मोदी का ‘छक्का’ और पाक के ‘छक्के’

26 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने प्रधानमंत्री काल के 6 वर्ष पूर्ण किए हैं । इस काल में श्री मोदी ने कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं । जिनसे उनकी न केवल भारत में बल्कि विश्व में भी एक सक्षम और निर्णय लेने में समर्थ नेता की छवि बनी है । उनके द्वारा लिए गए ऐसे सभी निर्णयों में से सबसे अधिक महत्वपूर्ण निर्णय जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाना रहा है । इसके अतिरिक्त जो पाकिस्तान विश्व मंचों पर भारत को घेरने में पिछले कई दशक से सफल होता आ रहा था , उसे प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति ने उल्टा घेर कर रख दिया है। अब इस समय पाकिस्तान एक असहाय देश की मुद्रा में खड़ा हुआ है । यहां तक कि उसके सेनाध्यक्ष बाजवा ने अभी ईद के अवसर पर अपने सैनिकों को संबोधित करते हुए यह स्वीकार कर लिया है कि भारत पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग करने में सफल रहा है । ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की सराहना किया जाना आवश्यक हो जाता है ।
पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति की महत्ता के उपरान्त विश्व के सभी महत्वपूर्ण देश उससे दूरी बनाते नजर आए । मोदी विरोध के नाम पर कुछ लोग देश में यह प्रचार करते हैं पाए जाते हैं कि कुछ टीवी चैनलों को मोदी सरकार ने अपने लिए खरीद लिया है , जो केवल पाकिस्तान और चीन का आतंक दिखाते रहते हैं । इसके अतिरिक्त और कुछ भी इन टीवी चैनलों के पास दिखाने के लिए नहीं है । ऐसे आलोचकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यही दोनों देश रहे हैं जिन्होंने पिछले कई दशक से भारत को विश्व मंचों पर असहाय देश की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया था । भारत को ऐसी जंजीरों से बांधा गया कि वह कुछ चाह कर भी कर नहीं पा रहा था । ऐसे में इन देशों के विरुद्ध यदि मोदी सरकार के शासनकाल में कुछ भी ऐसा किया गया है जिससे इन दोनों देशों को अपने किए का ‘उचित पुरस्कार’ मिला है या मिलना आरंभ हुआ है तो उसे यथोचित ढंग से देश के लोगों को दिखाया जाना बहुत आवश्यक है ।
हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि 2019 में जब देश में लोकसभा के चुनाव हुए थे तो उस समय भी भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में पाकिस्तान के आतंकी चेहरे के विरुद्ध आक्रामक दृष्टिकोण अपनाया था । जहाँ तक अनुच्छेद 370 को हटाने की बात है तो यह बीजेपी के एजेंडे में पहले दिन से रही है । ऐसी भी चर्चा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शासन के पहले कार्यकाल में तत्कालीन गृह मंत्री रहे राजनाथ सिंह धारा 370 को हटाने के लिए कहा था , परंतु उस समय यह कार्य संभव नहीं हो पाया । परंतु मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जब अमित शाह गृहमंत्री बने तो उन्होंने इस धारा को हटाने की तैयारी गृह मंत्री बनते ही आरंभ कर दी।
देश के लोग पाकिस्तान के द्वारा 1972 से भारत के विरुद्ध जिस प्रकार का परिवेश सृजित किया गया और जिस प्रकार पाकिस्तान की ओर से पंजाब व जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को प्रोत्साहित किया गया उसके दृष्टिगत देश के लोग इस पड़ोसी देश से बहुत दुखी हो चुके थे । यही कारण रहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जब जब पाकिस्तान के विरुद्ध कोई कार्यवाही की है या उसके वीर9 कठोरता प्रदर्शित करने वाले कुछ शब्दों का प्रयोग किया है तो देश के लोगों ने उसका करतल ध्वनि से स्वागत किया है।
भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पहली बार पाकिस्तान की सीमा में घुसकर सैन्य ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूर्ण किया। इतना ही नही पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए एक बार सर्जिकल स्ट्राइक की तो दूसरी बार एयर स्ट्राइक।
हमें याद है कि भारतीय जनता पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनावों के समय अपने चुनावी घोषणा पत्र में देश के लोगों से यह वायदा किया था कि “हम आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों और संगठनों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर ठोस कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और ऐसे देशों तथा संगठनों को वैश्विक मंच पर अलग-थलग करने के लिए हम सभी जरूरी उपायों पर कार्य करेंगे।”
देश के लिए यह एक अच्छी बात रही कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में सत्ता संभालते ही अपने चुनावी घोषणापत्र के अनुसार कठोर निर्णय लेते हुए पाकिस्तान के विरुद्ध कठोरता का प्रदर्शन किया और साथ ही जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाकर उसे इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया । जो लोग यह कहते थे कि धारा 370 को यदि हाथ लगाया गया तो जम्मू कश्मीर में खून की नदियां बह जाएंगी या इसी प्रकार की कोई अन्य धमकी देते थे उनकी इस प्रकार की गीदड़ धमकियों को दरकिनार करते हुए और उनके विरुद्ध भी कठोर निर्णय लेते हुए मंत्री मोदी ने वह कार्य कर दिखाया जिससे लोग असंभव मानने लगे थे इसलिए एक नया नारा देश में भाजपा की ओर से चला कि ” मोदी है तो मुमकिन है।” जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित राज्यों में बांट दिया।
मोदी सरकार के इस साहसिक निर्णय से विश्व मंचों पर एक ही बार में और एक ही झटके में यह बात स्पष्ट हो गई कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वह उसका घरेलू मामला है ।जिसमें किसी भी देश को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। इसी के साथ यह बात भी निकल कर सामने आई कि पाक अधिकृत कश्मीर भी भारत का ही एक हिस्सा है। लोगों ने इतिहास को पलटना आरंभ किया और इतिहास के पन्नों पर दर्ज उन तथ्यों व प्रमाणों को एकत्र करने लगे जो स्पष्ट कर रहे थे कि जम्मू कश्मीर की रियासत का विलय जब महाराजा हरिसिंह ने भारत के साथ किया था तो उनका शासन जहां तक स्थापित था वह सारा जम्मू कश्मीर भारत के साथ चला गया था । इस प्रकार महाराज हरि सिंह की रियासत के जितने भाग पर पाकिस्तान ने जबरन कब्जा किया वह पाकिस्तान का उस समय किया गया दुस्साहस था । अतः पाकिस्तान के मित्रों ने भी बदली हुई परिस्थितियों में पाकिस्तान का साथ छोड़ने में ही अपना भला देखा । उसके मित्र भी उसका साथ छोड़ने लगे और उसे कहने लगे कि पाक अधिकृत कश्मीर पर तुम्हारा अधिकार न होकर भारत का अधिकार है । इस प्रकार प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विमर्श का विषय ही परिवर्तित कर दिया । वास्तव में समकालीन इतिहास में कूटनीति की यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवाली के अवसर पर कहा कि पाकिस्तान ने अवैध रूप से कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा कर रखा है , जिसकी पीड़ा उनके मन में बनी हुई है। प्रधानमंत्री मोदी के ऐसे तेवर देखकर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने भी अपने एक बयान में कहा था कि पहले हम कश्मीर की बात करते थे, अब हम मुजफ्फराबाद (पीओके) को बचाने की योजना बनाने लग गए हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के प्रधानमंत्री मोदी के रहते हुए विश्व में जिन – जिन मंचों पर भी जम्मू कश्मीर के मुद्दे को उठाने का प्रयत्न किया वहां वहां ही उन्हें मुंह की खानी पड़ी । इतना ही नहीं कई स्थानों पर तो उन्हें अपमानित भी होना पड़ा। वह पाकिस्तान में केवल इसलिए टिके हुए हैं कि उन्हें वहां की सेना का आशीर्वाद प्राप्त है , अन्यथा जितनी किरकिरी कश्मीर के बिंदु पर उनकी हुई है , इतनी यदि किसी अन्य प्रधानमंत्री की हो गई होती तो अभी तक वहां की सेना उन्हें या तो जेल में डाल चुकी होती या सत्ता से हटाकर ‘कहीं और’ भेज देती।
आपको ध्यान होगा कि चीन के आशीर्वाद और सहयोग से पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बंद कमरे में कश्मीर मुद्दे पर बैठक बुलाने में सफल रहा था । इससे पाकिस्तान ने कुछ देर के लिए यह आभास अवश्य किया कि इस बार शायद उसे आशातीत सफलता मिलेगी , परंतु हुआ इसके विपरीत ही कि उसे बंद कमरे में बुलाई गई इस बैठक से भी कोई लाभ नहीं मिला । पाकिस्तान को उस समय घोर निराशा हाथ लगी जब बंद कमरे में बुलाई गई इस बैठक में अमेरिका और फ्रांस ने कश्मीर को भारत का आंतरिक मुद्दा करार दिया । जिससे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में औपचारिक चर्चा का ना तो प्रस्ताव प्रस्तुत हो सका और ना ही भारत के विरोध में कोई वक्तव्य आया । शीतयुद्ध के वक्त से ही यूएनएससी में कश्मीर मुद्दे पर भारत का साथ देते आए रूस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सारे विवाद द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझने चाहिए।
कश्मीरी संघर्ष को फिलिस्तीन से जोड़कर उसे इस्लाम के चश्मे से दिखाने की पाक के सभी प्रयासों के उपरांत भी उसे मुस्लिम संसार का भी साथ नहीं मिला । यूएई और मालदीव ने कश्मीर को भारत का आन्तरिक मामला बताया । यूएई ने कुछ दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने यहां के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया था । मुस्लिम देशों में वर्चस्व रखने वाले सऊदी अरब ने कश्मीर मुद्दे पर भारत के विरुद्ध कोई बयान जारी नहीं किया।
मुझे पता है कि कुछ लोगों को प्रधानमंत्री मोदी की ऐसी प्रशंसा पर बड़ा अटपटा लगेगा , परंतु हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि विश्व मंच पर किसी भी प्रधानमंत्री के द्वारा किए जाने वाले कार्य देश के कार्य माने जाते हैं । उन्हें देश का प्रधानमंत्री ( चाहे किसी भी पार्टी का क्यों ना हो ) यदि गौरव पूर्ण ढंग से संपादित करता है और देश के नाम को सम्मानित रूप से स्थापित करता है तो उसकी प्रशंसा होनी चाहिए। मोदी भारत के भीतर कुछ लोगों की दृष्टि में किसी पार्टी विशेष के प्रधानमंत्री हो सकते हैं , लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के प्रधानमंत्री हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनके नेतृत्व में भारत को सम्मान मिला है तो उस पर उनकी प्रशंसा होनी चाहिए , क्योंकि उससे हम सबको गौरव और सम्मान का बोध हुआ है , इसलिए लेख को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है।

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