कविता

प्रश्नपत्र है ज़िंदगी,

प्रश्नपत्र है ज़िंदगी, उत्तर अपने कर्म।
सच की स्याही से लिखो, जीवन का तुम मर्म॥

सबको खुश कर आज तक, कौन हुआ खुशहाल।

अपने मन से पूछना, क्या है तेरा हाल॥

सुख-दुख दोनों साथ हैं, जीवन के अध्याय।
हँसकर उनको जो पढ़े, समझदार कहलाय॥

हर प्रश्नों का हल नहीं, मिलता इस संसार।
कुछ उत्तर स्वीकार कर, बढ़ना है हर बार॥

जीवन की हर राह पर, मिलते प्रश्न अनेक।
हिम्मत जिसका साथ दे, जीत उसी की नेक॥

भाग्य भरोसे मत रहो, कर्मों पर हो काम।
मेहनत से ही लिख सको, जीवन का परिणाम॥

जो चाहा वह सब मिले, ऐसा नहीं विधान।
जो मिलता स्वीकार कर, रखना ऊँची शान॥

समय परीक्षा ले रहा, धीरज रखना मित्र।
आज कठिन जो प्रश्न है, कल देगा नव चित्र॥

हर मुश्किल को देखकर, मत होना लाचार।
पत्थर से ही फूटता, जलधारा का द्वार॥

जीवन कोई खेल ना, नहीं आसान राह।
जिनके बुलंद हौसले, पूरी होती चाह॥

कुछ प्रश्नों के उत्तरों, छिपा हुआ है सार।
मौन स्वयं कहता कभी, जो न कहे संसार॥

जीवन के हर मोड़ पर, मिलता नया सवाल।

अनुभव जिसकी ढाल है, ढूँढे हल हर हाल॥

हार-जीत जीवन रहे, दो पहलू पहचान।
हार सिखाती सीख जो, जीत बढ़ाती मान॥

सुख आए तो मत उछल, दुख में मत घबराय।

समय चक्र की चाल को, कोई रोक न पाय॥

प्रश्न कठिन हों सामने, मन में रखना आस।

अंधियारे के पार ही, मिलता नया प्रकाश॥

जो बीता सो सीख है, जो आए वो मर्म।
वर्तमान को जी सखे, यही श्रेष्ठ है कर्म॥

जीवन की इस दौड़ में, मत खोना सद्भाव।
जीत वही जो बाँट दे, औरों के भी घाव॥

हर उत्तर के बाद भी, प्रश्न खड़े सौ बार।
जीवन चलता सीख से, खुलते नए विचार॥

किस्मत को मत कोसना, कर्मों का कर मान।

मेहनत से ही बदलता, जीवन का प्रतिमान॥

— डॉ. सत्यवान सौरभ