मै रहूँ न रहूँ,मेरा देश रहना चाहिए |

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मै रहूँ न रहूँ,मेरा देश रहना चाहिए |
मै बढ़ूँ न बढूँ मेरा देश बढ़ना चाहिए ||

आया है जनसँख्या का सैलाब,यह रूकना चाहिए |
साधन है सीमित,जनसँख्या तो कम होनी चाहिए ||

करे मेरा देश विकास,उसका विश्व में नाम हो |
बन जाये विश्व गुरु,उसकी विश्व में शान हो ||

हर हाथ को काम,हर इनसान को शिक्षा मिले |
सब हो समान इस देश में,यह अधिकार मिले ||

है हम शान्ति के पुजारी,युद्ध से बचना चाहिए |
जो करे हमारी शांति भंग उससे लड़ना चाहिए ||

करते नहीं अपमान किसी का,हमे सम्मान चाहिए |
रखते है सभी से दोस्ती,हमे उसका मान तो चाहिए ||

मै रहूँ न रहू,मेरा देश रहना चाहिए |
मै बढूँ न बढूँ,मेरा देश बढ़ना चाहिए ||

आर के रस्तोगी

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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