लेखक परिचय

सुरेश चिपलूनकर

सुरेश चिपलूनकर

लेखक चर्चित ब्‍लॉगर एवं सुप्रसिद्ध राष्‍ट्रवादी लेखक हैं।

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-सुरेश चिपलूनकर

हाल ही में केरल के थोडुपुझा में एक कॉलेज के प्रोफ़ेसर टीजे जोसफ़ पर कुछ मुस्लिम आतंकियों ने दिनदहाड़े हमला किया और उनके हाथ काट दिये। जैसा कि सभी जानते हैं यह मामला उस समय चर्चा में आया था, जब प्रोफ़ेसर जोसफ़ ने कॉलेज के बी कॉम परीक्षा में एक प्रश्नपत्र तैयार किया था जिसमें “मुहम्मद” शब्द का उल्लेख आया था। चरमपंथी मुस्लिमों का आरोप था कि जोसफ़ ने जानबूझकर “मोहम्मद” शब्द का उल्लेख अपमानजनक तरीके से किया और इस वजह से “उन्मादी भीड़ के रेले” ने उन्हें “ईशनिंदा” का दोषी मान लिया गया।

जिस दिन यह प्रश्नपत्र आया था, उसी दिन शाम को थोडुपुझा में मुस्लिम संगठनों ने सड़कों पर जमकर हंगामा और तोड़फ़ोड़ की थी, तथा कॉलेज प्रशासन पर दबाव बनाने के लिये राजनैतिक पैंतरेबाजी शुरु कर दी थी। केरल में पिछले कई वर्षों से या तो कांग्रेस की सरकार रही है अथवा वामपंथियों की, और दोनों ही पार्टियाँ ईसाई और मुस्लिम “वोट बैंक” का समय-समय पर अपने फ़ायदे के लिये उपयोग करती रही हैं (क्योंकि हिन्दू वोट बैंक नाम की कोई चीज़ अस्तित्व में नहीं है)। फ़िलहाल केरल में वामपंथी सत्ता में हैं, जिनके “परम विद्वान मुख्यमंत्री” हैं श्री अच्युतानन्दन (याद आया? जी हाँ, वही अच्युतानन्दन जिन्हें स्वर्गीय मेजर उन्नीकृष्णन के पिता ने घर से बाहर निकाल दिया था)।

पहले समूचे घटनाक्रम पर एक संक्षिप्त नज़र – थोडुपुझा के कॉलेज प्रोफ़ेसर जोसफ़ ने एक प्रश्नपत्र तैयार किया, जो कि विश्वविद्यालय के कोर्स पैटर्न और पाठ्यक्रम पर आधारित था, उसमें पूछे गये एक सवाल पर केरल के एक प्रमुख मुस्लिम संगठन NDF ने यह कहकर बवाल खड़ा किया गया कि इसमें “मुहम्मद” शब्द का अपमानजनक तरीके से प्रयोग किया गया है, तोड़फ़ोड़-दंगा-प्रदर्शन इत्यादि हुए। जहालत की हद तो यह है कि जिस प्रश्न और मोहम्मद के नामोल्लेख पर आपत्ति की गई थी, वह कोई टीजे जोसफ़ का खुद का बनाया हुआ प्रश्न नहीं था, बल्कि पीटी कुंजू मोहम्मद नामक एक CPM विधायक की पुस्तक “थिरकाथायुडु नीथीसास्त्रम” (पेज नम्बर 58) से लिया गया एक पैराग्राफ़ है, कुंजू मोहम्मद खुद एक मुस्लिम हैं और केरल में “मोहम्मद” नाम बहुत आम प्रचलन में है। प्रख्यात अभिनेता ममूटी का नाम भी मोहम्मद ही है, ऐसे में प्रश्न पत्र में पूछे गये सवाल पर इतना बलवा करने की जरूरत ही नहीं थी, लेकिन “तालिबान” को केरल में वामपंथियों और चर्च को अपनी “ताकत” दिखानी थी, और वह दिखा दी गई।

आये दिन जमाने भर की बौद्धिक जुगालियाँ करने वाले, जब-तब सिद्धान्तों और मार्क्स के उल्लेख की उल्टियाँ करने वाले…… लेकिन हमेशा की तरह मुस्लिम वोटों के लालच के मारे, वामपंथियों ने पहले प्रोफ़ेसर टीजे जोसफ़ को निलम्बित कर दिया, फ़िर भी मुसलमान खुश नहीं हुए… तो प्रोफ़ेसर के खिलाफ़ पुलिस रिपोर्ट कर दी… पढ़ाई-लिखाई करने वाले बेचारे प्रोफ़ेसर साहब घबराकर अपने रिश्तेदार के यहाँ छिप गये, तब भी मुसलमान खुश नहीं हुए, तो जोसफ़ को गिरफ़्तार करने के लिये दबाव बनाने के तहत उनके लड़के को पुलिस ने उठा लिया और थाने में जमकर पिटाई की, बेचारे प्रोफ़ेसर ने आत्मसमर्पण कर दिया, मामला न्यायालय में गया, जहाँ से उन्हें ज़मानत मिल गई, लेकिन वामपंथी सरकार द्वारा इतने “सकारात्मक प्रयास” के बावजूद मुसलमान खुश नहीं हुए। वे लोग तभी खुश हुए, जब उन्होंने “शरीयत” कानून के तहत प्रोफ़ेसर के हाथ काटने का फ़ैसला किया, और जब प्रोफ़ेसर अपने परिवार के साथ चर्च से लौट रहे थे, उस समय इस्लामिक कानून के मानने वालों ने वामपंथी सरकार को ठेंगा दिखाते हुए प्रोफ़ेसर पर हमला कर दिया, उन्हें चाकू मारे और तलवार से उनका हाथ काट दिया और भाग गये……

अब वामपंथी सरकार के शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि “मामला बहुत दुखद है, किसी को भी कानून अपने हाथ में नही लेने दिया जायेगा…”। जबकि देश में ईसाईयों पर होने वाले किसी भी “कथित अत्याचार” के लिये हमेशा भाजपा-संघ-विहिप और मोदी को गरियाने वाले एवेंजेलिस्ट चर्च की बोलती, फ़िलहाल इस मामले में बन्द है। मुस्लिम वोटों के लिये घुटने टेकने और तलवे चाटने की यह वामपंथी परम्परा कोई नई बात नहीं है, तसलीमा नसरीन के मामले में हम इनका दोगलापन पहले भी देख चुके हैं और भारत के भगोड़े, कतर के नागरिक एमएफ़ हुसैन के मामले में भी वामपंथियों और सेकुलरों ने जमकर छातीकूट अभियान चलाया था। अब यदि एक प्रश्नपत्र में सिर्फ़ मोहम्मद के कथित रुप से अपमानजनक नाम आने पर जब एक गरीब प्रोफ़ेसर के हाथ काटे जा सकते हैं, उसके लड़के की थाने में पिटाई की जा सकती है, उसे नौकरी से निलम्बित किया जा सकता है… तो सोचिये दुर्गा-सरस्वती और सीता-हनुमान के अपमानजनक चित्र बनाने वाले एमएफ़ हुसैन के कितने टुकड़े किये जाने चाहिये? लेकिन हिन्दुओं का व्यवहार अधिकतर संयत ही रहा है, इसलिये MF हुसैन को यहाँ से सिर्फ़ लात मारकर बाहर भगाया गया, उसे सलमान रुशदी की तरह दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ी।

इस मामले में पुलिस की जाँच में यह बात सामने आई है और NDF के एक “कार्यकर्ता”(??) अशरफ़ ने बताया कि केरल के अन्दरूनी इलाकों में चल रही तालिबानी स्टाइल की कोर्ट “दारुल खदा” ने “आदेश” दिया था कि न्यूमैन कॉलेज के मलयालम प्रोफ़ेसर के हाथ काटे जायें और इसे अंजाम भी दिया गया (भारत का कानून गया तेल लेने…) यहाँ पढ़ें http://news.rediff.com/report/2010/jul/07/islamic-court-ordered-chopping-of-profs-palm.htm। अशरफ़ ने पुलिस को बताया कि पापुलर फ़्रण्ट (यानी NDF) केरल के मुस्लिमों के पारिवारिक मामलों को भी “दारुल खदा” के माध्यम से निपटाने में लगा हुआ है तथा मुस्लिमों से “आग्रह”(?) किया जा रहा है कि अपने विवादों के निराकरण के लिये वे भारतीय न्यायालयों में न जाकर “दारुल खदा” में आयें। हमेशा की तरह सुलझे हुए तथा शांतिप्रिय मुसलमान चुप्पी साधे हुए हैं, क्योंकि चरमपंथी हमेशा उन्हें धकियाकर मुद्दों पर कब्जा कर ही लेते हैं, जैसा कि शाहबानो मामले में भी हुआ था। हालांकि केरल की “भारतीय मुस्लिम लीग” ने इस घटना की निंदा की है, लेकिन यह सिर्फ़ दिखावा ही है।

केरल में इस्लामिक उग्रवाद तेजी से बढ़ रहा है, जब यह बात संघ-विहिप कहता था तब “सेकुलर जमात” उसे हमेशा “दुष्प्रचार” कहकर टालती रही है, लेकिन आज जब केरल में “तालिबान” अपना सिर उठाकर खुला घूम रहा है, तब मार्क्स के सिद्धांत बघारने वाले तथा उड़ीसा में रो-रोकर अमेरिका से USCIRF को बुलाकर लाने वाले, ईसाई संगठन दुम दबाकर भाग खड़े हुए हैं। एवेंजेलिस्ट ईसाई भले ही सारी दुनिया में मुसलमानों के साथ “क्रूसेड” में लगे हों, लेकिन भारत में इन्होंने हमेशा “हिन्दू-विरोधी” रुख अपनाये रखा है, चाहे वह मुस्लिमों से हाथ मिलाना हो, या नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलियों से गठजोड़ का मामला हो… या फ़िर मिजोरम और नागालैण्ड जैसे राज्य जहाँ ईसाई बहुसंख्यक हैं वहाँ से अल्पसंख्यक हिन्दुओं को भगाने का मामला हो… हमेशा एवेंजेलिस्ट ईसाईयों ने हिन्दुओं के खिलाफ़ “धर्म-परिवर्तन” और हिन्दू धर्म के दुश्मनों के साथ हाथ मिलाने की रणनीति अपना रखी है।

अब केरल में पहली बार उन्हें इस्लामिक चरमपंथ की “गर्माहट अपने पिछवाड़े में” महसूस हो रही है, तो उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि जिन वामपंथियों को ईसाई संगठन “अपना” समझते थे, अचानक ये लोग अब्दुल मदनी जैसे व्यक्ति के साथ क्यों दिखाई देने लगे हैं? केरल के ईसाईयों को यह वास्तविकता स्वीकार करने में मुश्किल हो रही है कि उनके जिस “वोट बैंक” का उपयोग वामपंथियों ने किया, वही उपयोग अब “दूसरे पक्ष” का भी कर रहे हैं। वे सोच नहीं पा रहे कि बात-बात पर हिन्दू संगठनों को कोसने की आदत कैसे बदलें, क्योंकि इस्लामिक संगठनों की आक्रामकता के सामने “सेकुलरिज़्म” नाम की दाल गलती नहीं है।

पिछले कुछ वर्षों से उत्तरी केरल के क्षेत्रों में मुस्लिम चरमपंथी, अब ईसाईयों पर हमले बढ़ाने लगे हैं, क्योंकि तीसरी पार्टी यानी “हिन्दू” तो गिनती में ही नहीं हैं या “संगठित वोट बैंक” नहीं है। खुद ईसाई संगठन अपने न्यूज़लेटर मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में “लव जेहादियों” ने हजारों ईसाई लड़कियों को प्रेमजाल में फ़ाँसकर उन्हें या तो मुस्लिम बनाया अथवा उन्हें खाड़ी देशों में ले भागे, इसके बावजूद अभी भी एवेंजेलिस्ट ईसाई, हिन्दुओं को अपना प्रमुख निशाना मानते हैं। “धर्म प्रचार” के बहाने अपनी जनसंख्या और राजनैतिक बल बढ़ाने में लगे ईसाई संगठन खुद से सवाल करें कि दुनिया में किस इस्लामी देश में उन्हें भारत की तरह “धर्म-प्रचार”(?) की सुविधाएं हासिल हैं? कितने इस्लामी देशों में वहाँ के “अल्पसंख्यकों” (यानी ईसाई या हिन्दू) के साथ मानवीय अथवा बराबरी का व्यवहार होता है?

यह बात पहले भी कई-कई बार दोहराई जा चुकी है कि हर उस देश-प्रान्त-जिले में जहाँ जब तक मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं, तब तक वे “बहुलतावाद”, “सहिष्णुता” और “गंगा-जमनी” आदि की बातें करते हैं, लेकिन जैसे ही वे बहुसंख्यक होते हैं, तत्काल वहाँ के स्थानीय अल्पसंख्यकों पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाने लगते हैं, उन्हें परेशान करने लगते हैं। हमारे सामने पाकिस्तान, बांग्लादेश, सूडान, सऊदी अरब जैसे कई उदाहरण हैं। एक उदाहरण देखिये, यदि सऊदी अरब के इस्लामिक कानून के मुताबिक किसी व्यक्ति की अप्राकृतिक मौत होती है तो उसके परिवार को मिलने वाली मुआवज़ा राशि इस प्रकार है, यदि मुस्लिम है तो 1 लाख रियाल, यदि ईसाई है अथवा यहूदी है तो 50,000 रियाल तथा यदि मरने वाला हिन्दू है तो 6,666 रियाल (सन्दर्भ : http://resistance-to-totalitarianism.blogspot.com/2010/05/koran-says-muslims-and-non-muslims-are.html) ऐसे सैकड़ों उदाहरण दिये जा सकते हैं जहाँ मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में हिन्दुओं के साथ असमान व्यवहार और अत्याचार आम बात है। इस्लाम को और गहराई से समझने के लिये ऊपर दिये गये ब्लॉग के साइड बार में उल्लेखित पुस्तक Islamic Jihad:A Legacy of Forced conversion, Slavery and Imperialism लेखक – MA Khan पढ़ें। इसकी ई-बुक भी उसी ब्लॉग से डाउनलोड की जा सकती है।

वामपंथी तो मुस्लिम वोटों के लिये कहीं भी लेटने को तैयार रहते हैं, क्योंकि उनकी निगाह में “हिन्दू वोटों” की बात करना ही साम्प्रदायिकता(???) है, बाकी नहीं। 30 साल तक पश्चिम बंगाल में यही किया और अब वहाँ ममता बैनर्जी और इनके बीच में होड़ लगी है कि, कौन कितनी अच्छी तरह से मुसलमानों की तेल-मालिश कर सकता है, उधर केरल में प्रोफ़ेसर जोसफ़ के साथ हुए “सरकारी व्यवहार” ने इस बात की पुष्टि कर दी है, कम से कम केरल में ईसाईयों की आँखें तो अब खुल ही जाना चाहिये…

19 Responses to “वामपंथियों और एवेंजेलिस्ट ईसाईयों को सबक सिखाती, केरल की बर्बर घटना…”

  1. ajay jamdar

    सुरेश जी आप के लेख को पढने के बाद खून खोल जाता है, उम्मीद करता हूँ की आपके लेख पढ़ कर हिन्दुओ का पुरुषार्थ (मर्दानगी) जाग जाये.

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  2. Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'

    !! प्रवक्ता.कॉम के पाठकों से पाठकों से विनम्र अपील !!

    आदरणीय सम्पादक जी,

    आपके माध्यम से प्रवक्ता.कॉम के सभी पाठकों से विनम्रतापूर्वक अनुरोध/अपील करना चाहता हूँ कि-

    1- इस मंच पर हम में से अनेक मित्र अपनी टिप्पणियों में कटु, अप्रिय, व्यक्तिगत आक्षेपकारी और चुभने वाली भाषा का उपयोग करके, एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

    2- केवल इतना ही नहीं, बल्कि हम में से कुछ ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सम्पादक की नीयत पर भी सन्देह किया है। लेकिन जैसा कि मैंने पूर्व में भी लिखा है, फिर से दौहरा रहा हूँ कि प्रवक्ता. कॉम पर, स्वयं सम्पादक के विपरीत भी टिप्पणियाँ प्रकाशित हो रही हैं, जबकि अन्य अनेक पोर्टल पर ऐसा कम ही होता है। जो सम्पादक की नीयत पर सन्देह करने वालों के लिये करार जवाब है।

    3- सम्पादक जी ने बीच में हस्तक्षेप भी किया है, लेकिन अब ऐसा लगने लगा है कि हम में से कुछ मित्र चर्चा के इस प्रतिष्ठित मंच को खाप पंचायतों जैसा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। मैं उनके नाम लेकर मामले को बढाना/तूल नहीं देना चाहता, क्योंकि पहले से ही बहुत कुछ मामला बढाया जा चुका है। हर आलेख पर गैर-जरूरी टिप्पणियाँ करना शौभा नहीं देता है।

    4- कितना अच्छा हो कि हम आदरणीय डॉ. प्रो. मधुसूदन जी, श्री आर सिंह जी, श्री श्रीराम जिवारी जी आदि की भांति सारगर्भित और शालीन टिप्पणियाँ करें, और व्यक्तिगत टिप्पणी करने से बचें, इससे कुछ भी हासिल नहीं हो सकता। कम से कम हम लेखन से जुडे लोगों का उद्देश्य तो पूरा नहीं हो सकता है। हमें इस बात को समझना होगा कि कोई हमसे सहमत या असहमत हो सकता है, यह उसका अपना मौलिक अधिकार है।

    5- समाज एवं व्यवस्था पर उठाये गये सवालों में सच्चाई प्रतीत नहीं हो या सवाल पूर्वाग्रह से उठाये गये प्रतीत हों तो भी हम संयमित भाषा में जवाब दे सकते हैं। मंच की मर्यादा एवं पत्रकारिता की गरिमा को बनाये रखने के लिये एकदम से लठ्ठमार भाषा का उपयोग करने से बचें तो ठीक रहेगा।

    6- मैं माननीय सम्पादक जी के विश्वास पर इस टिप्पणी को उन सभी लेखों पर डाल रहा हूँ, जहाँ पर मेरी जानकारी के अनुसार असंयमित भाषा का उपयोग हो रहा है। आशा है, इसे प्रदर्शित किया जायेगा।

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  3. डॉ. राजेश कपूर

    Dr. Rajesh Kapoor

    कहाँ हैं दीपा शर्मा, डा. मीना जी. हर जगह टिप्पणी करने वाले ये दोनों इस पृष्ठ से गायब क्यों हैं ? यानी उनकी असलियत वही है जो सब समझ रहे हैं. केवल एक ही काम है इनका और ऐसों का; भातीय संस्कृति व भारत को अपमानित करना. इस खबर पर तिपानी से पोल खुलने का दर जो है.

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  4. shishir chandra

    i appreciate mr suresh chipulkar ji. islami fundamentalism is serious concern for all of us. marxists parties are guilty of votebank. chopping of hand is indeed condemabale event and any wise person or organisation will never allow such occurence. now kerala is a volitile state and if the govt will fail to prevent such events repeatedly then kerla will be sink soon like somalia or afghanistan. where is 100% literacy rate of Kerla? i think this is poor one as like Bihar. the brainwashed mindset of muslims are serious challenge for kerla and it’s integrity. the growing population of islam in kerla is very anxious. it’s 24% now and they vote collectively and one party needs just around 40% to win any election. so they must have to manage some more voters to vin any election. this electioneering funda has given much depth to muslims just like they are in majority in numbers. even they have started practicing according to sharia. i think this complete furtile state for daarul islam. god bless the people who are in power in kerla and india too. i think kerla is as par the afghanistan.

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  5. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    आदरणीय श्रीराम जी,
    ये जाजु और विजय्वर्गीय संघ नहि है,और मेनें एन दोनो का नाम भि कभी संघ में नहीं सुना,फ़िर एसे लोगो को सन्घ से जो्डना हि बेकार है,ना ये सन्घ के कोए पदधिकारि है ना ये कोए प्रचारक है.रही बात भाजपा की तो भाजपा है ही किस खेत की मुली??लगता है आप भि उन लोगों से है जो यह सोचतें है कि राजनीति ही सब कुछ है और देश का भला या बुरा सब इससे ही होगा??माननीय करोडों स्वयं सेवक निस्काम भाव से रास्त्र आराधना में लगे हुवे है,जो अपनि चमडी व दमडी गिस कर निरंतर कार्य कर रहे है,एसे लोग आपको दिखायी नहीं देते है??राजनीती तो है हि एसी जो सोचने कि शक्ति कुन्ध कर देती है,एसे छोड कर जरा संघ कार्य को देखीये व करीयें,तब पता चलेगा की कितना गलत सोचते थे आप संघ के बारे में.
    देश की धरोहर राजनीती नहीं लोक नीती है,जिसे आज संघ कर रहा है,ये वो ही व्यक्तित्व निर्माण की पाठशाला है जिसका स्वपन विवेकानन्द जी ने देखा था,प्रत्येक व्यक्ती के ह्र्दय में उत्क्र्स्ट रास्ट्र भाव को जाग्रत कर प्रत्यक्श निर्माण के कार्य में लगाना ही सन्घ काम है,ये काम आपको हिसां प्रदान दिखायी देता है तो मैं आपसे निवेदन करुन्गा कि अपने विचार सुधारिये,और आईये संघ को स्वयं देखीये,अखबारों के चश्में से नहीं स्वय़ं अपने अनुभव से.

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    • डॉ. मधुसूदन

      Dr. madhusudan uvach

      Dear Shriram ji—-I support abhishekji,s statements. Sangh is an ACTION ORIENTED ORGANISATION. If you(i e -LEFT) want to respond to sangh, please do so by ACTION, NOT ONLY BY WORDS. Action is also a better language, speaks louder than words. Put “action” where your mouth is. (no disrespect is intended) Sangh is also spread worldwide even in Caribean countries like Trinidad, Surinam, Guyana. Tell me, what politics (BJP?) sangh has to do in these far placed countries? I have been from a Gujarati Gandhian home, and took few years to know SANGH. Was prejudiced beyond any imagination before, my father worked for Sarvoday movement, and was unhappy with post independece national happenings. We need all for for national regeneration of Bharat. Sarvesham Avirodhen …… As Krishna to Arjun, Chanaky to Chandargupt, or Ramdas to Shivaji, So an adviser is Sangh to BJP. Politics can corrupt so you need a balancing force. BJP is always (in future too) likely to faulter. Sorry for use of English, being out of town, could not help. I will respond to you for any questions by next Tuesday/wednesday.

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  6. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    आदरणीय पुरोहित जी में आपकी संवेदनाओं को ह्र्दय्गम करने की कोशिश करूँगा ,किन्तु कृपया ठन्डे दिमाग से सोचें की क्या कोई भी संघठनजो दावा करे की वही एकमात्र है जो भारत में अमृत घूँट पी कर परवान चढ़ा है और वही है जो राष्ट निष्ठां से परिपूर्ण है तो गुण दोष भी तो उसी के देखे जावेंगे न .अब यदि वामपंथ में कुछ गलत है तो उसे आलोचना का सामना करना ही होगा .और यदि दक्षिण पंथी भाजपा या उसकी मात्र संस्था में कोई दोष है तो उसको भी
    आत्म मंथन करने में कोई इतराज नहीं होना चाहिए .
    अभी कल की ताजा खबर है की भाजपा केन्द्रीय कार्यालय के प्रभारी श्री श्याम सुंदर जाजू को देश छोड़ने पर कोर्ट ने पावंदी लगा दी है .अब ये मत कहना की ये सब झूंठ है या वामपंथ का हाथ है .इसमें केंद्र सरकार का भी कोई लेना देना नहीं है ..असल जानकारी भाजपा मुख्यालय से ले लेना .
    फ़िलहाल हम जो आपको बताने जा रहे है वो ये है की श्याम सुंदर जाजू के तार दुबई से जुड़े हैं ये सज्जन पहले संघ के बहतरीन सेवक {?}हुआ करते थे .संघ ने जनसंघ की पृठभूमि को भाजपा के रूप में जब वर्तमान संस्करण प्रस्तुत किया तब से लगातार केन्द्रीय कमान में ये सज्जन विराजमान रहे .इन पर आरोप भाजपा के ही बड़े नेताओं ने विगत चुनाव के दौरान लगाये थे किन्तु आम चुनाव के मद्दे
    नज़र मामला ठंडा रखा गया .अब भाजपा के नेत्रत्व को कोई काम नहीं तो अपनी अंदरूनी साफ सफाई में लग गए है.सर्व श्री मोहन भगवत .माधव गोविन्द वेद्द्य होस्बोले सुरेश
    सोनी के निर्देश पर स्वयम गडकरी जी यह पुनीत कार्य कर रहे हैं .संघ की महिमा को कोई खतरा गेरों से नहीं इन्ही
    जाजू जैसे ran bankuron से है
    kal delhi ki patiyala house adalat ne karoron ke ghotale ke aarop men shri jaju ka prakaran prastut
    nahin kar pane ke liye delhi police ko fatkar lagai thi ,
    unke dubai sthit bank khate se karodon ka len den ujagar hua hai .
    isi tarh m p men kalaish vijayvargeey jo ki tees salana swym sevak hai buri tarah ghotalon ke dal dal men bizbiza rahe hain.mene ye handi ke do chaval hi aapko dikhaye hain kyon ki ab aap mujh par asty bayni ka aarop lagen to meri bala se .dono prkanoon ki jankari aap bhajpa aur sheersh netrtw se le sakte hain.
    त्रुतिविहीन है. तो फिर दूर क्यों जाएँ अभी कल की तजा

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  7. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    आदरनीय श्रीराम जी,
    कम से कम असत्य तो मत लिखिये,भगत सिहं कब से वामपंथी हो गया???दुसरे यहां यह लिखने कि भि कोए जरुरत नहि थि कि आप १० साल तक संघ कि शाखा गये थे,वास्त्व में गये होते तो फ़िर भी एसे लिखते है??क्यों झुठ लिखते हो??और संघ ने कब हिन्सा का सम्र्थन किया था???जरा कोए उधारण तो दिजीये???वामपंथ का मुल उधेश्य ही हिन्सा है चहे वो लेनिन ने किया हो या माओ ने या भारत के कमुनिस्ट कर रहें है.”सत्ता बन्दुक की गोलि से निकलति है” किसने कहा था??आज सत्य बात तो यह है कि वामपंथियो को भारत में आधार नहिं मिल रहा है,अपने इस आधार को बनाये रखने के लिये वो देशध्रोहि ताकतों का सहारा लेने में भी नहिं हिचक रहे है,आप जेसे बुधि जिवि एसे लोगो को छदम आवरण प्रदान कर रहे है जानते हुवे या अनजाने में.और रहि बात अन्हिसा से देश को आजाद कराने की तो जरा एटली का हाउस ओफ़ कोमस में दिया गया विवरन तो पढीयें जो उन्हॊने चर्चील के पुछनें पर दिया था.

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  8. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    श्री सुरेश जी, आपके महत्वपूर्ण, खोजी और तथ्य परक लेख के समर्थन में कुछ प्रमाणिक जानकारियाँ प्रस्तुत हैं ——-

    * मुझे लोगों से तब तक युद्ध करते रहने का (अल्लाह से) आदेश मिला है जबतक कि वे ये न मानने लगें कि अल्लाह के अतिरिक्त दूसरा कोई उपासना के योग्य नहीं है और अल्लाह का रसूल (पैगम्बर ) होने के कारण मुझ पर और जो मेरे द्वारा लाया गया (कहा गया) है, उसपर विश्वास न करने लग जाएँ.* -“मुहम्मद साहिब, हदीस सं.३१: सही मुस्लिम”
    * फिर जब पवित्र महीने बीत जाएँ तो मुशरिकों को जहाँ पाओ क़त्ल करो, और उन्हें पकड़ो,और उन्हें घेरो,हर घात कि जगह उन की ताक में बैठो.—“कुरआन शरीफ-९:५”
    * और उसने तुम्हें उनकी धरती और उनके घरों और उनकी संपत्ति का वारिस बना दिया और उस भूमी का भी जिसपर तुमने पैर रखा.—.”कुरआन शरीफ-३३:२७”
    * तो जो कुछ लूट तुमने हासिल की है उसे हलाल और पाक समझकर उसका आनंद उठाओ और आल्लाह से डरते रहो. निस्संदेह अल्लाह बड़ा क्षमाशील और दया करनेवाला है. “कुरानशरीफ ८:६९”
    *चार्ल्स हेमिल्टन (किताब भवन -देहली से प्रकाशित ) द्वारा लिखित पुस्तक में बतलाया गया है कि गैर मुस्लिमों के साथ युद्ध की क्या मुस्लिम नीतियाँ हैं—-
    १. इस्लाम पर आस्था न रखने वालों के विरुद्ध किसी न किसी मुस्लिम संगठन द्वारा निरंतर युद्ध करते रहना आवश्यक है.” खण्ड २, पृ .१४०”
    २.इस्लाम पर विश्वास न करने वालों के ऊपर बिना किसी कारण के भी आक्रमण किया जा सकता है.
    * किसी मुस्लिम द्वारा किसी गैरमुस्लिम की ह्त्या करना अपराध नहीं है ,ऐसा इस्लामी शरियत का स्पष्ट आदेह है. “सरकार : हिस्ट्री ऑफ़ औरन्गज़ेब, भाग-३, पृ.१६८ ”
    * बिना एक दिन की भी छूट के मूर्तियाँ अविलम्ब नष्ट करनी पड़ेंगी. इस्लाम और मूर्तियों का सह अस्तित्व संभव नहीं है .”म्यूर,पृ.४५०”

    # उपरोक्त सारे उधरनो का अवलोकन करके किसीको भी आसानी से समझ आजाना चाहिए कि गैर मुस्लिमों को समाप्त करना हर मुस्लिम कि परम पवित्र और पहली जिम्मेवारी है, उसकी सम्पत्ती को लूटना, स्त्री का शील भंग करने का पवित्र अधिकार उसे उसके खुदासे उसे मिला हुआ है. गैर मुस्लिमों से निरंतर युद्ध करने का उसे स्पष्ट आदेश है. मूर्ती पूजा जैसी अपवित्रता (?) तथा धरती पर यह कुफ्र फैलाने वालों की समाप्ति उसके जीवन का परम लक्ष्य है. मुहम्मद – साहिब, कुरानशरीफ तथा हदीस के यही आदेश उसे बार-बार मिले है. कुरआन पर ईमान लानेवाले हर मुस्लिम को इनपर आचरण करना ही होता है. अगर वह ऐसा नहीं करता तो वह सच्चा मुसलमान कैसे हो सकता है. अतः मुस्लिम पिछले १५०० साल से जो हिंसा कर रहे हैं , यही करने के लिए उनकी स्थापना की गई है. इससे इतर आशा उनसे करना मूर्खता है, मुस्लिम इतिहास और मज़हब के प्रती अज्ञानता है.
    जो सैंकड़ों उदहारण उन मुस्लिमों के हैं जो भारत की संस्कृती में रच – बस गए , वे ऐसे लोग हैं जिन्होंने भारत की हिन्दू संस्कृति को जीवन में उतार लिया, इसके दीवाने हो गए. इनका प्रतिशत दशमलव एक भी नहीं होगा.
    तो मुस्लिम लोग तो बड़ी इमानदारी से वही कर रहे हैं जिसका आदेश उनका मज़हब उन्हें देता है, आपको क्या करना है ? आप खुद सोच लें . पर कृपा करके अब ये झूठ बोलना बंद कर दें कि हत्याएं करने वाले चंद भटके हुए नौजवान हैं, हिदू-मुस्लिम एकता, सहस्तित्व आदि आदी . अरेभाई आपकी सहमती से क्या होता है, उन्हें उनका इस्लाम ऎसी इजाज़त ही नहीं देता.
    सच का सामना करें, उसे झुठलायें नहीं. धर्म निरपेक्षतावादियों से निवेदन है कि हम लोगों को और मूरख बनाने, बहकाने का प्रयास न करें. वैसे मैं जानता हूँ कि वे कभी भी अपनी करनी से बाज़ नहीं आयेंगे . क्योकि वे सच को जानते है, उनके निहित स्वार्थ सच पर पर्दा डालकर ही सिद्ध होते हैं. इसी की रोटी वे खाते हैं. फिर चाहे दक्षिण पंथी हों या वाम पंथी.
    पर हम सब हैं केवल- केवल भारत पंथी. जिसे मिलना हो हम में मिल जाए . सारी समस्याओं का समाधान भारतीयता की जादूई छड़ी में है. विश्वास हो तो–
    ” दल बादल सा निकल पडा यह दल मतवाला रे, हम मस्तों में आन मिले कोई हिम्मत वाला रे “

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  9. श्रीराम तिवारी

    shriramtiwari

    आदरणीय श्री सुरेश चिपलूनकर जी आपने वर्तनी दोष बताकर अनुग्रहीत किया धन्यवाद .आइन्दा ध्यान रखूँगा .
    आपने बजा फरमाया है की हमारे अवतारी महापुरषों ने अहिंसा सहिष्णुता को जब अपनाया था तब वामपंथी नहीं थे .आपकी इस सच्ची उद्घोषणा से यह भी सावित हो गया की चलो गनीमत समझो एक हजार साल की गुलामी के लिए चाहे जो कसूरवार हो पर वो कम से कम वामपंथी तो नहीं थे क्यों की वामपंथ का भारत में उदय शहीद भगत सिंह .असफाक उल्लाह खान चंद्र्शेखर बटुकेश्वर दत्त इत्यादि द्वारा गठित हिदुस्तान सोसलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के वरद हस्त से संभव हुआ था ..पढ़ें शहीद भगत सिंह की पुस्तक -मेरी आत्मकथा .रहा प्रश्न की मेने आपके आलेख को जब वामपंथियों द्वारा संज्ञान योग्य नहीं प्रतिपादित किया तो स्वयम संज्ञान क्यों लिया ?तो में आपको बता दूं की में एक दशक तक आर एस एस की शाखाओं में तो गया हूँ किन्तु कभी किसी वामपंथी की कोई क्लासनहीं देखी .जिस सहिष्णुता अहिंसा को आप कायरता बता रहे हो उसी अहिंसा से देश आज़ाद हो पाया था और अब श्री मोहन भागवत एम् जी वेद्द्य इत्यादि आर एस एस सुप्रीमो
    भी हिंसक छवि से मुक्त होना चाहते हैं .शीघ्र ही आपको आर एस एस का नया चिंतन नया दर्शन देखने को मिलेगा .आप अति शीघ्र अपने लिखे हुए को स्वयम ही कूड़ेदान में फेंक देंगे .साम्प्रदायिकता की आग में वही जलता है जो जलाता है .इराक इरान अफगानिस्तान और हमारे भारतके कश्मीर में .लेबनान में अधिकांश एक ही मज़हब के लोग मारे जा रहे हैं मारने बाले भी उसी मज़हब के ही हैं .आप यदि वास्तव में सच्चे दिल से देश प्रेमी हैं तो सर्वधर्म सम भाव .धर्म निरपेक्षता .सामाजिक समरसता का संचार करें किसी के घर में आग कोई और लगाये आप बुझाने के बजाय किसी और पर तोहमत लगाकर सामाजिक विद्वेष के उत्तर दाई न बने .
    डॉ राजेश कपूर जी आप के विचारों से मेरी टिप्पणी का कोई सातत्य नहीं बन पा रहा है .निवेदन है की अपने अमूल्य विचारों में ऐतिहासिक विकास की सच्चाई को पुन ;
    अवलोकित करें .
    श्री गोपाल के अरोरा जी ने जो भी कहा उससे असहमति का प्रश्न ही नहींउठता कट्टरता चाहे अंध साम्प्रदायिकता की हो या वामपंथी या दक्षिणपंथी राजनीतिक विचारों कीहो सहिष्णुता की अहिंसा की भाई चारे की संज्रीवनी सभी को धारण करना ही होगा जो कट्टरवादी होगावह स्वयम ही सम्माप्त हो जायेगा
    SURVIVAL IS FITTEST

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  10. GOPAL K ARORA

    सुरेश जी के लेख पर श्रीराम तिवारी ने सही लिख दिया की वामपंथी ऐसी बकवास को संज्ञान लेने योग्य नहीं मानते .. “वामपंथ के अतिरिक्त सब बकवास है” ऐसा मानने वाले भी कट्टरवादी
    ही कहे जा सकते हैं.. पर आश्चर्य तो इसा बात का है कि उरीसा में हिन्दुओं को बरगला कर इसाई बनाने वाले एक पादरी सेंट ग्राहम की एक हिन्दू समर्थक द्वारा ह्त्या हो जाने पर जिन वामपथियों, मानव अधिकारों के तथाकथिक रक्षको एवं मीडिया ने हाय हाय करके जमींन आसमान एक कर दिया था वे किसी हिन्दू के साथ हुए अमानवीय व्यवहार को ऐसा कहकर टालना कहते हैं कि यह दो कट्टरपंथियों के बीच का मामला है .. “मैं न मानू वृति ” इसी का नाम है…

    की

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  11. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    are vampanthiyo se kisane puchha hai??unaki okat hi kya??sivay todane ,marane our sangh or hinduo ko gali dene ke alava unko ata hi kya hai??tiwari sahab article ko dhyan se padho,ye keral ki gatna nahi hai balki sare bharat ki bat hai,or apane as pas bhi esa hi samaaj rahata hai,jisake samane vampanthiyo ko apani nak ragadate savym dekha hai…………….

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  12. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    श्री राम तिवारी जी, थोड़ी तो इमानदारी से सोचने का प्रयास करें. एक शब्द उधृत करने से किसी का हाथ कट डालने वालों और अपने देवी देवताओं के नग्न चित्र बनाए जाने पर अति सामान्य प्रतिक्रया करने वालों को एक समान कहकर आपने बता दिया की आप निष्पक्ष रूप से सोचने-समझने का प्रयास नहीं कर रहे. तुलनात्मक रूप से अति अहिंसावादी भारतीय सम्प्रदायों और अति हिंसावादी सेमेटिक सम्प्रदायों की कभी केवल एक बार तथ्यों के आधार पर तुलना करके तो देखें. अपने आप को, अपने समाज को और संस्कृती को गरियाते रहना मैकाले के मानस पुत्रों और वाम पंथियों ( सच्ची का सामना करें, बुरा न मानें ) का पुराना शगल है. इसपर कभी तो ठन्डे दिमाग से सोचकर देखें.
    मेरे भाई तिवारी जी यदी हिन्दू समाज हिंसक और असहिष्णु होता तो क्या दूसरे सम्प्रदायों के लोग यहाँ सुरक्षित रह पाते ? पाक और अरब देशों के बारे में कुछ जानते हैं या नहीं ? मेरा विनम्र सुझाव है कि इज्म और वाद के पूर्वाग्रहों से बाहर निकलकर वस्तुपरक मूल्यांकन का प्रयास करें .
    अंत में इतना ही कि हम सहमत हों या न हों पर संवाद के दवाज़े सदा खुले रहने चाहियें. आखिर हम सौभाग्य से भारत में रहते हैं,चीन ,तिब्बत,रूस या किसी इस्लामी देश में नहीं..

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  13. सुरेश चिपलूनकर

    सुरेश चिपलूनकर

    आदरणीय श्रीराम तिवारी जी,

    आपने कहा – “भगवान राम, कृष्ण, गौतम, महावीर, विक्रमादित्य, अशोक, महात्मा गाँधी या शिवाजी इनमे से कोई भी बजरंग दल में शामिल नहीं था…”

    सही बात है, लेकिन महावीर और शिवाजी के समय इस्लामिक आतंकवाद, NDF और वामपंथी दलों जैसा “कचरा” भी तो नहीं था…

    आपने (ढेर सारी वर्तनी की गलतियों सहित) कहा – “ईस आलेख में जिन बामपंथियों को पानी पी पी कर चिपुनकर जी गरिया रहे हो वे तो आप को इस काबिल भी नहीं समझते की आपकी बकवास का संज्ञान लिया जाए…”

    फ़िर वामपंथी होते हुए भी आपने संज्ञान क्यों ले लिया? न सिर्फ़ संज्ञान लिया, बल्कि बगैर कोई सबूत-लिंक-तथ्य दिये बिना ही अनर्गल टिप्पणी चेंप कर चल दिये… कोई जवाब तो दिया ही नहीं… 🙂 🙂 🙂

    रही बात “भोले-भाले सहिष्णु” हिन्दुओं की, तो इसी भोलेपन की वजह से “भाले” घुसाये जाते रहे हैं, और एक समय जहाँ अफ़गानिस्तान से इंडोनेशिया तक हिन्दू शान्ति से रहते थे, आज वहाँ से लतिया दिये गये हैं, कश्मीर लगभग जा ही चुका, असम और केरल भी जाने वाले हैं… आप सहिष्णुता के भजन गाते रहिये।

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  14. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    सुरेशजी के खोजपरक आलेख से सहमत होना जल्दबाजी होगी .प्रस्तुत आलेख का केंद्र बिंदु क्या है.?एक कट्टरपंथी साम्प्रदायिक व्यक्ति को दुसरे साम्प्रदायिक व्यक्ति द्वारा पीड़ित किया गया.आपने भोले भले सहिष्णु हिन्दुओं को बीच में घसीट कर ऐंसा अंतर्संबंध स्थापित करने की कोशिश की मानो देश के एक अरब हिदू यदि बजरंगी नहीं हो जाते या आर एस एस से सम्बद्ध नहीं हो जाते तो देश या कोम का बेडा गर्क हो ही जाएगा .भगवान राम कृष्ण गोतम महावीर विक्रमादित्य अशोक महात्मा गाँधी ;या शिवाजी इनमे से कोई भी बजरंग दल में शामिल नहीं था .स्वामी विवेकानंद शहीद भगतसिंग के विचारों में कहीं भी इस तरह का अरण्यरोदन नहीं है.इसी तरह आज भी देश और दुनिया में समस्त मानवता के हितेषी हैं .सभी धर्मों के कट्टरपंथी एक जैसे हैं .कोई दूध का धुला नहीं है.
    सभ्यताओं का संघर्ष सिर्फ अमेरिकन पूंजीवाद का छलावा मात्र है.ईस आलेख में जिन बामपंथियों को पानी पी पी कर चिपुनकर जी गरिया रहे हो वे तो आप को इस काबिल भी नहीं समझते की आपकी बकवास का संज्ञान लिया जाए .

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  15. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    छा गयें सुरेश जी………………….गजब इतनि जानकारी कहां से लाते हो इतनि महत्व्पुर्न जानकारी???आपका यह लेख सग्रर्णिय है.

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  16. Agyaani

    आदरणीय लेखक महोदय,
    मुझे ये कहते हुए बहुत दुःख हो रहा है की इतनी बर्बर घटना को हमारे देश के प्रमुख चैनल क्यों सामने नहीं लाते या इतना वक़्त क्यूँ नहीं देते जितना कि धोनी कि शादी या फिर सान्या मिर्ज़ा के लिए दिया था!

    कल देश के सभी प्रमुख चैनल लोकी के जूस पीकर एक प्रोफेसर की मृत्यु पर बार बार ब्रेकिंग न्यूज़ दे रहे थे और ऐसा लग रहा था जैसे बाबा रामदेव जी ने खुद वो लोकी अपने खेत से रसायन युक्त खाद डालकर बनाई थी! उन्हें हालाँकि बाबा रामदेव जी द्वारा गंभीर रोग से पीड़ित लोगों के ठीक करने की खबर छापने से बहुत परहेज है!

    आज लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ इतना निरंकुश हो चूका है कि सरकार के साथ इनकी मिलीभगत कि बू आती है! क्या भारत वाकई में एक धर्मनिरपेक्ष राज्य रह गया है?

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  17. sunil patel

    बेहद अफसोसजनक और निंदनीय घटना है. सरकार समय रहते नहीं चेती तो स्तिथिया विस्फोटक हो सकती है.

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  18. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. मधुसूदन उवाच

    समाज तो अकर्मण्य है।
    कह रहा है:
    अकर्मण्येऽवाधिकारऽस्ते॥ पर,
    सर्व फलेषु सदाचन॥
    अकर्मण्य रहूंगा, पर सारे फल मिलने चाहिए। कौन देगा?
    उत्तर: अवतार आएगा और बचा जाएगा। या, कोई और करे, तोगडिया करे, सिंघल करे, बजरंग दल करे। यह लोग क्या कर रहे हैं? अब इनकी याद आएगी।
    प्रश्न: क्यों? इनको आप वेतन देते हो क्या?
    हां हां हा हा हे हे।
    पर मैं तो? मुझे समय नहीं है। बीबी है, बच्चे हैं, घर परिवार है, दूर दर्शन देखना होता है। कितना काम? फुरसत नहीं है।
    अपनी अपनी संभालियो, जी, भाडमें जाय देस।
    समाज, अवतार की राह देख रहा है, कोई “कृष्ण” आयेगा, हमको बचाने?
    लेकिन, यही सच है, कि **”अवतार कार्य”** हमीको करना होगा।
    हमे ही, बिल्लीके गलेमें घंटी बांधनी होगी।
    समस्याओं को अंकुरित होते समय सुलझानेमें सरलता होती है।
    कमसे कम मूल्य चुकाना पडता है।
    नहीं तो फिर बढते बढते “कश्मीर समस्या” बन जाती है।
    रोग और सर्प को खतम करनेमें देरी करना मूर्खता है।

    सुरेश जी शतशः धन्यवाद।

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