साफ पता चल जाएगा कि कांग्रेस हिन्दुस्तान का सूरत बदलने में कितने जोर-शोर से जुटी है। कांग्रेस पार्टी चाहती है कि भारतीय राजनीति में कम लोग रहे, लेकिन अच्छे लोग रहें। सच्चे और ईमानदार लोग रहें। समझदार और युवा लोग रहें।

दरअसल, कांग्रेस समता की मूरत है। भाईचारा और बंधुत्व उसके रग-रग में प्रवाहित हैं। कांग्रेस शुरू से गंगा-यमुना तहजीब की हिमायती है। गरीबों पर जुल्म ढाने की हिमाकत देश की सभी छोटी-बड़ी पार्टियाँ करती हैं; अपवाद सिर्फ एक कांग्रेस है। कांग्रेसी कार्यकर्ता की ईमानदारी देख लोग दंग रह जाते हैं। आज भी सादगी इन पार्टी कैडरों के आचरण में कूट-कूट कर भरी है। लोग अपनापन के लहजे में कांग्रेस से अपने निकट सम्बन्धों का हवाला देते हैं। कांग्रेस इकलौती ऐसी पार्टी है जिसके आलाकमान से 10-जनपथ में मिलना आसान है। सोनिया जी त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। वे धैर्य से लोगों की पीड़ा और व्यथा सुनती हैं। उनके लिए तत्काल उपाय करती हैं। पिछले कई वर्षों से मनमोहन सिंह पर आरोप-दर-आरोप लगते रहे हैं। जबकि उन्होंने आज देश को क्या नहीं दिया है?

हम अपने शहर में मॉल और मल्टीप्लेक्स देख रहे हैं। सड़कों का नवीनीकरण और चौड़ीकरण होते देख रहे हैं। विद्युत की निरंतरता बनी हुई है सो अलग। अब गाँव के लोग भी टेलीविजन पर ‘वर्ल्ड कप’ और ‘आईपीएल’ देख रहे हैं। उनके लिए नरेगा-मनरेगा जैसे विकल्प हैं जो उन्हें किसी कीमत पर भूखों नहीं मरने दे सकते हैं। बच्चों की मुफ्त शिक्षा के अतिरिक्त उत्तम खाने का प्रबंध है। स्त्रियों में जागृति के लिए कांग्रेस ने कई दिलचस्प कार्यक्रम शुरू किए हैं। पंचवर्षीय योजनाओं में भारत हमेशा लक्ष्य के करीब पहुँचने में सफल रहा है।

कांग्रेस सादगीपसंद राजनीतिज्ञों को टिकट देता है। गुंडा, मवाली, अपराधी और हत्या के आरोपी कांग्रेसी दल में शामिल नहीं है। तमाम राजनीतिक उठापटक के बावजूद जनता कांग्रेस को ही चुनेगी। काला धन के मसले पर हवाई किला बाँधने वाली भाजपा और बसपा जैसी पार्टियों ने हमारे देश की धन-संपदा को बड़ी बेदर्दी से लूटा है। इन पार्टियों ने जल-जंगल और जमीन को विदेशी बाज़ार के हवाले कर दिया है। देश को गुलाम बनाने की संस्कृति भाजपा और बसपा ने ही सिरजा है। सपा भी सार्गिद है, लेकिन उसकी हैसियत उस जोड़ की नहीं है कि वह चुनावों में कोई मजबूत तोड़ पैदा कर सके। ऐसे में कांग्रेस ही इन साम्प्रदायिक ताकतों और बुर्जुआ पार्टियों के मुख़ालफत में सही विकल्प हो सकती है। कांग्रेस को यदि देश के अल्पसंख्यक बिन मांगे वोट देते हैं, तो सिर्फ इन वजहों से कि कांग्रेस अपनी विचारधारा में सर्वाधिक निरपेक्ष और दृष्टिसम्पन्न पार्टी है।

अतः बाबा रामदेव के खिलाफ की गई कार्रवाई सही है। मैं चुप था, क्योंकि देश की जनता जान रही थी कि यह सारा मामला प्रायोजित है। बाबा रामदेव के अनुयायियों के माध्यम से देश की सबसे विश्वसनीय पार्टी को बदनाम करने की साजिश है। यह वह तरीका है जिससे देश में हो रहे अच्छे कामों से ध्यान भटकाया जा सके। जनता के भीतर फैल रहे संतोष और प्रसन्नता को झुठलाया जा सके। लेकिन यह कहने की बात नहीं है कि देश की जनता कांग्रेस को छोड़कर किसी दूसरे पार्टी के बारे में बात करना तो दूर कल्पना भी नहीं करती है। कांग्रेस को यह भली-भाँति पता है कि जिस तरह रामलीला मैदान में दिल्ली पुलिस ने बाबा रामदेव को उनकी औकात बता दी है; वैसे ही अगर जनता चाह गई तो कांग्रेस किला भी ढूह में बदल जाएगी। लेकिन ऐसा जनता करना क्यों चाहेगी? यह प्रश्न अतिमहत्त्वपूर्ण है।’’

7 Responses to “19 जून, जन्मदिन और राहुल गाँधी”

  1. om prakash shukla

    राहुल गाँधी जैसा बुध्दिहीन राजनेता इतनी लम्बी तकरीर पढ़ ही नहीं सकता और ऐसा प्रतीत होता है कि नेहरू खानदान की लुटिया डुबोने में सालो से सोनिया की तानाशाही व्यवहार से पीड़ित कोंग्रेसी अपना बदला निकल रहे है और पार्टी को इटालियन परिवार से मुक्त कराने का प्रयास कर रहे है क्योकि कितनी पीढ़िया चापलूसी करते अपने बाप-दादों की दुर्दशा देख कर ही अपना दिग्ग्विजयी गली गलुओज से उत्तर प्रदेश को जो राहुल गाँधी की प्रतिभा देखना चाहता था उसे नंगे रूप में प्रस्तुत कराने का महँ कार्य जिससे राहुल गाँधी का प्रधान मंत्री करीब-करीब नामुमकिन हो चूका है.
    वैसे चापलूस शिरोमधि लेखक महोदय को शायद यह भी नहीं ज्ञात है कि देश में जन्मदिन मानना वह भी एक पारसी,क्रिश्चियन,और तथाकथित हिन्दू के लिए न तो धार्मिक रूप से उचित है और नहीं ऐयाशी के लिहाज से नहीं तो दलितों के यहाँ खाने का ढोग बेनकाब हो जय्रेगा महोदय आपकी भादुअगिरी से युक्त भाषद पढ़ने का समय है न ही काबिलियत कुछ और कराने का प्रयास करे क्योकि राहुल गाँधी का जूता उठाने का कार्य भी महाराष्ट्र के गृहराज्य मंत्री सुरचित कर चुके है अब तो आप जैसे चप्जुसो के लिए संडास की _सफाई ही बाकि है क्योकि इंदिरा गाँधी के यहाँ कप-पलट साफ करने से एक महिला देश के सबसे बड़े पद को सुशोभित कर चुकी है ऐसा मई नहीं राजस्थान के एक मंत्री महोदय का बयान था जिसे मंत्री पद से रुखसत होना पड़ा लेकिन आप निरुत्सहिटी न हो क्यों कि उन महोदय को फिर से मंत्री पद से नवाजा गया अब तो आप अच्छी तरह समझ गए होगे कि क्यों राहुल गाँधी चापलूसों को झिड़कते रहते है लेकिन उनके अतिरिक्त कोई उन्हें भाव देने को तययर नहीं यह तो बहुत नाइंसाफी है बाकि आप खुद काफी समझदार है आपने संजी गाँधी से ले कर सोनिया गाँधी के मम्मी-पापा यानि राहुल गाँधी के नाना और मौसी से भी सम्बंधित जानकारी रखते होगे कोई बात बुरी लगी हो तो अनपढ़ जानकर माफ़ कर दिजियेर्गा.

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  2. आर. सिंह

    आर.सिंह

    अगर प्रवक्ता के सम्पादक इस लेख की कैटेगरी राजनीति से बदल कर व्यंग कर दें तो शायद पाठकों के लिए अधिक सहूलियत हो जाए और श्री प्रसाद भी चारणों की श्रेणी यानी श्री दिग्विजय सिंह के खेमे से बाहर आ जाएँ,क्योंकि ऐसे भी दिग्विजय सिंह चारण दल के निर्विवाद नेता हैं और फिल हाल उस दिशा में उनका प्रतिद्वंदी होने योग्य कोई दिख नहीं रहा है.

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  3. ajit bhosle

    मेहनतकश दिल्ली वासी, हेल्दी दिल्ली, शान्ति-प्रिय दिल्ली, साफ़-सुथरी कांग्रेस, कांग्रेसियों की ईमानदारी, लगता है लेखक के द्वारा लिखे गए वाक्यों को पढ़कर ऐसा लगता है की राजाओं की चापलूसी करने वाले भाट और चारणों का पुनर्जन्म हो गया है.

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  4. AJAY

    rahul, हम hai pata hai ki congress ? pm ko lokpal kai dayrai mai nahi लाना चाहती, ? ki manmohan ji to intjar kar rahai hai app rajgadi sopnai kai liye, फिर जब app pardhan mantri bano gai to phas jaogai ! you bhata parsol jaa sakto ho, delhi mai जब atyachar kiya, tab you kaha tha, modi ji पर निशाना kartai ho ? जब तुम्हारे bap nai sikho पर atyachar kiye uska ? करे !

    MERE BHARAT MAHAN KA VO BAHUT MANHUS DIN HOGA, JIS DIN QAVATROCHI KA BHANGA IS DESH KA PARDHAN MANTRI BANAIGA ?????????????????

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  5. Raj

    राहुल घंधी के भासन से कुछ पता नहीं चला उसका भाषण बिलकुल विरोधाभासी है , वैसे भी राहुल जैसे मंद बुद्दी प्राणी से क्या उम्मीद की जा सकती है वो दिल्ली मैं बैठ कर कुछ भी मुह फाड़ता रहता है रामलीला मैदान मैं जो हुआ उसको सरे देश ने देखा है देश की जनता को मुर्ख समाज रहे है कांग्रेस के युवराज होर्लिक्स पिलाओ मंद भुधि को ४१ वर्ष के मानसिक अविकसित बच्चे को

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  6. आर. सिंह

    आर.सिंह

    ऐसे आपके इस लेख का अच्छा प्रभाव पड़ा है और शायद सर्व प्रथम आपका यह लेख दिग्विजय सिंह ने पढ़ा है.आज (२०.०६२०११)सबेरे सबेरे जब अखबार उठाया तो देखा की बड़े बड़े अक्षरों में लिखा है की समय आ गया है की राहुल जी को प्रधान मंत्री का पद सम्हाल लेना चाहिए.ऐसे राजा से चारण बनने में दिग्विजय सिंह ने एक बात का ख़ास ख्याल रखा है की अपने आकाओं की विरुदावली गाने में वे किसी से पीछे तो नहीं हो रहें हैं और इस मामले में सचमुच में वे हमेशा प्रथम पंक्ति में नजर आते हैं.लगता है की दिग्विजय सिंह को भी कांग्रेस के अगले चुनाव में विजय के बारे में संदेह हो गया है,अत: वे चाहते हैं की भारतीय साम्राज्य जल्द से जल्द उसके असली उतराधिकारी के सुपुर्द हो जाये.ऐसे मनमोहन सिंह को भी समझ लेना चाहिए की युवराज अब प्रौढ़ हो गया है और बिना हीला हवाला सत्ता जल्द ही उसके हाथों में सौंप देनी चाहिए.सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत समस्त गांधी परिवार जिसमे प्रियंका ,वडेरा आदि आदि शामिल हैं उनको गांधी परिवार की अनुपस्थिति में साम्राज्य को अच्छी तरह सम्हालने के लिए पुरस्कृत भी करेगा,ऎसी उम्मीद की जा सकती है.दिग्विजय सिंह का सपना तभी पूरा होगा और बाद में वे जिन्दगी के बचे हुए साल सुखपूर्वक उनकी सेवा में गुजार सकेंगे.

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